-काली पट्टी बांधकर शिक्षकों और कर्मचारियों ने जताया विरोध, पुरानी पेंशन लागू करने की मांग
-नई पेंशन व्यवस्था को बताया असुरक्षित, बाजार आधारित पेंशन पर उठाए सवाल
-13 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर मशाल जुलूस निकालने की घोषणा
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में एक अप्रैल को सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को लेकर ‘काला दिवस’ मनाया। जनपद के बेसिक, माध्यमिक तथा अन्य सरकारी संस्थानों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया और वर्ष 2005 में बंद की गई पुरानी पेंशन व्यवस्था को पुन: लागू करने की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन व्यवस्था लागू होने के बाद से कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा कमजोर हुई है। विरोध प्रदर्शन के दौरान विभिन्न विद्यालयों और कार्यालयों में कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।
अटेवा संगठन के जिलाध्यक्ष मनीष कुमार शर्मा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को पुरानी पेंशन का लाभ दिया जा रहा है, जबकि सरकारी कर्मचारियों को बाजार आधारित पेंशन व्यवस्था के भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालात के कारण शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे नई पेंशन योजना में कर्मचारियों के अंशदान की राशि में भारी कमी आई है और कई कर्मचारियों का फंड लाखों रुपये तक घट गया है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सभी शिक्षक एवं कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन योजना को तत्काल बहाल किया जाए तथा नई और एकीकृत पेंशन व्यवस्था को वापस लिया जाए।
जिला कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार चौहान ने कहा कि अटेवा और राष्ट्रीय आंदोलन पुरानी पेंशन बहाली के नेतृत्व में यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाकर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन शिक्षक और कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए एकजुट हैं और लक्ष्य प्राप्त होने तक आंदोलन जारी रहेगा। जिला महामंत्री राम शेष वर्मा ने कहा कि सरकार को शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ के बैनर तले 13 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर बड़ा जनआक्रोश मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
संगठन पदाधिकारियों ने जनपद के सभी बेसिक, माध्यमिक एवं अन्य विभागों के सरकारी कर्मचारियों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में मशाल जुलूस में शामिल होकर पुरानी पेंशन बहाली और शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों के समर्थन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल पेंशन की मांग नहीं बल्कि भविष्य की सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा विषय है। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के माध्यम से कर्मचारियों ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल किए जाने की मांग दोहराई। जनपद में आयोजित इस विरोध कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि पेंशन व्यवस्था का मुद्दा कर्मचारियों के बीच गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस संबंध में आंदोलन और तेज होने की संभावना है।

















