पॉलिसी के नाम पर साइबर ठगी का जाल टूटा, पांच शातिर गिरफ्तार- करोड़ों की ठगी का खुलासा

-डिस्काउंट और रिफंड का झांसा देकर लोगों से कराते थे रकम ट्रांसफर, करोड़ों की ठगी का खुलासा
-साइबर क्राइम थाना पुलिस की कार्रवाई, 10 मोबाइल, 16 डेबिट कार्ड और कार बरामद
-फर्जी कॉल सेंटर स्टाइल में चल रहा था गिरोह, बीमा कंपनी के अधिकारी बनकर करते थे ठगी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बीमा पॉलिसी के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को विभिन्न बीमा कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर पॉलिसी धारकों को फोन करते थे और उन्हें डिस्काउंट, रिफंड और अतिरिक्त लाभ का झांसा देकर बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराते थे। इसके बाद सॉफ्टवेयर के माध्यम से फर्जी पॉलिसी तैयार कर पीडि़तों को भेज दी जाती थी। पुलिस की जांच में अब तक चार बड़े मामलों में करीब तीन करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है, जबकि शुरुआती जांच में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है। शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि साइबर क्राइम थाना पुलिस एक शिकायत के आधार पर जांच कर रही थी। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जानकारी मिली, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद शुक्रवार रात विजयनगर क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपियों में नोएडा के गढ़ी चौखंडी निवासी सुनील मिश्रा, जो मूल रूप से बलिया का रहने वाला है, दिल्ली के उत्तम नगर वेस्ट निवासी पवन कुमार यादव, जो गाजीपुर जिले के जंगीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम रामपुर जीवन का रहने वाला है, नोएडा सेक्टर-12 निवासी राहुल कुमार मिश्रा, जो बिहार के सारण जिले के बनियापुर का मूल निवासी है, नोएडा सेक्टर-119 निवासी जितेंद्र कुमार, जो बिहार के सुल्तानगंज क्षेत्र के बोधनगर गांव का रहने वाला है तथा नोएडा सेक्टर-22 निवासी दीपक कुमार, जो मूल रूप से बदायूं का रहने वाला है, शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 मोबाइल फोन, 16 डेबिट कार्ड, 11 सिम कार्ड, एक कार और 74 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पहले नोएडा स्थित एक कॉल सेंटर में काम करते थे, जहां से उन्हें जीवन बीमा पॉलिसी धारकों का डाटा मिला। इसी डाटा का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने अपना ठगी का नेटवर्क खड़ा कर लिया। आरोपी कार में बैठकर विभिन्न पॉलिसी धारकों को कॉल करते थे और खुद को बीमा कंपनियों का अधिकारी बताकर उनसे बातचीत करते थे। उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनकी पॉलिसी पर विशेष छूट, रिफंड या बोनस मिलने वाला है, जिसके लिए कुछ प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसी बहाने उनसे बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करा लिए जाते थे। जब पीडि़त रकम ट्रांसफर कर देते थे, तो गिरोह के सदस्य उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक, बीमा लोकपाल और आयकर विभाग के नाम पर फर्जी रसीदें और दस्तावेज भेज देते थे। इन दस्तावेजों को देखकर पीडि़तों को विश्वास हो जाता था कि उनकी पॉलिसी से संबंधित प्रक्रिया चल रही है। इसी दौरान आरोपी धीरे-धीरे उनसे और रकम भी ऐंठ लेते थे।

डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि इस गिरोह का नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था और यह कई राज्यों के लोगों को अपना शिकार बना चुका है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है। इसके लिए कई स्थानों पर दबिश दी जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बीमा पॉलिसी या बैंक से संबंधित जानकारी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति बीमा पॉलिसी में अतिरिक्त लाभ या रिफंड का झांसा देकर पैसे मांगता है, तो तुरंत संबंधित बीमा कंपनी या पुलिस को इसकी जानकारी दें। साइबर अपराधों से बचाव के लिए सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है।