नगर निगम की बढ़ेगी आमदनी, फिर क्यों हो रहा विरोध ?

नगर निगम को वर्तमान में विज्ञापन से सालान मिलते हैं ढ़ाई से तीन करोड़, नई नीति से आय बढ़कर होगी 15 करोड़

जानकार पूछ रहे सवाल जानलेवा अवैध होर्डिंग्स से मिलेगी निजात फिर क्यों किया जा रहा विरोध

क्या विज्ञापन माफिया की शह पर हो रहा विरोध? विज्ञापन के गोरखधंधे में शामिल रहे हैं कई हिस्ट्रीशीटर अपराधी

उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। विज्ञापन माफिया काफी ताकतवर हैं। ऐसे में वह विज्ञापन के करोड़ों रुपये के खेल पर अपना सिक्का जमाये रखने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। जानकार नगर निगम की नई विज्ञापन नीति के विरोध में लगातार हो रही लॉबिंग और विरोध-प्रदर्शन को अब शक की नजरों से देख रहे हैं। जानकारों की छोड़िये आम आदमी भी अब यह सवाल पूछ रहा है कि जिस नये विज्ञापन नीति से नगर निगम को करोड़ों रुपये का लाभ मिल रहा है और निगम की सालाना आमदनी पांच गुणा से भी अधिक बढ़ेगी। उसका विरोध आखिर क्यों किया जा रहा है। यह विरोध किसे फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें- शहर की खूबसूरती में बाधक बने अवैध होर्डिंग के खिलाफ निगम सख्त

गाजियाबाद नगर निगम में विज्ञापन विभाग में खूब खेला होता रहा है। पूरे शहर में अवैध होर्डिंग्स का जाल विछाकर विज्ञापन माफिया करोड़ों की कमाई करने के साथ-साथ लोगों की जान के साथ भी खिलवाड़ करते हैं। शहर में कई बार होर्डिंग्स गिरने से लोगों की जानें भी जा चुकी है। बिना अनुमति के या फिर चुनिंदा स्थानों की अनुमति लेकर पूरे शहर को होर्डिंग्स और यूनिपोल से पाट देने वाले विज्ञापन माफिया की कमर तोड़ने के लिए नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने नई नीति के आधार पर टेंडर कराया है। टेंडर कराये जाने से नगर निगम को काफी लाभ हुआ।illegal-hording-ghaziabad-nigam

यह भी पढ़ें – विजुअल प्रदूषण मुक्त शहर बनेगा गाजियाबाद

पहले मिलते थे महज दो से तीन करोड़ रुपये

पिछले 5 से 6 वर्षों का रिकार्ड देखें तो विज्ञापन से निगम को प्रतिवर्ष औसतन दो से तीन करोड़ रुपये मिलते थे। लेकिन नये टेंडर के मुताबिक नगर निगम को विज्ञापन मद में न्यूनतम 14 करोड़ 53 लाख 53 हजार रुपये मिलेंगे। इतना ही नहीं नन रिफंडेबल 2 करोड़ रुपये का प्रीमियम भी मिलेगा। बावजूद इसके विज्ञापन के टेंडर कराये जाने का विरोध किया जा रहा है।Ghaziabad Illegal Hording

नगर निगम के हितों का रखा गया ख्याल
पूर्व में विज्ञापन को लेकर जो करार किये जाते रहे हैं उसमें नगर निगम से कहीं ज्यादा विज्ञापन कंट्रैक्ट हासिल करने वाली कंपनियों की सुविधाओं का ख्याल रखा जाता था। यही वजह रही है कि नगर निगम कंपनियों से विज्ञापन का पैसा वसूलने में असफल रहता था। लेकिन नगर निगम की नई विज्ञापन नीति के तहत कंपनी से जो करार हुआ है। उसके मुताबिक विज्ञापन करने वाली कंपनी को भले ही नुकसान हो जाये लेकिन, नगर निगम की आमदनी में कोई कमी नहीं होगा। उसे साढ़े 15 करोड़ रुपये हर हाल में मिलेंगे। इसके विपरीत यदि कंपनी विज्ञापन से अधिक कमाई करती है तो उसे अपनी कमाई का 40 फीसद हिस्सा गाजियाबाद नगर निगम को देना होगा।

यह भी पढ़ें – शहर की खूबसूरती बिगाड़ रहे अवैध विज्ञापन पर निगम ने कसा शिंकजा

क्या कहते हैं लोग
डेल्टा कॉलोनी आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी पीके शर्मा कहते हैं कि जिस तरह से नये विज्ञापन नीति का विरोध किया जा रहा है उससे विरोध करने वालों की मंशा पर शक गहरा रहा है। गाजियाबाद निवासी एवं पेशे से पत्रकार नवीन डोभाल कहते हैं कि अमूमन यह देखा जाता है कि सरकारी ठेके में ठेकेदार के लाभान्वित होने पर विरोध होता है। लेकिन यह अपने आप में अनोखा मामला है जिसमें सरकारी विभाग नगर निगम को लाभ पहुंचने पर विरोध किया जा रहा है। यही वजह है कि लोगों के मन में शक हो रहा है कि यह विरोध किसे लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

कंट्रैक्ट रद्द करने का निगम को होगा अधिकार
निगम के पास यह अधिकार रहेगा कि वह एक महीने का नोटिस देकर कॉट्रैक्ट रद्द कर सकता है। 5 साल बाद नगर निगम द्वारा विज्ञापन शुल्क में 10 फीसद की बढ़ोत्तरी की जाएगी और इसके बाद हर तीन साल पर 10 फीसद की बढ़ोत्तरी होती रहेगी। यानि नगर निगम की आमदनी लगातार बढ़ती रहेगी। कंपनी के पास सिर्फ 15 हजार स्क्वायर मीटर विज्ञापन लगाने का अधिकार रहेगा।

Congress-protest-Ghaziabadपार्षद कर रहे विरोध, कमेटी करेगी जांच
डिजीटल विज्ञापन का नगर निगम द्वारा टेंडर कराये जाने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इसके विरोध में लॉबिंग की जा रही है। लेकिन अब यह विरोध कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। कुछ पार्षद नया कंट्रैक्ट रद्द करने की मांग कर रहे हैं। पार्षद मनोज चौधरी इसके विरोध में धरना पर बैठे हैं। उधर, मेयर आशा शर्मा ने इस मामले में कमेटी गठित कर जांच कराने की बात कही है। मेयर का कहना है तीन सदस्यी कमेटी गठित कर आरोपों की जांच कराई जाएगी। कमेटी में दो पार्षद और एक प्रशासनिक अधिकारी होंगे।

 यह भी पढ़ें – होर्डिंग-यूनीपोल मुक्त होगा गाजियाबाद

एफओबी और मूर्ति के रख-रखाव के लिए बांटे गये होर्डिंग्स-यूनिपोल
गाजियाबाद नगर निगम में विज्ञापन के गोरखधंधे का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कहीं एफओबी के नाम पर तो कहीं सिर्फ मूर्तियों के रख-रखाव के नाम पर थोक के भाव में शहर में होर्डिंग्स यूनिपोल लगाने का ठेका दे दिया गया। यह सभी कॉट्रैक्ट इस तरह से बनाये गये कि नगर निगम को लाभ के बजाय हमेशा नुकसान ही पहुंचता रहेगा। यही वजह रही है कि विज्ञापन से नगर निगम की कमाई पिछले कई सालों से बढ़ ही नहीं रही है। नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने विज्ञापन के इस खेल पर भी हंटर चलाया है। यही वजह है कि विज्ञापन से नगर निगम को नुकसान पहुंचा कर अपना जेब भरने वालों को यह पसंद नहीं आ रहा है।