जमीन पर सक्रिय पुलिसिंग ही कानून व्यवस्था की असली पहचान: जे. रविन्द्र गौड़

-ग्रामीण जोन की सुरक्षा मजबूत करने को बीट अधिकारियों के साथ हुई महत्वपूर्ण गोष्ठी
-नियमित गश्त, सूचना तंत्र मजबूत करने और जनता से संवाद बढ़ाने के निर्देश
-सामुदायिक पुलिसिंग पर जोर, शिकायतों के त्वरित निस्तारण को प्राथमिकता
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। ग्रामीण जोन में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा बीट प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से पुलिस आयुक्त जे. रविन्द्र गौड़ की अध्यक्षता में रविवार को पुलिस लाइन्स स्थित परमजीत हॉल में एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था, अपराध नियंत्रण की रणनीति और जनता के साथ पुलिस के समन्वय को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मुख्यालय एवं अपराध केशव कुमार चौधरी, पुलिस उपायुक्त ग्रामीण जोन सुरेन्द्रनाथ तिवारी, ग्रामीण जोन के सभी सर्किल सहायक पुलिस आयुक्त, बीट उपनिरीक्षक तथा बीट पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बीट स्तर पर पुलिसिंग व्यवस्था को सक्रिय, जवाबदेह और जनकेन्द्रित बनाना रहा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा का वातावरण और अधिक मजबूत किया जा सके।
गोष्ठी के दौरान बीट प्रणाली के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। साथ ही यक्ष एप के माध्यम से की जा रही निगरानी और बीटवार कार्यप्रणाली का आकलन किया गया। अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों की चुनौतियों, अपराध की प्रवृत्तियों और स्थानीय स्तर पर पुलिस की भूमिका को लेकर अपने अनुभव साझा किए। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि बीट प्रणाली पुलिस व्यवस्था की आधारशिला है और इसी के माध्यम से अपराधों की रोकथाम तथा जनता का विश्वास मजबूत किया जा सकता है। पुलिस आयुक्त जे. रविन्द्र गौड़ ने बीट अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित गश्त सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीट अधिकारी केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित न रहें, बल्कि क्षेत्र के नागरिकों से लगातार संवाद स्थापित करें। स्थानीय लोगों के साथ भरोसेमंद संबंध बनाना ही प्रभावी पुलिसिंग की सबसे बड़ी पहचान है।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों की गतिविधियों पर सतत नजर रखी जाए और सूचना तंत्र को मजबूत किया जाए, जिससे अपराध होने से पहले ही रोकथाम संभव हो सके। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि प्रत्येक बीट अधिकारी अपने क्षेत्र की सामाजिक संरचना, प्रमुख नागरिकों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और संवेदनशील स्थानों की अद्यतन जानकारी अपने पास रखे। पुलिस आयुक्त ने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों की सटीक जानकारी ही अपराध नियंत्रण की सबसे प्रभावी रणनीति होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे विवादों को समय रहते सुलझाने से बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है। गोष्ठी के दौरान जनता की शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया। पुलिस आयुक्त ने कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान पुलिस की सकारात्मक छवि बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि शिकायतों का निस्तारण संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ किया जाए तो पुलिस और जनता के बीच विश्वास स्वत: मजबूत होता है।

उन्होंने सामुदायिक पुलिसिंग की अवधारणा पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक पुलिसिंग केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना भी उतना ही आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस-जन सहयोग को बढ़ावा देकर सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। पुलिस आयुक्त ने सभी अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे ग्राम प्रधानों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों के साथ नियमित संवाद स्थापित करें। बैठक में यह भी तय किया गया कि बीट अधिकारियों की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा की जाएगी और बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

अधिकारियों को तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग, डिजिटल निगरानी और सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए। गोष्ठी के अंत में ग्रामीण क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण मजबूत करने का सामूहिक संकल्प लिया गया। पुलिस आयुक्त ने कहा कि प्रभावी बीट प्रणाली के माध्यम से अपराध नियंत्रण, त्वरित प्रतिक्रिया और जनविश्वास को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने सभी पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, जिससे ग्रामीण जोन में सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।