इनर व्हील क्लब, नवीन ग्रेटर नोएडा ने दिखाई संवेदनशीलता

– 100 बच्चों को जूते और मिठाई बांटकर खुशियों से भर दिया दिन

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। समाजसेवा और मानवीय संवेदनाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित करते हुए इनर व्हील क्लब, नवीन ग्रेटर नोएडा ने शुक्रवार को एक अनूठी पहल की। क्लब ने एक अंडर-प्रिविलेज्ड स्कूल के लगभग 100 गरीब और जरूरतमंद बच्चों को जूते वितरित किए, ताकि बदलते मौसम में वे सुरक्षित रह सकें और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बच सकें। बच्चों को जूते पहनाकर उनका उत्साह देखते ही बनता था। इस अवसर पर उन्हें लड्डू भी वितरित किए गए, जिससे उनके चेहरों पर मासूम मुस्कान और खुशी झलक उठी। इनर व्हील क्लब का यह प्रयास केवल बच्चों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके बेहतर भविष्य की ओर एक कदम साबित हुआ। क्लब ने बच्चों को यह संदेश दिया कि समाज उनके साथ खड़ा है और उनके सपनों को साकार करने में मददगार बनेगा। कार्यक्रम में स्कूल के समर्पित शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बच्चों की शिक्षा और उनके व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।

क्लब की अध्यक्ष श्रीमती अदिति भारद्वाज ने इस अवसर पर कहा कि हर बच्चे का शिक्षा पर अधिकार है और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी बुनियादी जरूरतों की कमी उनके विकास में बाधा न बने। उन्होंने बच्चों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढऩे और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। क्लब की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती अनिता सिंगला ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता का असली रास्ता सच्चाई और ईमानदारी से होकर गुजरता है। उन्होंने बच्चों को कठिन परिस्थितियों से हार न मानने और निरंतर मेहनत करते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा दी।

इस अवसर पर क्लब की अन्य सदस्याएँ शैली गर्ग, प्रतिभा सोधिया, सोनिका त्यागी सहित सभी सक्रिय सदस्यों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बच्चों की खुशियों में शामिल होकर यह साबित किया कि सामाजिक कार्य केवल दान नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को साझा करने का सबसे बड़ा माध्यम है। इनर व्हील क्लब, नवीन ग्रेटर नोएडा लगातार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों तक पहुंच बनाकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहा है। क्लब का उद्देश्य केवल जरूरतें पूरी करना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की आशा जगाना है।