यमुना प्राधिकरण के CEO डॉ. अरुणवीर सिंह की निष्पक्ष, ईमानदार और पारदर्शी कार्यप्रणाली का ही नतीजा है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, इंटरनेशनल फिल्म सिटी और मेडिकल डिवाइस जैसी परियोजनाएं धरातल पर उतरी। यीडा की यह परियोजनाएं उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होंगी। किसान और आवंटियों के मामलों को लेकर डॉ. अरुणवीर सिंह को बेहद संवेदनशील माना जाता है। प्राधिकरण के संपत्ति विभाग की कारगुजारी ने सीईओ को गुस्से से लाल कर दिया है। आवंटी को परेशान किये जाने के मामले में वरिष्ठ परियोजना अधिकारी एवं सेक्टर- 20 के संपत्ति प्रभारी पीपी सिंह को सुधरने की सख्त चेतावनी दी गई है। पीपी सिंह की कारगुजारियों की वजह से प्राधिकरण के अन्य कामचोर और लापरवाह अधिकारियों की भी शामत आनी तय है।
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण में तैनात लापरवाह और कामचोर अधिकारियों की शामत आने वाली है। सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ऐसे अधिकारियों को सुधारने के लिए कार्रवाई का हंटर चलाएंगे। प्राधिकरण में मनमर्जी चलाने वाले अधिकारियों की कारगुजारियों ने सीईओ को गुस्से से लाल कर दिया है। डॉ. अरुणवीर सिंह को स्वच्छ एवं ईमानदार लोगों को प्रोत्साहित करने और भ्रष्ट एवं लापरवाह लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है। यमुना प्राधिकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी कार्यप्रणाली का ही नतीजा है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, इंटरनेशनल फिल्म सिटी और मेडिकल डिवाइस जैसी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होंगी। किसान और आवंटियों के मामलों को लेकर डॉ. अरुणवीर सिंह को बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा आवंटी को परेशान किये जाने के मामले को सीईओ ने गंभीरता से लिया है। सेक्टर- 20 के संपत्ति प्रभारी पीपी सिंह को सुधरने की सख्त चेतावनी दी गई और दो दिनों के अंदर समस्या निस्तारित करने को कहा गया है। आवंटियों को परेशान करना और शिकायत आने के बाद भी समस्या का निस्तारण नहीं करने का मामला गंभीर है। हालिया मामला इतना गंभीर है कि अधिकारियों की कार्यशैली पर सीधी ऊंगली उठ रही है।
मामला यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-20 से जुड़ा हुआ है। पीड़ित प्रदीप बत्रा के मुताबिक यीडा के सेक्टर- 20 टी में उनका 500 मीटर का प्लॉट है। वर्ष 2019 में लीज प्लान जारी होने के बाद प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी गई। अब संपत्ति विभाग द्वारा प्रदीप बत्रा के प्लॉट का साईज घटाकर 450 मीटर कर दिया गया और इसका नोटिस आवंटी को भेजा गया। शायद यह अनोखा मामला है जिसमें प्राधिकरण द्वारा लीज प्लान जारी करने के बाद प्लॉट की रजिस्ट्री भी कर दी गई। लेकिन फिर दोबारा से लीज प्लान जारी किया गया और मनमाने ढंग से रजिस्ट्री के बावजूद प्लॉट का साईज कम कर दिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि संपत्ति प्रभारी द्वारा इस मामले में किसी वरिष्ठ अधिकारियों की स्वीकृति भी नहीं ली गई। नोटिस मिलने के बाद प्रदीप बत्रा संपत्ति विभाग में अपनी शिकायत लेकर गये। लेकिन उनकी समस्या का निस्तारण करने के बजाय वापस लौटा दिया गया।
प्रदीप बत्रा पुणे महाराष्ट्र में नौकरी करते हैं। ऐसे में पुणे से आकर यमुना प्राधिकरण के चक्कर लगाना काफी परेशानी भरा है। प्रदीप बत्रा अपनी शिकायत लेकर सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह के पास पहुंचे। सीईओ ने तुरंत जीएम प्रोजेक्ट को तलब किया। फाइल की जांच की गई तो संपत्ति विभाग की मनमानी और नियमों को ठेंगा दिखाने की परंपरा की कलई खुल गई। वरिष्ठ परियोजना अधिकारी एवं सेक्टर-20 के संपत्ति प्रभारी पीपी सिंह ने आवंटी को दोबारा से लीज प्लान और नोटिस जारी करने के मामले में किसी वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति भी नहीं ली। पीपी सिंह की कारगुजारियों की वजह से प्राधिकरण के अन्य कामचोर और लापरवाह अधिकारियों की भी शामत आनी तय है। सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पीड़ा या समस्या लेकर आता है तो सबसे पहले उसकी समस्या को गंभीरता से सुना जाये और फिर प्राथमिकता के आधार पर समस्या का निस्तारण कराया जाये।
















