-थर्माकोल की आड़ में बिहार भेजी जा रही थी 60 लाख की शराब, चेकिंग में खुला पूरा खेल
-सटीक सूचना, तेज कार्रवाई और 24 घंटे निगरानी से नाकाम हुई तस्करी की बड़ी साजिश
-आबकारी अधिकारी सुबोध श्रीवास्तव की सख्त कार्यशैली से माफिया में खौफ, नेटवर्क पर लगातार प्रहार
उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। जिले में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत आबकारी विभाग ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल करते हुए शराब माफिया के मंसूबों को करारा झटका दिया है। लोहारली टोल के पास देर रात की गई सघन चेकिंग के दौरान एक ट्रक से 570 पेटी अवैध शराब बरामद की गई, जिसकी कीमत करीब 60 लाख रुपये आंकी जा रही है। यह शराब हरियाणा और पंजाब से लाकर बिहार भेजी जानी थी, जहां शराबबंदी के चलते इसकी भारी मांग रहती है। हालांकि, आबकारी विभाग की सतर्कता और रणनीतिक कार्यशैली के चलते माफिया की यह साजिश जिले की सीमा में ही नाकाम हो गई। मंगलवार देर रात आबकारी निरीक्षक आशीष पांडेय और प्रवर्तन मेरठ की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सटीक सूचना पर लोहारली टोल के पास चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान एक अशोक लीलैंड ट्रक को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक ने वाहन को किनारे खड़ा कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए मौके से फरार हो गया। टीम ने जब ट्रक की गहन तलाशी ली तो उसमें थर्माकोल की बोरियां लदी हुई मिलीं। शुरुआती तौर पर यह सामान्य माल ढुलाई का मामला लग रहा था, लेकिन अधिकारियों की सूझबूझ और अनुभव ने पूरे मामले का रुख बदल दिया।
जैसे ही बोरियों को हटाकर जांच की गई, उनके पीछे बड़ी मात्रा में शराब की पेटियां छिपी हुई मिलीं। अलग-अलग ब्रांड की कुल 570 पेटी शराब बरामद की गई, जिसमें व्हिस्की और बीयर की बड़ी खेप शामिल थी। कागजातों की जांच में यह साफ हुआ कि थर्माकोल केवल एक आड़ था और असल मकसद इस अवैध शराब को बिहार पहुंचाना था। यदि यह खेप अपने गंतव्य तक पहुंच जाती तो माफिया को भारी मुनाफा होता, लेकिन आबकारी विभाग की सक्रियता ने इस पूरी योजना को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के पीछे जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव की सख्त कार्यशैली और दूरदर्शी रणनीति का अहम योगदान माना जा रहा है। उन्होंने जिले में अवैध शराब के खिलाफ एक सुनियोजित और सतत अभियान चला रखा है, जिसके तहत टीमों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा जाता है। उनकी कार्यप्रणाली का सबसे मजबूत पहलू यह है कि वह केवल सूचना पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि हर स्तर पर निगरानी और विश्लेषण को प्राथमिकता देते हैं।
सुबोध कुमार श्रीवास्तव की ‘चाणक्य नीति’ के चलते आबकारी विभाग ने जिले में ऐसा तंत्र विकसित किया है, जिसमें मुखबिर नेटवर्क, अचानक चेकिंग और विभिन्न टीमों के बीच समन्वय बेहद प्रभावी ढंग से काम करता है। यही कारण है कि माफिया चाहे कितनी भी चालाकी क्यों न दिखाएं, विभाग की पकड़ से बच पाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में जिले में अवैध शराब तस्करी के कई बड़े नेटवर्क ध्वस्त किए जा चुके हैं, जिससे माफिया के हौसले लगातार पस्त हो रहे हैं। आबकारी विभाग की टीमों की खासियत यह है कि वे दिन-रात बिना रुके अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। चाहे दिन हो या गहरी रात, हर समय चेकिंग अभियान जारी रहता है। इस निरंतर सतर्कता के कारण माफिया अब जिले की सीमा में प्रवेश करने से भी कतराने लगे हैं।
बावजूद इसके, कभी-कभार वे नए तरीकों से तस्करी की कोशिश करते हैं, लेकिन हर बार विभाग की मुस्तैदी उनके मंसूबों पर पानी फेर देती है। इस मामले में भी थाना दादरी में ट्रक मालिक और फरार चालक के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और बरामद शराब को जब्त कर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब के खिलाफ यह अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि जिले में किसी भी कीमत पर अवैध कारोबार को पनपने नहीं दिया जाएगा और कानून तोडऩे वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो और कार्यशैली पारदर्शी व रणनीतिक हो, तो बड़े से बड़ा अवैध नेटवर्क भी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकता। गौतमबुद्ध नगर में आबकारी विभाग की लगातार सख्ती और प्रभावी कार्यप्रणाली अब अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बनती जा रही है।

















