हाईराइज भवनों में अग्नि सुरक्षा पर कमिश्नरेट सख्त, एक सप्ताह का विशेष मॉकड्रिल अभियान शुरू

– सीएफओ राहुल पाल के नेतृत्व में सोसाइटी, रेलवे स्टेशन और उद्योगों में सुरक्षा व्यवस्था की गहन जांच
– मॉकड्रिल के जरिए हजारों लोगों को दिया गया अग्नि सुरक्षा प्रशिक्षण और जागरूकता संदेश
– कमियां मिलने पर नोटिस जारी, भवन स्वामियों को सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन के निर्देश

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनमानस की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कमिश्नरेट गाजियाबाद में शुक्रवार, 1 मई से एक सप्ताह के विशेष अग्नि सुरक्षा अभियान की शुरुआत की गई। अभियान के तहत शहर के हाईराइज भवनों, आवासीय सोसाइटी, व्यावसायिक परिसरों, रेलवे स्टेशनों तथा औद्योगिक इकाइयों में व्यापक स्तर पर मॉकड्रिल आयोजित की गई। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) राहुल पाल के निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के प्रति जागरूक करना और भवनों में मानकों के अनुरूप अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराना है। अभियान के दौरान अग्निशमन विभाग की टीमों ने दिव्यांश फेबियो सोसाइटी और सुपरटेक लिविंगस्टन सोसाइटी, क्रॉसिंग रिपब्लिक, पंचशील स्क्वायर कमर्शियल भवन, आरआरटीएस रेलवे स्टेशन मेरठ तिराहा एवं गुलधर, सुपरटेक आइकॉन, गौर ग्रीन विस्टा, अम्रपाली विलेज, पार्श्वनाथ रेगलिया, स्वर्ण रेजिडेंसी, निपुण सैफरॉन वैली, मोती सिटी मोदीनगर सहित अनेक आवासीय एवं औद्योगिक परिसरों में पहुंचकर मॉकड्रिल का संचालन किया। इसके अलावा होटल उत्सव एंड पार्टी हॉल, हरसो स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड, कुंग फोर्जिंग्स, मोदी इल्वा तथा लिब्रा इंडस्ट्रीज जैसे औद्योगिक प्रतिष्ठानों में भी सुरक्षा व्यवस्था की गहन जांच की गई।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि तेजी से विकसित होते महानगरीय क्षेत्र में हाईराइज भवनों और बड़े परिसरों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में अग्नि सुरक्षा केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जीवन रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि आग लगने की घटनाओं में शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और यदि भवन में स्थापित अग्निशमन प्रणाली कार्यशील अवस्था में हो तथा लोग प्रशिक्षित हों तो बड़े हादसों को आसानी से टाला जा सकता है। मॉकड्रिल के दौरान फायर टेंडरों को मौके पर तैनात कर भवनों के निकास मार्गों, आपातकालीन सीढिय़ों, फायर हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम, अलार्म व्यवस्था तथा पानी की उपलब्धता की वास्तविक परिस्थितियों में जांच की गई। अग्निशमन कर्मियों ने वहां मौजूद कर्मचारियों, सुरक्षा गार्डों और निवासियों को अग्निशमन उपकरणों के संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। उन्हें बताया गया कि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी जन-धन हानि का कारण बन सकती है, इसलिए हर व्यक्ति को प्राथमिक अग्नि सुरक्षा उपायों की जानकारी होना जरूरी है।

निरीक्षण के दौरान जिन भवनों में अग्निशमन सुरक्षा प्रणाली में कमियां पाई गईं, उन्हें तत्काल सुधार के निर्देश देते हुए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सीएफओ राहुल पाल ने स्पष्ट कहा कि अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। भवन स्वामियों और प्रबंधन को निर्देशित किया गया कि सभी अग्निशमन उपकरणों को ऑटो मोड पर सक्रिय रखें, नियमित मेंटेनेंस कराएं तथा निकास मार्गों को हमेशा अवरोध मुक्त रखें। उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत भवनों की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और संबंधित प्रबंधनों को विद्युत ऑडिट कराना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि अधिकांश अग्निकांड विद्युत शॉर्ट सर्किट के कारण ही होते हैं।

राहुल पाल की कार्यशैली की विशेषता यह रही कि अभियान केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे जनजागरूकता अभियान का रूप दिया गया। प्रत्येक स्थल पर लोगों से संवाद स्थापित कर उन्हें सुरक्षा की जिम्मेदारी में सहभागी बनाया गया। उन्होंने कहा कि अग्निशमन विभाग का लक्ष्य दंडात्मक कार्रवाई से अधिक दुर्घटनाओं की रोकथाम है और इसके लिए प्रशासन तथा नागरिकों के बीच समन्वय बेहद आवश्यक है। कमिश्नरेट गाजियाबाद में चलाया जा रहा यह विशेष अभियान शहर को सुरक्षित, सजग और आपदा प्रबंधन के प्रति तैयार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि नियमित मॉकड्रिल और जागरूकता कार्यक्रमों से भविष्य में संभावित अग्नि दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।