महुआ के साम्राज्य का ‘द एंड’… जब लखनऊ में उतरा कानून का ‘सिंघम’!

-शराब माफियाओं की सल्तनत ध्वस्त, राजस्व ने भरी रिकॉर्ड उड़ान; जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की सख्ती से बदली राजधानी की तस्वीर
– ‘महुआ की रानी’ से ‘नवाबों के शहर’ तक… अपराध के साम्राज्य पर चला कानून का बुलडोजर

उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। कहते हैं कि जब व्यवस्था सो जाती है तो अपराध साम्राज्य बन जाता है, लेकिन जब कानून जागता है तो साम्राज्य नहीं, सिर्फ मलबा बचता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। वर्षों तक देहात के खेतों, आम के बागों, नदी किनारों और गांवों में महुआ की कच्ची शराब का जाल बिछाने वाले माफिया आज या तो जेल की सलाखों के पीछे हैं या फिर जिले की सीमाएं छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। एक समय था जब लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में  ‘महुआ की रानी’ के नाम से बदनाम कच्ची शराब का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा था। एक समय ऐसा था जब लखनऊ का ग्रामीण इलाका अवैध महुआ शराब के कारोबार के कारण बदनाम था। कच्ची शराब का जहर लोगों की जिंदगी में घुल रहा था और सरकार के खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंच रहा था। लेकिन फरवरी 2025 में जिला आबकारी अधिकारी के रूप में करुणेन्द्र सिंह ने कार्यभार संभाला तो उन्होंने सबसे पहले इस पूरे सिंडिकेट की नस-नस पहचाननी शुरू की। उन्होंने बिना शोर मचाए अपना खुफिया नेटवर्क तैयार किया, शराब माफियाओं की कुंडली खंगाली और फिर ऐसी रणनीति बनाई कि वर्षों से जमे अवैध कारोबार की नींव ही हिल गई।

विभाग की लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई ने उस साम्राज्य को जड़ से उखाड़ फेंका, जिसे खत्म करना कभी असंभव माना जाता था। महुआ की भट्टियां टूटने लगीं, शराब के ठिकाने उजड़ने लगे और माफियाओं का आतंक कानून की ताकत के सामने बिखरने लगा। कई माफिया जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे तो कई जिले से पलायन करने को मजबूर हो गए। आबकारी विभाग की लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई ने उस अवैध कारोबार पर ऐसा ताला लगाया, जिसकी चाबी वर्षों से किसी के पास नहीं थी। इसके अलावा बाहरी राज्यों से होने वाली शराब तस्करी को रोकने के लिए भी जिले में अपना मजबूत नेटकर्व का जाल बिछाते हुए किलेबंदी की। जिसका परिणाम यह निकला की आज कोई भी माफिया जिले की सीमा में कदम रखने से भी डरता नजर आता है। करुणेन्द्र सिंह का मानना है कि  ‘राजस्व बढ़ाना तभी संभव है, जब अवैध कारोबार पूरी तरह खत्म हो और लाइसेंसी व्यवस्था पारदर्शी हो। हमारी प्राथमिकता जनता की सुरक्षा, कानून का पालन और सरकार के राजस्व की रक्षा है। किसी भी स्तर पर नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा।

राजस्व का ‘रॉकेट’, माफियाओं की ‘रनआउट’… पारदर्शिता बनी नई पहचान
अवैध शराब के खिलाफ अभियान केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे आबकारी तंत्र को पारदर्शी बनाने का बड़ा अभियान भी साथ-साथ चला। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने लाइसेंसी दुकानों की व्यवस्था को पूरी तरह बदलने का फैसला लिया। शराब की दुकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की नियमित जांच शुरू हुई। ग्राहकों से सीधे संवाद किए गए। टेस्ट परचेजिंग कराई गई। स्टॉक और बिक्री का मिलान कराया गया। नियमों का उल्लंघन करने वाले अनुज्ञापियों पर बिना किसी दबाव के कार्रवाई हुई। संदेश साफ था-कानून सबके लिए बराबर है। इसी पारदर्शी व्यवस्था का परिणाम रहा कि जहां एक ओर अवैध कारोबार लगभग समाप्त होने लगा, वहीं दूसरी ओर सरकार के राजस्व में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्ष 2024-25 में जहां जिले को 2178.78 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 2580.85 करोड़ रुपये पहुंच गया।

यानी एक वर्ष में 402.07 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई। यही नहीं, वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 3700 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अप्रैल और मई माह में ही करीब 550 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त कर विभाग ने अपनी मजबूत शुरुआत का संकेत दे दिया है। करुणेन्द्र सिंह कहते हैं हमारी प्राथमिकता सिर्फ राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और कानून का सम्मान सुनिश्चित करना है। अवैध शराब के लिए लखनऊ में अब कोई जगह नहीं है। जो नियमों का पालन करेगा, विभाग उसके साथ खड़ा रहेगा, लेकिन कानून तोडऩे वालों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

तीन दशक का अनुभव, ईमानदारी की पहचान… जहां गए, वहां माफियाओं की उलटी गिनती शुरू हुई
करीब 16 वर्ष आबकारी निरीक्षक और 14 वर्ष जिला आबकारी अधिकारी के रूप में सेवा दे चुके करुणेन्द्र सिंह प्रशासनिक जगत में अपनी साफ-सुथरी छवि और बेदाग कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 1997 में गाजियाबाद में आबकारी निरीक्षक के रूप में उनकी पहली नियुक्ति हुई। वहां फार्मेसी और मोदीनगर सर्किल की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ जैसे संवेदनशील जिलों में उन्होंने अवैध शराब के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर विभाग को नई दिशा दी। वर्ष 2012 में सहायक आबकारी आयुक्त के रूप में हापुड़ डिस्टलरी में नियुक्ति मिली। इसके बाद मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, वाराणसी, उन्नाव और सहारनपुर में जिला आबकारी अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने हर जिले में माफियाओं के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाया। लखनऊ में भी उनकी कार्यशैली उसी अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण बन रही है। ऑकेजनल बार लाइसेंस से लेकर स्थायी लाइसेंस तक की प्रक्रिया को उन्होंने स्वयं मॉनिटर किया, जिससे राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय सुधार हुआ। उनका स्पष्ट संदेश है नियमों का पालन करवाना ही प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार का दबाव या प्रभाव कानून से बड़ा नहीं हो सकता।

करुणेन्द्र की ‘कमांडो टीम’… हर निरीक्षक बना कानून का योद्धा, माफियाओं में नाम से फैलता है खौफ
किसी भी बड़े अभियान की सफलता अकेले संभव नहीं होती। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह के साथ एक ऐसी टीम खड़ी है, जिसने हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है। विवेक सिंह, रिचा सिंह, राहुल सिंह, रेखा श्रीवास्तव, अभिषेक सिंह, अरविंद बघेल, कौशलेन्द्र रावत, प्रदीप शुक्ला, अखिलेश चौधरी, नेहा सिंह, मोनिका यादव, रामश्याम त्रिपाठी, शिखर मल्ल, विजय राठी और संजय पाण्डेय ने अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार दबिश, निगरानी, खुफिया सूचना संकलन और अवैध शराब के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर विभाग को नई पहचान दिलाई है। इन निरीक्षकों ने केवल छापेमारी ही नहीं की, बल्कि सूचना तंत्र को इतना मजबूत बनाया कि शराब माफियाओं की हर गतिविधि पर विभाग की नजर रहने लगी। गांवों से लेकर कस्बों तक अवैध शराब की भट्टियां ध्वस्त हुईं, हजारों लीटर लहन और कच्ची शराब नष्ट की गई और सैकड़ों तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया।

विभाग की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि यदि नेतृत्व मजबूत हो और टीम ईमानदारी से काम करे तो सबसे मजबूत अपराधी नेटवर्क भी ज्यादा दिन टिक नहीं सकता। आज लखनऊ की पहचान फिर से उसकी नवाबी तहजीब, कानून व्यवस्था और पारदर्शी प्रशासन से जुड़ती दिखाई दे रही है। महुआ की अवैध शराब के काले कारोबार पर कानून का ऐसा शिकंजा कस चुका है कि माफियाओं के बीच अब सिर्फ एक ही नाम चर्चा में है-जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह, जिनकी कार्यशैली ने यह साबित कर दिया है कि जब इरादे फौलादी हों, तो अपराध का सबसे बड़ा साम्राज्य भी राख बनने में देर नहीं लगती। इन सभी अधिकारियों की कार्यशैली में एक समानता दिखाई देती है-सूचना की गोपनीयता, त्वरित कार्रवाई और कानून के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता।

बाहरी राज्यों से शराब तस्करी रोकने को सख्त निगरानी
राजधानी लखनऊ को अवैध शराब और अंतरराज्यीय तस्करी से सुरक्षित रखने के लिए जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में आबकारी विभाग 24 घंटे अलर्ट मोड पर काम कर रहा है। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, राजस्थान, दिल्ली और पड़ोसी राज्यों से होने वाली अवैध शराब की तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए जिले की सीमाओं, प्रमुख हाईवे, टोल प्लाजा और संवेदनशील मार्गों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभाग की प्रवर्तन टीमें दिन-रात सक्रिय रहकर संदिग्ध वाहनों की सघन जांच कर रही हैं। आबकारी विभाग ने खुफिया सूचना तंत्र को पहले से अधिक मजबूत बनाया है। सूचना मिलते ही टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करती है। सीमा क्षेत्रों में पुलिस और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे तस्करों को किसी भी स्तर पर मौका न मिल सके। विभाग की टीमें रात्रि गश्त, आकस्मिक चेकिंग और मोबाइल निरीक्षण के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

करुणेन्द्र सिंह
जिला आबकारी अधिकारी
लखनऊ।

लखनऊ की पहचान उसकी नवाबी तहजीब, कानून व्यवस्था और पारदर्शी प्रशासन से है। हमारी प्राथमिकता जनपद को अवैध शराब के कारोबार से पूरी तरह मुक्त करना, आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सरकार के राजस्व की रक्षा करना है। अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री में शामिल किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हमारी प्रवर्तन टीमें 24 घंटे सतर्क रहकर लगातार अभियान चला रही हैं। सभी आबकारी निरीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित चेकिंग, खुफिया निगरानी, टेस्ट परचेजिंग और लाइसेंसी दुकानों का सतत निरीक्षण करें। नियमों का पालन करने वालों को विभाग का पूरा सहयोग मिलेगा, लेकिन कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बाहरी राज्यों से होने वाली शराब तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों, प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। हमारा लक्ष्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें अवैध कारोबार के लिए कोई स्थान न बचे। जनसहयोग और विभागीय सतर्कता के बल पर हम लखनऊ को अवैध शराब मुक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।
करुणेन्द्र सिंह
जिला आबकारी अधिकारी
लखनऊ।