– शांति, सौहार्द और विश्वास ही पुलिस की असली पहचान: जे. रविंदर गौड़
-कानून व्यवस्था से लेकर वीआईपी सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और साइबर अपराध तक दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
-आधुनिक तकनीक, अनुशासन और मानवीय व्यवहार के समन्वय से तैयार होगी नई पुलिसिंग व्यवस्था
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कमिश्नरेट गाजियाबाद में नियुक्त नव-भर्ती रिक्रूट आरक्षियों को आधुनिक पुलिसिंग प्रणाली से परिचित कराने के उद्देश्य से बुधवार को नंदग्राम स्थित क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के सभागार में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जनपद के विभिन्न थानों पर तैनात कुल 1393 रिक्रूट आरक्षियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवनियुक्त पुलिसकर्मियों को आधुनिक, वैज्ञानिक और व्यवहारिक पुलिस कार्यप्रणाली से प्रशिक्षित करते हुए उन्हें संवेदनशील, जिम्मेदार और नागरिक-केंद्रित पुलिसकर्मी के रूप में तैयार करना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ ने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस का मूल उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण नहीं बल्कि समाज में शांति, सौहार्द और विश्वास कायम करना है। उन्होंने कहा कि अपराध और भयमुक्त वातावरण तैयार करना पुलिस की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इसे निभाने के लिए प्रत्येक पुलिसकर्मी में अनुशासन, सहनशीलता, संवेदनशीलता, क्षमा और संतोष जैसे मानवीय गुणों का होना आवश्यक है। उन्होंने आरक्षियों से कहा कि जनता का विश्वास जीतना ही एक सच्चे पुलिसकर्मी की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। यदि पुलिस जनता के प्रति सहानुभूतिपूर्ण और सहयोगी रवैया अपनाती है तो कानून व्यवस्था अपने आप मजबूत होती है।
उन्होंने नव आरक्षियों को सेवा भाव, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन का मूल मंत्र बनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का शुभारंभ एडिशनल पुलिस कमिश्नर कानून-व्यवस्था एवं यातायात राज करन नैय्यर ने किया। प्रशिक्षण के दौरान एडिशनल पुलिस कमिश्नर मुख्यालय एवं अपराध केशव कुमार चौधरी, डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्रनाथ तिवारी और डीसीपी सिटी धवल जायसवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। आरक्षियों को बीट प्रणाली की कार्यप्रणाली, बीट पुलिस अधिकारी के दायित्व, स्थानीय स्तर पर अपराध नियंत्रण की रणनीति और यक्ष ऐप के प्रभावी उपयोग के बारे में बताया गया। साथ ही सीनियर सिटीजन सुरक्षा योजना, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायकों का सत्यापन और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी जैसे विषयों पर भी विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। एडीसीपी क्राइम पीयूष कुमार सिंह ने त्योहारों, धार्मिक आयोजनों, मेलों, जुलूसों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान भीड़ नियंत्रण एवं प्रबंधन की रणनीतियों पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों में छोटी सी चूक भी बड़ी अव्यवस्था का कारण बन सकती है, इसलिए पुलिसकर्मियों को धैर्य, सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करना चाहिए। एडिशनल पुलिस कमिश्नर राज करन नैय्यर ने वीवीआईपी और वीआईपी ड्यूटी की संवेदनशीलता पर प्रकाश डालते हुए सुरक्षा प्रोटोकॉल, जिम्मेदारियों और व्यवहार संबंधी दिशा-निर्देश साझा किए। उन्होंने बताया कि वीआईपी सुरक्षा ड्यूटी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जिसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होती। प्रशिक्षु आरक्षियों को वीआईपी मूवमेंट के दौरान स्थिर और मोबाइल प्वाइंट ड्यूटी, संदिग्ध वाहनों की जांच, आपातकालीन प्रतिक्रिया और संचार समन्वय की व्यावहारिक जानकारी दी गई। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने विभिन्न आंदोलनों जैसे किसान आंदोलन, छात्र आंदोलन और श्रमिक आंदोलनों के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने की रणनीति समझाई।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या हिंसा की स्थिति में पुलिस को त्वरित और संतुलित कार्रवाई करनी होती है। आरक्षियों को संयमित व्यवहार और कानूनी प्रक्रिया के पालन की विशेष सीख दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में तकनीकी और आधुनिक अपराधों पर भी विशेष जोर दिया गया। एडिशनल पुलिस कमिश्नर मुख्यालय केशव कुमार चौधरी ने बताया कि वर्तमान समय में अपराधों की प्रकृति तेजी से बदल रही है। साइबर अपराध, डिजिटल फ्रॉड और तकनीकी जांच पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए पुलिसकर्मियों के लिए तकनीकी दक्षता और डिजिटल समझ बेहद जरूरी है। क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. भूपेन्द्र हाडा ने आरक्षियों को वित्तीय साक्षरता, व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन और वित्तीय अपराधों से बचाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक अपराधों को रोकने के लिए पुलिसकर्मियों का वित्तीय जागरूक होना भी आवश्यक है। प्रशिक्षण के दौरान एडीसीपी प्रोटोकॉल राजेश पांडेय सहित अन्य अधिकारियों ने भी आरक्षियों को ड्यूटी के दौरान अपनाए जाने वाले व्यवहारिक टिप्स दिए।
आरक्षियों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया कि वे ड्यूटी के दौरान विनम्र व्यवहार रखें, नागरिकों के साथ सहयोगपूर्ण संवाद स्थापित करें और हर परिस्थिति में कानून के प्रति जवाबदेही बनाए रखें। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग केवल बल प्रयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद, तकनीक, संवेदनशीलता और सामाजिक सहभागिता पर आधारित है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से रिक्रूट आरक्षियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है ताकि वे बदलते अपराध स्वरूप और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच प्रभावी पुलिस सेवा प्रदान कर सकें। एक दिवसीय यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रिक्रूट आरक्षियों के लिए न केवल तकनीकी ज्ञान का मंच बना बल्कि पुलिस सेवा के मूल मूल्यों को समझने का अवसर भी साबित हुआ। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पुलिस बल अधिक सक्षम, जिम्मेदार और जनविश्वास आधारित बनेगा, जिससे समाज में शांति और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।


















