-आरसीबी की जीत के जश्न में उजड़ गए कई घर, लापरवाही से गई जानें, अब जवाबदेही तय हो
उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। बेंगलुरु में आरसीबी की जीत के बाद हुए हादसे को लेकर जनसेवक तरुण मिश्र ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस हृदय विदारक घटना को प्रशासन और क्रिकेट प्रबंधन की घोर लापरवाही बताते हुए इसे एक अपराध की संज्ञा दी है। मिश्र ने कहा कि यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र और क्रिकेट एसोसिएशन की लापरवाही का नतीजा है, जिसकी कीमत कई परिवारों ने अपने अपनों की जान गंवाकर चुकाई है। तरुण मिश्र ने कहा कि यह हादसा टाला जा सकता था। लेकिन जब जनता की सुरक्षा को ताक पर रखकर आयोजनों में राजनीतिक और कॉर्पोरेट रसूख हावी हो जाए, तो ऐसे ही परिणाम सामने आते हैं। 35 हजार की क्षमता वाले चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर करीब 3 से 4 लाख लोगों की भीड़ एकत्र हो गई, और न सरकार ने, न ही क्रिकेट बोर्ड ने भीड़ प्रबंधन को गंभीरता से लिया। इस लापरवाही ने जीत के उत्सव को मातम में बदल दिया। जनसेवक मिश्र ने कहा, ये मौतें संयोग नहीं, व्यवस्था की नाकामी से हुईं हैं। यह घोर प्रशासनिक विफलता है। इसमें शामिल हर संस्था को कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। यह हादसा नहीं, बल्कि अपराध है। इस पर मुकदमा दर्ज हो और न्यायिक जांच होनी चाहिए।
उन्होंने बीसीसीआई और आरसीबी फ्रेंचाइजी से मांग की है कि हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को कम से कम 10 करोड़ रुपये (5 करोड़ बीसीसीआई और 5 करोड़ फ्रेंचाइजी द्वारा) और घायलों को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए। उन्होंने कहा कि इतने बड़े टूर्नामेंट, जिसमें अरबों रुपये का निवेश होता है, उसमें आम जनता की जान की कोई कीमत नहीं समझी गई। तरुण मिश्र ने आरसीबी टीम और विराट कोहली को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जिन्हें देखकर भीड़ जुटी, जिनके नाम पर यह जश्न आयोजित हुआ, वे अब मौन क्यों हैं? विराट कोहली और आरसीबी को देश से माफी मांगनी चाहिए और अपनी इनाम की राशि पीडि़त परिवारों को देनी चाहिए।
मिश्र ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार और क्रिकेट प्रशासन ने सुरक्षा से अधिक प्रचार को महत्व दिया। आरसीबी के ’18 साल के इंतजार’ के नाम पर जोश में होश खो दिया गया। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, अगर यही इंतजाम किसी राजनीतिक रैली के लिए होते, तो पुलिस और प्रशासन हज़ारों बैरिकेड्स लगाता, सैकड़ों कर्मी तैनात करता, लेकिन जनता की सुरक्षा के लिए यहां कोई गंभीर योजना नहीं थी। जनसेवक मिश्र ने अंत में चेतावनी दी कि यदि इस मामले में न्यायिक जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो यह परंपरा बन जाएगी जहां जश्न मनाने की कीमत आम लोगों की जान से चुकाई जाती है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि पीडि़त परिवारों को तुरंत राहत दी जाए और भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए पुख्ता सुरक्षा मानक बनाए जाएं।
















