विरोध दरकिनार, गिलगिट-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा

पाकिस्तान की कारस्तानी ने और बढ़ाई भारत की नाराजगी

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की नापाक कारस्तानी रूक नहीं पाई है। भारत के विरोध को नजरअंदाज कर पाकिस्तान ने अब गिलगिट-बाल्टिस्तान को प्रॉविंस (राज्य) घोषित कर दिया है। जबकि गिलगिट-बाल्टिस्तान भारत का हिस्सा है। इस निर्णय से दोनों देशों के बीच तनाव बढऩे की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है। इस्लामाबाद में आयोजित 73वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री इमरान खान ने गिलगिट-बाल्टिस्तान को प्रॉविंस (राज्य) बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गिलगिट-बाल्टिस्तान को संवैधानिक अधिकार दिए जाएंगे। वहां जल्द चुनाव कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के कारण वह अभी गिलगिट-बाल्टिस्तान के लिए विकास पैकेज की घोषणा या चर्चा नहीं कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है। हालांकि भारत पहले से इसका विरोध करता आया है। प्रधानमंत्री इमरान खान को इस फैसले के खिलाफ देश के भीतर भी चुनौती मिल चुकी है। इमरान सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों ने भी लामबंदी कर रखी है। जमीयत-ए-उलेमा गिलगिट-बाल्टिस्तान को प्रांत बनाने के खिलाफ निरंतर आवाज बुलंद कर रहा है। पाकिस्तान में तर्क दिया गया है कि इमरान के इस निर्णय से भारत का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला वैध साबित हो जाएगा। पाकिस्तान सरकार ने विपक्ष को इस मुद्दे पर चुनाव के बाद बात करने का भरोसा दिलाया है, मगर इसके पहले गिलगिट-बाल्टिस्तान को लेकर घोषणा कर दी गई है। यह विवाद काफी पुराना है। 1935 में ब्रिटेन सरकार ने गिलगिट एजेंसी को दी गई लीज 1 अगस्त 1947 को रदद कर दी थी। इसके बाद अंग्रेजों ने क्षेत्र को जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह को लौटा दिया था। राजा हरि सिंह ने 31 अक्टूबर 1947 को समूचे जम्मू-कश्मीर का विलय भारत में कर दिया। गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्थानीय कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान ने 2 नवंबर 1947 को विद्रोह कर दिया। इसका फायदा उठाकर पाकिस्तान ने हमला कर दिया। संयुक्त राष्ट्र द्वारा सीजफायर घोषित किए जाने के बाद से पाक वहां अपना कब्जा जताता रहा।