शहर में आपकी कोई प्रॉपर्टी है और आपने अभी तक नगर निगम में टैक्स जमा नहीं कराया है तो एक बार जरूर सोचें। क्योंकि भले ही गलती आपकी ना हो लेकिन नुकसान आपको भुगतना पड़ सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा नई दर से हाउस टैक्स वसूली के पक्ष में फैसला देने के बाद से नगर निगम द्वारा नई दर से टैक्स की वसूली की जा रही है। लाखों की संख्या में लोगों ने नई दर से टैक्स का भुगतान किया है। लेकिन अभी भी बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने टैक्स जमा नहीं कराया है। अभी तक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कोई अपील नहीं की गई है और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा टैक्स को लेकर कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया है। 31 मार्च 2026 तक टैक्स जमा करने पर 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। 1 अप्रैल से यह छूट समाप्त हो जाएगा और 12 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना पड़ेगा। यानि 32 प्रतिशत अधिक टैक्स देना पड़ेगा। ऐसे में टैक्स जमा करने या फिर जमा नहीं करने को लेकर कोई फैसला लेने से पहले एक बार जरूर सोंचे। भविष्य में टैक्स की दरें कम करने का कोई शासनादेश आता है तो अधिक भुगतान को आगामी बिल में एडजस्ट कर दिया जाएगा। लेकिन यदि कोई शासनादेश नहीं आया तो लोगों को छूट और ब्याज का नुकसान होगा। नगर निगम अधिनियम में टैक्स कम करने का अधिकार सिर्फ शासन के पास है। आरबीआई कहता है जानकार बनें, सर्तक रहें। यही नियम हाउस टैक्स के मामले में भी लागू करें। लोग खुद नियम को जानें और निर्णय करें कि टैक्स जमा करना उनके लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक।
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर में आपकी कोई प्रॉपर्टी है और आपने अभी तक नगर निगम में टैक्स जमा नहीं कराया है तो एक बार जरूर सोचें। क्योंकि भले ही गलती आपकी ना हो लेकिन नुकसान आपको भुगतना पड़ सकता है। दरअसल हाउस टैक्स को लेकर राजनीतिक रूप से कुछ और बयानबाजी हो रही है, जबकि कानूनी रूप से अमल में कुछ और हो रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा नई दर से हाउस टैक्स वसूली के पक्ष में फैसला देने के बाद से नगर निगम द्वारा नई दर से टैक्स की वसूली की जा रही है। लाखों की संख्या में लोगों ने नई दर से टैक्स का भुगतान किया है। लेकिन अभी भी बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने टैक्स जमा नहीं कराया है। जिन लोगों ने टैक्स जमा नहीं कराया है उनके समक्ष दुविधा यह है कि वह मेयर की बात मानें या फिर निगम अधिकारियों की सुनें। मेयर सुनीता दयाल का कहना है कि शासन से टैक्स कम कराया जाएगा। उधर, निगम अधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार टैक्स वसूली की कार्रवाई की जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ी हुई दर से हाउस टैक्स वसूल जाने के पक्ष में फैसला सुनाया था और अभी तक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कोई अपील नहीं की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा टैक्स को लेकर कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया है।

विदित हो कि नगर निगम में टैक्स जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 है। 31 मार्च तक टैक्स जमा करने पर 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। 1 अप्रैल से यह छूट समाप्त हो जाएगा। 1 अप्रैल के बाद टैक्स जमा करने पर छूट के नुकसान के साथ ही 12 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना पड़ेगा। यानि 1 अप्रैल 2026 के बाद वर्तमान टैक्स से 32 प्रतिशत अधिक टैक्स देना पड़ सकता है। टैक्स वसूली का मामला सरकारी राजस्व से जुड़ा हुआ है। ऐसे में नगर निगम अधिकारी फूंक-फूंक कर पांव रख रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद से नगर निगम अधिकारी नई दर से टैक्स वसूल रहे हैं। हाउस टैक्स की बढ़ी हुई दर को कम करना निगम अधिकारियों के लिए मुमकिन नहीं है। सिर्फ शासनादेश या कैबिनेट के फैसले के जरिये ही लोगों को कोई छूट मिल सकती है।
निगम अधिकारियों का कहना है कि टैक्स जमा कराने में ही लोगों की भलाई है। यदि भविष्य में टैक्स की दरें कम करने का कोई शासनादेश आता है तो अधिक भुगतान को आगामी बिल में एडजस्ट कर दिया जाएगा। लेकिन यदि कोई शासनादेश नहीं आया तो लोगों को छूट और ब्याज का नुकसान होगा। नगर निगम अधिनियम में टैक्स कम करने का अधिकार सिर्फ शासन के पास है। ऐसे में टैक्स जमा करने या फिर जमा नहीं करने को लेकर कोई फैसला लेने से पहले लोगों को एक बार सोचना जरूर चाहिये। बैंकिंग धोखाधड़ी से लोगों को बचानें और उन्हें जागरूक करने को लेकर रिजर्व बैंक और इंडिया ने एक स्लोगन दिया कि आरबीआई कहता है जानकार बनें, सर्तक रहें। यही स्लोगन गाजियाबाद नगर निगम के हाउस टैक्स के मामले में भी सटीक बैठता है। यानि लोग खुद नियम को जाने और निर्णय करें कि टैक्स जमा करना फायदेमंद है या नुकसानदायक।
















