-इंटर्न डॉक्टर पर हमला, रॉड और लाठी-डंडों से मारपीट, गंभीर चोटें आईं
-सैकड़ों एमबीबीएस छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया
-प्रबंधन की प्रतिक्रिया: वार्डन रोहित सिंह को तत्काल प्रभाव से हटाया गया, कानूनी कार्रवाई का ऐलान
उदय भूमि संवाददाता
बाराबंकी। सफेदाबाद स्थित मेयो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में हॉस्टल की खराब स्थिति और घटिया खाने की शिकायत करने गए इंटर्न डॉक्टर प्रभाकर विश्वास पर चीफ वार्डन रोहित सिंह ने बर्बर हमला कर दिया। प्रभाकर के अनुसार उन्होंने शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे हॉस्टल में घटिया खाने और साफ-सफाई की स्थिति को लेकर वार्डन के पास शिकायत दर्ज कराई। इसके जवाब में रोहित सिंह ने उन्हें धक्के देकर कॉलेज कैंपस में ले जाया और अपने साथियों के साथ मिलकर लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा। मारपीट के दौरान प्रभाकर के सिर, पीठ और कंधों पर गंभीर चोटें आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वार्डन ने छात्रों और प्रभाकर के अन्य साथियों को भी धमकाया और बीच-बचाव करने आए छात्रों को गालियों से भला बुरा कहा। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने कॉलेज में छात्र समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया।
इंटर्न डॉक्टर प्रभाकर ने बताया कि उन्होंने वार्डन को हॉस्टल की बदहाली और घटिया खाने की शिकायत की थी, लेकिन वार्डन ने आक्रोश में आकर मारपीट की। उन्होंने कहा कि यह हमला केवल उनके खिलाफ नहीं था, बल्कि छात्रों और उनके अधिकारों पर हमला था। प्रभाकर के अनुसार हॉस्टल में रहने के दौरान कई बार छात्रों ने साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही सैकड़ों एमबीबीएस छात्र हॉस्टल और कॉलेज परिसर में जमा हो गए। छात्र प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे और वार्डन की निलंबन सहित कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र दो घंटे तक शांत नहीं हुए। छात्रों ने कहा कि कॉलेज में लाखों रुपए की फीस वसूली जाती है, लेकिन हॉस्टल और मेस की सुविधाएं बेहद घटिया हैं।
कॉलेज की डायरेक्टर मधुरिका सिंह स्वयं घटनास्थल पर पहुंचीं और छात्रों को आश्वस्त किया कि वार्डन रोहित सिंह को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने पर उसे कॉलेज से बर्खास्त किया जाएगा। इसके बाद छात्रों ने शांतिपूर्वक स्थिति संभाली। पुलिस ने प्रभाकर को मेडिकल सहायता प्रदान की और आश्वासन दिया कि आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। छात्र नेताओं और हिंदू संगठन के कार्यकर्ता भी प्रभाकर का समर्थन करने हॉस्टल पहुंचे, जिससे छात्रों के हक की लड़ाई को और बल मिला। इस मामले ने यह उजागर किया है कि उच्च फीस वसूली के बावजूद मेडिकल कॉलेज में हॉस्टल और मेस जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति नाजुक है।
छात्रों का कहना है कि जब भी वे शिकायत करते हैं या अपनी आवाज उठाते हैं, उन्हें प्रबंधन द्वारा डराया-धमकाया जाता है। प्रभाकर विश्वास की इस शिकायत और छात्रों के विरोध ने यह स्पष्ट किया कि हॉस्टल की हालत में सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही को तुरंत सुनिश्चित किया जाना चाहिए। छात्रों का यह भी कहना है कि भविष्य में किसी भी इंटर्न या छात्र के साथ ऐसी हिंसा और उत्पीडऩ न हो, इसके लिए कॉलेज प्रशासन को कठोर नियम और निगरानी लागू करनी चाहिए। इस घटना ने मेडिकल शिक्षा संस्थानों में छात्रों के अधिकारों की रक्षा और हॉस्टल प्रबंधन में पारदर्शिता की आवश्यकता को एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा है।
















