- कारागार सुधार के साथ-साथ बंदियों का सर्वांगीण विकास भी हमारी प्राथमिकता: विनोद सिंह रावत
- हर्बल वाटिका से लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक, निरीक्षण में दिखी मानवीय सोच
- निरीक्षण के दौरान बंदियों के स्वास्थ्य, भोजन और शिक्षा व्यवस्थाओं की हुई समीक्षा
- जिला जेल गाजियाबाद को मिला 5 स्टार सम्मान, अधिकारियों ने किया संयुक्त निरीक्षण
- ‘ईट राइट कैंपस’ प्रमाण पत्र के साथ कारागार की व्यवस्थाओं को मिली नई पहचान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। डासना जिला कारागार में न्यायिक एवं प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण संयुक्त निरीक्षण किया गया। बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद सिंह रावत, जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉदड़, एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद केशव कुमार चौधरी तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऐश्वर्य प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से कारागार परिसर का गहन निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण की शुरुआत कारागार चिकित्सालय परिसर से हुई, जहां अधिकारियों द्वारा औषधीय पौधों का रोपण कर ‘हर्बल वाटिका’ का उद्घाटन किया गया। इस पहल को बंदियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया गया। इसके पश्चात निरीक्षण दल कारागार चिकित्सालय पहुंचा, जहां भर्ती बंदियों की स्वास्थ्य स्थिति, उनकी बीमारियों तथा चल रहे उपचार और न्यायिक मामलों की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। इसके बाद निरीक्षण के दौरान कारागार परिसर में स्थित डॉ. सम्पूर्णानन्द पुस्तकालय का अवलोकन किया गया। पुस्तकालय की साज-सज्जा, स्वच्छता तथा पुस्तकों के सुव्यवस्थित रख-रखाव की अधिकारियों द्वारा विशेष प्रशंसा की गई।
अधिकारियों ने कहा कि अध्ययन और ज्ञानवर्धन बंदियों के मानसिक विकास और पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निरीक्षण दल ने कारागार की पाकशाला का भी निरीक्षण किया, जहां बन रहे भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सामग्री के रख-रखाव को देखा गया। भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर अधिकारियों ने संतोष जताते हुए इसे अन्य संस्थानों के लिए अनुकरणीय बताया। निरीक्षण के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद सिंह रावत ने कहा कारागार केवल बंदियों को रखने का स्थान नहीं है, बल्कि यह उनकी पुनर्संरचना और सुधार का केंद्र भी होना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी बंदियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार संबंधित अवसर उपलब्ध हों ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान कर सकें। महिला अहाते में निरूद्ध महिला बंदियों और उनके साथ रहने वाले बच्चों से खान-पान, चिकित्सा, मनोरंजन और विधिक सहायता संबंधी समस्याओं के बारे में पूछताछ की गई।
न्यायाधीश श्री रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ। निरीक्षण के दौरान न्यायाधीश रावत ने कहा कि कारागार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बंदियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है। स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन और प्रशिक्षण सभी क्षेत्रों में सुधार लाना प्राथमिकता है। कारागार में बंदियों के लिए संचालित विभिन्न कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी अवलोकन किया गया। इस दौरान बंदियों द्वारा तैयार की जा रही कलात्मक कृतियों जैसे कढ़ाई, पेंटिंग, पोर्ट्रेट और अन्य हस्तशिल्प कार्यों को देखकर अधिकारियों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की। इन कार्यक्रमों को बंदियों के आत्मनिर्भरता और पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। वहीं, कारागार में संचालित संगीत कक्षा में बंदियों की भजन मंडली द्वारा दी गई प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कारागार के विभिन्न बैरकों में जाकर बंदियों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं, सुविधाओं तथा आवश्यकताओं के बारे में जानकारी ली।
अधिकारियों ने संबंधित समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए। महिला अहाते में निरुद्ध महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों से खान-पान, चिकित्सा, मनोरंजन और विधिक सहायता से जुड़ी किसी भी समस्या के बारे में विस्तार से पूछताछ की गई। निरीक्षण के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जिला कारागारको भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा 5 स्टार ‘एक्जेम्पलरी’ रेटिंग का ‘ईट राइट कैंपस’ प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। यह प्रमाण पत्र माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा जिलाधिकारी, एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा को सौंपा गया। इस उपलब्धि को कारागार प्रशासन की उत्कृष्ट खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था का प्रमाण बताया गया। निरीक्षण के दौरान जेलर के.के. दीक्षित, डिप्टी जेलर बृजेश नारायण पाण्डेय, अरविन्द चौहान, शिवानी यादव, विजयलक्ष्मी गुप्ता सहित कारागार के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। संयुक्त निरीक्षण का समापन कारागार की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं मानवीय बनाने के संकल्प के साथ हुआ।

















