आईआईटी बीएचयू को इसरो सेंटर की सौगात

अंतरिक्ष अनुसंधान पर अध्ययन और शोध होंगे

लखनऊ। देश में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) के काम-काज का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसी क्रम में अब आईआईटी बीएचयू में आईएसआरओ का पांचवां केंद्र खुलने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए आईआईटी बीएचयू और आईएसआरओ के मध्य ऑनलाइन प्रोग्राम के दरम्यान समझौता हो गया है। इस समझौते पर आईआईटी के निदेशक प्रो. प्रमोद जैन और आईएसआरओ के सीबीपीओ कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम ऑफिस के निदेशक डॉ. पी.वी. वेंकट कृष्णन ने हस्ताक्षर किए हैं। आईएसआरओ का यह नया सेंटर उत्तर एवं मध्य भारत का पहला रीजनल एकेडमिक सेंटर फॉर स्पेस होगा। इस केंद्र के जरिए बीएचयू आईआईटी के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष अनुसंधान पर अध्ययन और शोध का मौका मिलेगा। इसके अलावा कृषि, दूरसंचार, मौसम विज्ञान, जल संसाधन आदि क्षेत्रों में भी पूर्वांचल और मध्य भारत को काफी लाभ मिलेगा। स्पेस साइंस और स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शोध का दायरा भी बढ़ जाएगा। इस पूरे प्रोग्राम में आईआईटी बीएचयू आईएसआरओ के लिए एम्बेसडर के तौर पर काम करेगा। पूरे प्रोग्राम में क्षमता निर्माण से लेकर जागरूकता, सृजन, शोध और अनुसंधान गतिविधियों के लिए विशेषज्ञों के अनुभव का भी प्रयोग किया जाएगा। इसके पहले कुरुक्षेत्र, जयपुर, मंगलौर और गुवाहाटी में आईएसआरओ के केंद्र खोले जा चुके हैं। बीएचयू आईआईटी में बीटेक और एमटेक छात्र-छात्राओं के लिए शॉर्ट टर्म और वन ईयर प्रोजेक्ट भी शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा पीएचडी के विद्यार्थियों को लॉन्ग टर्म आरएंडडी प्रोजेक्ट्स में भी वरीयता मिलने का रास्ता खुल जाएगा। आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने बताया कि यह रीजनल एकेडमिक सेंटर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड आदि राज्यों में भी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु प्रमुख फैसिलिटेटर की भूमिका निभाएगा। सूत्रों का कहना है कि आईआईटी बीएचयू में आईएसआरओ का केंद्र खुलवाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अह्म भूमिका है। इस केंद्र का विद्यार्थियों को काफी फायदा मिलेगा।