तेजस्वी का ‘तेज’ फीका, न हार टाल पाए, न घर की रार

लेखक : तरुण मिश्र
(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। देश-विदेश में आयोजित होने वाले व्याख्यानों में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। जनसेवक के रुप में प्रख्यात है।)

घर का विवाद, घर में ही सुलझा लेंगे…आप कतई चिंता मत कीजिए। पटना में राजद नेताओं की बैठक में लालू यादव की यह टिप्पणी बेटी रोहिणी आचार्य के गंभीर आरोपों के बाद सामने आई है। दरअसल लालू यादव नहीं चाहते कि यह कलह राजद की छवि पर और गहरा असर डाले। देश के बड़े राजनीतिक घरानों के आपसी विवाद सार्वजनिक होते रहे हैं। ऐसे में हर परिवार को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। लालू यादव और राबड़ी देवी के लिए फिलहाल परिवार को एकजुट करने की बड़ी चुनौती है। इसमें वह कामयाब हो पाते हैं या नहीं, यह देखना दिलचस्प रहेगा। बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की शर्मनाक हार के बाद परिवार में फूट पड़ने से लालू और राबड़ी निश्चित रूप से तनाव में आ गए हैं। तेज प्रताप यादव के बाद रोहिणी आचार्य ने परिवार से नाता तोड़ लिया है। बूढ़े एवं बीमार लालू का कुनबा धीरे-धीरे बिखर रहा है। इसके बावजूद वह कुछ नहीं कर पा रहे हैं। लालू यादव की हालत महाभारत के भीष्म पितामह और धृतराष्ट्र जैसी नजर आती है। दृष्टिहीन धृतराष्ट्र देख नहीं सकते थे, मगर हालात के बारे में जान व सुन सकते थे। जबकि भीष्म पितामह बुराई को देखने एवं सुनने के बाद भी मौन धारण किए रहे थे।

बिहार में राजद को अस्तित्व में लाने तथा मजबूत बनाने में लालू यादव ने कड़ी मेहनत की थी। वर्तमान में इस पार्टी और परिवार पर तेजस्वी यादव का एकाधिकार दिखाई पड़ता है। अपने कुछ करीबियों का वह मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। इन करीबियों की वजह से लालू के परिवार में लंबे समय से कलह चल रही है। पिता लालू यादव की जिंदगी बचाने के लिए रोहिणी आचार्य ने जो त्याग एवं बलिदान दिया, वह अमूल्य है। बेटी की किडनी के सहारे लालू अब तक जिंदा हैं। बदले में रोहिणी को क्या मिला? उन्हें अपमान का कड़वा घूंट पीकर अपना मायका छोड़ना पड़ा। रो-रोकर उन्होंने अपनी पीड़ा को जाहिर किया। मायके में रोहिणी के साथ जिस प्रकार का बर्ताव किया गया, वह कतई उचित नहीं है। रोहिणी के आरोपों से एक बात स्पष्ट है कि तेजस्वी यादव अब पूरी तरह से सांसद संजय यादव और रमीज के हाथों की कठपुतली बन चुके हैं। रमीज का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। सबसे अफसोसजनक बात यह कि कैसे कोई भाई दूसरों के बहकावे में आकर अपनी बहन का अपमान कर सकता है। लालू यादव के घर का किस्सा यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मुलायम सिंह यादव के परिवार की रार से मेल खाता नजर आता है।

याद कीजिए उस समय को जब अखिलेश यादव ने सपा पर एकाधिकार जमाने के लिए खून के रिश्तों की तिलांजलि दे डाली थी। मुलायम सिंह को अनसुना व नजरअंदाज कर उन्होंने सपा पर कब्जा कर लिया था। इसके चलते चाचा शिवपाल यादव लंबे समय तक सपा से दूर रहे थे। वैसे मुलायम परिवार में कलह की वजह अमर सिंह को माना जाता था। कभी अखिलेश ने अपने बड़ों का अपमान किया था, जबकि आज तेजस्वी यादव भी ऐसा ही कर रहे हैं। अखिलेश यादव बेशक सपा में सर्वेसर्वा बन चुके हैं, मगर पुन: मुख्यमंत्री बनने का उनका सपना अभी अधूरा है। जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव का अहंकार भी उन्हें अर्श से फर्श पर ला चुका है। कहा जाता है कि परिवार की एकजुटता में बड़ी ताकत होती है। कोई भी संगठित परिवार बड़ी से बड़ी चुनौती को मात देने में सक्षम होता है। इसके विपरीत यदि परिवार में अलगाव हो जाए तो एक के बाद एक समस्या हावी होने लगती है। तेजस्वी यादव और रोहिणी आचार्य के झगड़े के उपरांत बिहार की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गरम है।

कोई पूरे मामले पर तंज कस रहा है तो कोई परिवार में विवाद पर चिंता जाहिर कर रहा है। सोशल मीडिया के जरिए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी अपना पुराना दुख जाहिर किया है। चिराग ने कहा कि वह भी इस तरह की पीड़ा का सामना कर चुके हैं। बिहार में राजद महागठबंधन का सबसे अहम पार्टनर है। वैसे ये पहली बार नहीं है, जब रोहिणी संजय यादव को लेकर नाराज हुई हों। चुनाव से पहले बिहार अधिकार यात्रा के दौरान भी बस की फ्रंट सीट यानी तेजस्वी यादव की जगह संजय यादव बैठ गए थे। जिसे लेकर भी रोहिणी ने अपना विरोध दर्ज कराया था। तेज प्रताप यादव भी संजय यादव को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते रहते हैं। कुछ माह पहले तेज प्रताप यादव को भी एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। इस पोस्ट में तेज प्रताप अपनी एक महिला मित्र के साथ थे। पार्टी से निष्कासन के बाद कुछ दिनों तक तेज प्रताप यादव ने पार्टी और परिवार के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की, मगर बाद में उनके बयानों में पार्टी और तेजस्वी के प्रति तल्खी बढ़ती गई। विधानसभा चुनाव में बेशक तेज प्रताप कोई कमाल नहीं दिखा पाए हैं, मगर उन्होंने एनडीए को नैतिक समर्थन देने की घोषणा कर दी है।