जब जुनून बना ताकत और रणनीति बनी हथियार-बड़ों की बिसात पर ‘चेकमेट’ का कमाल, 15 साल के अक्षित ने जीता दिल और पदक

  • अंडर-16 छोड़ अंडर-25 में खेली बाजी, दिखाया गजब का आत्मविश्वास
  • 231 खिलाडिय़ों के बीच चमका गाजियाबाद का सितारा, जीता कांस्य पदक

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शतरंज केवल मोहरों का खेल नहीं, बल्कि धैर्य, रणनीति, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती की ऐसी परीक्षा है, जहां एक छोटी सी चूक पूरे खेल का परिणाम बदल सकती है। यही कारण है कि इस खेल में अनुभव को सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। लेकिन जब कोई किशोर खिलाड़ी अपने से कहीं अधिक उम्र और अनुभव वाले प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती देकर सफलता हासिल करता है, तो उसकी उपलब्धि सामान्य जीत से कहीं बढ़कर प्रेरणा की कहानी बन जाती है। नई दिल्ली के सेक्टर-13 द्वारका स्थित स्मैश द्वारका, रेडिसन ब्लू में रविवार को आयोजित स्मैश चेस मास्टर-2026 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। दिल्ली-एनसीआर सहित देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे 231 खिलाडिय़ों के बीच हुए रोमांचक मुकाबलों में एक युवा खिलाड़ी ने अपनी बेहतरीन रणनीति, सटीक चालों और अद्भुत आत्मविश्वास से सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उम्र में बड़े और अनुभवी खिलाडिय़ों के बीच खेलते हुए उसने न केवल कड़ी टक्कर दी, बल्कि अपने प्रदर्शन से यह भी साबित कर दिया कि प्रतिभा और लगन के सामने उम्र का अंतर मायने नहीं रखता। प्रतियोगिता में हासिल की गई यह सफलता युवा खिलाडिय़ों के लिए प्रेरणा और संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की मिसाल बन गई है।

नई दिल्ली के सेक्टर-13 द्वारका स्थित स्मैश द्वारका, रेडिसन ब्लू में आयोजित स्मैश चेस मास्टर-2026 प्रतियोगिता में अक्षित ने अपनी उम्र से कहीं अधिक अनुभवी खिलाडिय़ों को कड़ी टक्कर देते हुए अंडर-25 वर्ग में तीसरा स्थान हासिल कर सभी को प्रभावित कर दिया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल गाजियाबाद बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। दिल्ली चेस क्लासिक्स इन एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दिल्ली-एनसीआर सहित देश के विभिन्न राज्यों से कुल 231 खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता को लड़के और लड़कियों के वर्ग में विभाजित किया गया था। लड़कों के वर्ग में अंडर-8, अंडर-12, अंडर-16 और अंडर-25 श्रेणियां रखी गई थीं। अंडर-8 में 78, अंडर-12 में 78, अंडर-16 में 43 और अंडर-25 में 21 खिलाडिय़ों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। अंडर-25 वर्ग में तीसरा स्थान हासिल करने पर अक्षित शर्मा को ट्रॉफी, मेडल, एक पोर्ट्रोनिक्स स्पीकर, 1000 रुपये का गेम क्रेडिट और 500 रुपये का गेम वाउचर देकर सम्मानित किया गया।

उम्र से बड़े खिलाडिय़ों के बीच दिखाया असाधारण आत्मविश्वास
गाजियाबाद के डीपीएस मेरठ रोड स्कूल में कक्षा-9 के छात्र अक्षित शर्मा के पास अपनी आयु वर्ग अंडर-16 में खेलने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने खुद को चुनौती देने के लिए अंडर-25 वर्ग में खेलने का फैसला किया। यह निर्णय जितना साहसिक था, उतना ही जोखिम भरा भी। उनके सामने ऐसे खिलाड़ी थे जो उम्र, अनुभव और प्रतियोगी मुकाबलों के लिहाज से उनसे कहीं आगे थे। प्रतियोगिता के दौरान जब अक्षित ने एक-एक कर अपने मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करना शुरू किया तो दर्शकों और अन्य खिलाडिय़ों का ध्यान उनकी ओर आकर्षित होने लगा। उनकी चालों में परिपक्वता, रणनीति में गहराई और दबाव में शांत रहने की क्षमता ने सभी को प्रभावित किया। अंतत: उन्होंने अंडर-25 वर्ग में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।

संघर्ष और मेहनत ने दिलाई नई पहचान
अक्षित की यह सफलता केवल एक पदक जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि यह निरंतर अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम है। कम उम्र में बड़े खिलाडिय़ों के साथ प्रतिस्पर्धा करना और उनमें स्थान बनाना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। लेकिन अक्षित ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। अपनी उपलब्धि पर अक्षित शर्मा ने कहा, मैं हमेशा खुद को बेहतर खिलाडिय़ों के खिलाफ परखना चाहता हूं। अंडर-25 वर्ग में खेलना मेरे लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन मैंने हर मुकाबले को सीखने के अवसर के रूप में लिया। तीसरा स्थान मिलने से खुशी है, लेकिन मेरा लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है। मैं आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करना चाहता हूं।

परिवार और कोच ने जताया गर्व
अक्षित की सफलता से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी माता प्रीति शर्मा ने कहा अक्षित बचपन से ही बेहद अनुशासित और मेहनती रहा है। वह घंटों तक शतरंज का अभ्यास करता है और हर हार से सीखने की कोशिश करता है। आज उसकी मेहनत रंग लाई है। हमें उस पर गर्व है और विश्वास है कि वह आगे भी इसी तरह सफलता हासिल करेगा।
उनके पिता मनोज शर्मा ने कहा अक्षित ने हमेशा चुनौतियों को अवसर के रूप में लिया है। अंडर-25 वर्ग में खेलने का उसका निर्णय साहस और आत्मविश्वास को दर्शाता है। यह उपलब्धि उसके उज्ज्वल भविष्य की एक मजबूत शुरुआत है। अक्षित के कोच अभिमन्यु पोद्दार ने कहा अक्षित में असाधारण क्षमता है। उसकी सबसे बड़ी ताकत खेल को गहराई से समझना और दबाव में सही निर्णय लेना है।

उसने इस प्रतियोगिता में जिस तरह का प्रदर्शन किया, वह उसकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। यदि वह इसी तरह अभ्यास करता रहा तो आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। डीपीएस मेरठ रोड स्कूल के प्रबंधन और शिक्षकों ने भी अक्षित को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। अक्षित की यह उपलब्धि न केवल स्कूल बल्कि गाजियाबाद के युवा खिलाडिय़ों के लिए भी प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती और हौसले बुलंद हों तो बड़ों की बिसात पर भी जीत हासिल की जा सकती है।