सिटीजन चार्टर से बढ़ा भरोसा: 10 माह में 88 हजार से अधिक नागरिकों का फीडबैक, मात्र 0.057% असंतोष

-पुलिस कमिश्नर जे. रविन्दर गौड़ की पहल से सेवाएं हुईं समयबद्ध और पारदर्शी
-पासपोर्ट सत्यापन से एफआईआर तक तय समयसीमा में निस्तारण, जवाबदेही हुई मजबूत
-नकारात्मक फीडबैक पर त्वरित कार्रवाई, पुलिस-जन विश्वास का सेतु हुआ मजबूत

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। आमजन को पुलिस सेवाएं पारदर्शी, जवाबदेह और निर्धारित समयसीमा में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू किए गए सिटीजन चार्टर का सकारात्मक प्रभाव सामने आया है। पुलिस आयुक्त जे. रविन्दर गौड़ द्वारा 2 मई 2025 को जारी निर्देशों के बाद कमिश्नरेट में सेवाओं के समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था लागू की गई थी। इसके तहत गठित फीडबैक सेल ने पिछले दस महीनों में पुलिस सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर नागरिकों की राय लेकर व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाया है। 2 मई 2025 से 18 फरवरी 2026 तक कुल 88,332 आवेदकों से फीडबैक लिया गया, जिनमें केवल 51 फीडबैक नकारात्मक पाए गए। यह कुल फीडबैक का मात्र 0.057 प्रतिशत है, जो नागरिक संतुष्टि का संकेत माना जा रहा है। नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई, जिससे जवाबदेही की भावना और मजबूत हुई।

जनहित को ध्यान में रखते हुए 18 मई 2025 को गठित फीडबैक सेल पासपोर्ट सत्यापन, चरित्र प्रमाण पत्र, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायक सत्यापन, कर्मचारी सत्यापन, जन शिकायत निस्तारण तथा एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया के दौरान पुलिस के व्यवहार, पारदर्शिता और समयबद्धता पर आवेदकों से प्रतिक्रिया लेती है। सेवाओं के निस्तारण की समयसीमा भी तय की गई है, जिसके अंतर्गत पासपोर्ट सत्यापन 15 दिन, पुलिस सत्यापन 10 दिन, चरित्र प्रमाण पत्र 10 दिन, किरायेदार सत्यापन 10 दिन तथा अन्य सत्यापन प्रक्रियाएं 10 दिनों में पूर्ण करने के निर्देश हैं। फीडबैक के आंकड़ों के अनुसार एफआईआर पंजीकरण से जुड़े 9,741 मामलों में 8 नकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं, चरित्र सत्यापन के 9,849 मामलों में 5, जन शिकायतों के 9,874 मामलों में 26 तथा पासपोर्ट सत्यापन के 58,868 मामलों में 12 नकारात्मक फीडबैक प्राप्त हुए। पुलिस प्रशासन का कहना है कि नकारात्मक प्रतिक्रियाओं पर तत्काल कार्रवाई कर सुधार सुनिश्चित किया गया।

कमिश्नरेट पुलिस ने नागरिक सुविधा को प्राथमिकता देते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रतियां संबंधित व्यक्तियों को उनके आवास पर उपलब्ध कराने तथा व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजने की व्यवस्था भी शुरू की है। इससे पीडि़तों को अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत मिली है। पुलिस आयुक्त जे. रविन्दर गौड़ ने कहा कि सिटीजन चार्टर लागू होने के बाद पुलिस सेवाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्धता आई है। इससे नागरिकों का विश्वास बढ़ा है और पुलिस-जन सहयोग मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि फीडबैक सेल की कार्यप्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे, ताकि नागरिक सहभागिता बढ़े और पुलिस सेवाएं और अधिक प्रभावी बन सकें। कमिश्नरेट पुलिस प्रशासन का लक्ष्य भविष्य में भी नागरिकों को सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना है। सिटीजन चार्टर की यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार का उदाहरण बन रही है, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे का रिश्ता भी मजबूत कर रही है।