बुलंदशहर से जालौन तक बढ़ा भरोसे का सफर, धर्मजीत त्रिपाठी की कार्यशैली बनी मिसाल

  • चार वर्षों में विकास, पारदर्शिता और आय वृद्धि के जरिए जिला पंचायत को दिलाई नई पहचान
  • प्रदेश की पहली आईएसओ प्रमाणित जिला पंचायत बनाने में निभाई निर्णायक भूमिका
  • -मिशन कर्मयोगी अभियान में 122 घंटे का प्रशिक्षण लेकर हासिल किए 152 प्रमाणपत्र और 394 अंक

उदय भूमि संवाददाता
बुलंदशहर। शासन स्तर पर जारी प्रशासनिक तबादलों के क्रम में बुलंदशहर जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी धर्मजीत त्रिपाठी का तबादला जनपद जालौन में उसी पद पर कर दिया गया है। उनके स्थान पर चित्रकूट में तैनात अपर मुख्य अधिकारी की नियुक्ति की गई है। करीब चार वर्षों तक बुलंदशहर में सेवाएं देने वाले धर्मजीत त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल के दौरान विकास, पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता की ऐसी मिसाल कायम की, जिसकी चर्चा आज भी जिला पंचायत के अधिकारियों, कर्मचारियों और आमजन के बीच होती है।
अपने शांत स्वभाव, व्यवहार कुशलता और परिणाम आधारित कार्यशैली के कारण धर्मजीत त्रिपाठी ने प्रशासनिक तंत्र में एक अलग पहचान बनाई। उनके कार्यकाल में जिला पंचायत ने विकास कार्यों को नई गति दी और राजस्व वृद्धि के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, वित्तीय अनुशासन और जनहित के प्रति समर्पण ने उन्हें जिले के लोकप्रिय अधिकारियों में शामिल कर दिया। धर्मजीत त्रिपाठी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में बुलंदशहर जिला पंचायत को प्रदेश की पहली आईएसओ प्रमाणित जिला पंचायत बनाने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

प्रशासनिक गुणवत्ता, कार्यप्रणाली में सुधार और जनसेवाओं को व्यवस्थित करने के लिए किए गए प्रयासों ने जिला पंचायत को नई पहचान दिलाई। यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों और उनके नेतृत्व क्षमता का प्रमाण मानी गई। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ग्रामीण विकास योजनाओं, आधारभूत सुविधाओं और जनकल्याणकारी कार्यों को प्राथमिकता दी। सड़कों, स्वच्छता, पंचायत व्यवस्थाओं और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए उन्होंने लगातार निगरानी और समीक्षा की। यही कारण रहा कि जिला पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी तथा आम जनता का विश्वास भी मजबूत हुआ।

धर्मजीत त्रिपाठी को उत्तर प्रदेश सरकार के तेजतर्रार और युवा अधिकारियों में गिना जाता है। प्रशासनिक निर्णय लेने की क्षमता, कार्य के प्रति प्रतिबद्धता और परिणाम देने की शैली ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पूर्व में ‘समाजसेवी रत्न’ सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान उनके सामाजिक सरोकारों और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रमाण माना जाता है। प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ उन्होंने शासन की महत्वाकांक्षी ‘मिशन कर्मयोगी’ योजना में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इस अभियान के अंतर्गत उन्होंने विभिन्न डिजिटल प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को पूरा कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। इन पाठ्यक्रमों में कार्यस्थल पर योग अभ्यास, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडऩ की रोकथाम अधिनियम-2013, सरकारी ई-मार्केटप्लेस पोर्टल पर खरीद प्रक्रिया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूल जानकारी तथा सूचना का अधिकार अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

धर्मजीत त्रिपाठी ने इस अभियान के तहत लगभग 122 घंटे का प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए 152 प्रमाणपत्र और 394 अंक अर्जित किए। डिजिटल प्रशिक्षण और आधुनिक प्रशासनिक प्रणाली को अपनाने की उनकी यह पहल अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी। जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके तबादले पर मिश्रित भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि धर्मजीत त्रिपाठी ने हमेशा टीम भावना के साथ कार्य किया और कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। उनकी कार्यशैली ने कार्यालय के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखा। बुलंदशहर में अपने सफल कार्यकाल के बाद अब जालौन में भी उनसे प्रशासनिक सुधार, विकास कार्यों की गति और जनसेवा के नए आयाम स्थापित करने की उम्मीद की जा रही है। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि उनकी कार्यक्षमता और अनुभव जालौन जिले के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।