गाजियाबाद में 1 दिसंबर से निजी हाथों में होगा ड्राइविंग लाइसेंस निर्माण

-प्रशिक्षण और परीक्षण केंद्र में होंगे सख्त नियम, 38 घंटे का अनिवार्य कोर्स और बढ़ी हुई फीस

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने की प्रक्रिया एक दिसंबर से पूरी तरह निजी हाथों में चली जाएगी। अब आवेदकों को संभागीय परिवहन विभाग के कार्यालय (आरटीओ) आने के बजाय प्रशिक्षण और परीक्षण केंद्र पर जाकर अपने लाइसेंस के लिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस नई व्यवस्था के तहत पहले आवेदक को ऑनलाइन आवेदन के बाद परिवहन विभाग में स्क्रूटनी के लिए आना होगा, जहां फोटो और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद आवेदक को निजी सेंटर भेजा जाएगा, जहां 30 दिन का प्रशिक्षण और इसके अंतर्गत 38 घंटे का अनिवार्य कोर्स लिया जाएगा।

नई व्यवस्था में फीस भी बढ़ा दी गई है। पहले केवल एक हजार रुपए में लाइसेंस बनता था, लेकिन अब प्रशिक्षण के लिए अतिरिक्त पांच हजार रुपए शुल्क देना होगा। यह बदलाव आवेदकों को बेहतर प्रशिक्षण और सुरक्षित ड्राइविंग सुनिश्चित करने के लिए लागू किया जा रहा है। एआरटीओ प्रशासन मनोज कुमार सिंह ने बताया कि गुलधन में स्थापित एडीटीसी सेंटर का संचालन मैसर्स डी-पैक एटीएस सेंटर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। शासन की मंशा के अनुसार, एक दिसंबर से इस नए सिस्टम के तहत प्रशिक्षण और टेस्टिंग शुरू हो जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि नई प्रक्रिया ड्राइविंग कौशल को बढ़ावा देगी और सड़क सुरक्षा में सुधार लाने में मदद करेगी, हालांकि इसके साथ आवेदकों के समय और खर्च में बढ़ोतरी होगी। इस बदलाव के कारण गाजियाबाद के नागरिकों को अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए पहले से अधिक तैयारी और समय की योजना बनानी होगी।