– गाजियाबाद में इतना बरसा पानी की सड़क बन गये स्वीमिंग पूल
– शुक्रवार को दिल्ली जैसा हुआ गाजियाबाद का बुरा हाल
– विजय नगर को गाजियाबाद से जोड़ने वाली अति व्यस्त सड़क पर भरा 15 फीट पानी
– पार्षद का आरोप नगर निगम के जलकल विभाग की लापरवाही से भरता है पानी
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। जिस सड़क से चंद घंटे पहले सैकड़ों गाड़ियां गुजरी थी उसी सड़क पर पानी से डूबने से एक युवक की मौैत हो गई। सुनने में भले ही यह अजीब सा लगे लेकिन हॉट सिटी गाजियाबाद में शुक्रवार को ऐसा ही हुआ। दो सप्ताह पहले जैसे दिल्ली में बीच सड़क पर एक टैंपों चालक पानी में डूबा था उसी तरह गाजियाबाद के गौशाला अंडरपास में भी एक युवक बीच सड़क पर पानी में डूब गया। दरअसल आसमान से बरसी रिकार्ड तोड़ बारिश आफत बन गई और चहुंओर मुसीबत खड़ी कर दी। शुक्रवार की बारिश इस सीजन की सबसे तगड़ी बारिश रही। शहर की कई कॉलोनियां टापू बन गई। कुछ कॉलोनियों में अभी भी पानी भरा हुआ है। शहर में ऐसा कोई गली-मोहल्ला नहीं रहा, जहां जलभराव नहीं हुआ। पॉश कॉलोनी कविनगर राजनगर जहां कभी पानी नहीं भरता था वहां भी जलभराव देखने को मिला। राजनगर स्थित म्युनिसिपल कमिश्नर के आवास में भी पानी भर गया।
शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे से शुरू हुई एक घंटे की बारिश ने शहर को टापू बना दिया। बारिश के चलते गौशाला अंडरपास में लगभग 15 फीट पानी भर गया। गौशाला अंडरपास रोड लगभग 4 लाख की आबादी वाले विजय नगर क्षेत्र को मेन शहर से जोड़ने का मुख्य मार्ग है। गौशाला अंडरपास में पानी भरने पर कई युवक उसमें छलांग लगाकर नहाने लगे। इसी दौरान एक युवक की डूबने से मौत हो गई जबकि पानी में डूब रहे एक अन्य युवक को लोगों ने बचा लिया। सूचना के बाद पहुंची पुलिस, प्रशासन व नगर निगम की टीम ने युवक के शव को बाहर निकलवाकर मोर्चरी भिजवाया। मृत और बचाए गए युवक के परिजनों का पता नहीं चल पाया है। वहीं, सूचना के बाद विजयनगर थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह बिष्ट, कोतवाली प्रभारी विष्णु कौशिक, नगर निगम के अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार, चीफ इंजीनियर मोइनुद्दीन आदि मौके पर पहुंचे। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचे। मृतक की पहचान अर्जुन उर्फ हड्डी के रूप में हुई। जो गोलू उर्फ गुल्लू समेत अन्य साथियों संग दोपहर 12 बजे बारिश के दौरान गौशाला अंडरपास में नहा रहा था। शुरूआत में कम गहराई में नहाते रहे और आधे घंटे बाद अर्जुन व गुल्लू ने ऊपर से छलांग लगानी शुरू कर दी। गहराई में छलांग लगाने के चलते दोनों डूबने लगे। दोनों तैरना नहीं जानते थे। अंडरपास में मौजूद अन्य बच्चों ने दोनों को डूबता देख शोर मचाया तो सलमान, भोला व वहां से गुजर रहे मीट कारोबारी इनाम खान ने दूधेश्वरनाथ मंदिर की साइड कूदे गुल्लू को बमुश्किल बाहर निकाल लिया। वहीं विजयनगर की ओर कूदे अर्जुन को बचाने के लिए कूदे हाशिम और गुलफाम ने काफी प्रयास किया, लेकिन उसे बचा नहीं पाए। रस्सी डालकर उसका शव को बाहर निकाला गया। विजयनगर थाना प्रभारी
देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि युवक कबाड़ बीनकर भोला की दुकान पर बेच देता था। इसी से गुजारा करता और स्टेशन या अन्य किसी स्थान पर सोता था। इसके परिजनों का पता नहीं चल पाया है। दोस्त व आसपास के लोगों की मदद से पंचनामा भर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। वहीं युवक के परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस और गोताखोर मौके पर पहुंचे और युवक की तलाश की। थोड़ी ही देर में गोताखोरों ने युवक का शव बरामद कर लिया। करीब 19 साल पूर्व लाइनपार विजयनगर और पुराने शहर के बीच आवाजाही के लिए अंडरपास बनाया गया था। जिसका निर्माण जीडीए और रेलवे ने मिलकर किया था। अब इसकी देखरेख का जिम्मा नगर निगम के पास है।
स्थानीय पार्षद जाकिर सैफी ने घटना के लिए नगर निगम के जलकल विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। जाकिर का कहना है कि पहली चूक इसके निर्माण कार्य के वक्त हुई। इसकी चौड़ाई मूल डिजाइन से दो मीटर कम दिया गया था। जिसकी वजह से उस समय इसमें ड्रेनेज सिस्टम सही तरह से विकसित नहीं पाया। उसका खामियाजा यह है कि अंडरपास नाले की तरह संकरा हो गया। दूसरी चूक नगर निगम ने वहां से पानी निकासी के लिए लगाये गये मोटर को हटाकर की है। बरसात के मौसम से पहले अंडरपास की ड्रेनेज लाइन की सफाई न होने और बारिश होने पर ट्रंक सीवर लाइन पर दबाव बढ़ने से पानी निकासी तेजी से संभव नहीं हो पाती। मोटर होने पर आधा घंटे में पानी खाली हो जाता था। उधर, निगम अधिकारियों का कहना है कि अंडरपास लो-लाइंग एरिया है और उसके चारों तरफ पानी भरा था। ऐसे में वहां से तत्काल पानी निकालना संभव ही नहीं था।
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ऑटोमैटिक ड्रेनेज सिस्टम लगाने का मेयर ने दिया निर्देश
गोशाला अंडरपास के अंदर भरे पानी में डूबने से युवक की मौत के बाद मेयर आशा शर्मा ने म्युनिसिपल कमिश्रर को पत्र लिखकर उन्हें निर्देश जारी किया है कि इस अंडरपास में तत्काल आॅटोमेटिक ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था की जाए। जिससे भविष्य में दोबारा इस तरह का हादसा न हो। अन्य संस्थाएं जैसे जीडीए, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआइ से भी इसका पालन कराया जाए। जिन स्थानों पर जलभराव होता है, उनकी सूची पुलिस महकमे को दे दी जाए।
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