-पार्किंग में धधक रही थी आग, 160 लोगों की सांसें अटकीं; धुएं से भर गई थी पूरी इमारत
-दोनों गेटों के ताले तोड़कर बनाया रास्ता, एक्सटेंशन लैडर से बालकनी में फंसे लोगों को उतारा
-बंद फ्लैटों के दरवाजे तोड़कर अंदर घुसे जवान, धुएं के बीच शुरू किया तलाशी अभियान
-बच्चों को गोद में उठाया, घायल और बेहोश लोगों को कंधों पर लेकर निकले अग्निशमन कर्मी
-हर तरफ चीख-पुकार के बीच सीएफओ राहुल पाल के नेतृत्व में चला साहसिक बचाव अभियान
-बंद फ्लैटों के दरवाजे तोड़कर अंदर घुसे जवान, धुएं के बीच शुरू किया तलाशी अभियान
-बच्चों को गोद में उठाया, घायल और बेहोश लोगों को कंधों पर लेकर निकले अग्निशमन कर्मी
-हर तरफ चीख-पुकार के बीच सीएफओ राहुल पाल के नेतृत्व में चला साहसिक बचाव अभियान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। खोड़ा कालोनी की सुनेहरी रेजीडेन्सी में 3 अप्रैल 2026 को हुए भीषण अग्निकांड की घटना आज भी उस खौफनाक मंजर की याद दिलाती है, जब जी+5 मंजिला इमारत की पार्किंग में लगी आग और घने धुएं के बीच करीब 160 लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई थी। आग की लपटें तेजी से ऊपरी मंजिलों तक पहुंच रही थीं और बाहर निकलने का रास्ता बंद था। ऐसे हालात में अग्निशमन विभाग की टीम ने अपनी जान की परवाह किए बिना रेस्क्यू अभियान चलाकर 27 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस साहसिक अभियान के लिए मुख्य अग्निशमन अधिकारी गाजियाबाद राहुल पाल समेत दस अग्निशमन अधिकारियों और कर्मचारियों को 15 अगस्त 2026 के अवसर पर गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया गया। सीएफओ राहुल पाल के अनुसार, सुनेहरी रेजीडेन्सी में आग लगने की सूचना मिलते ही फायर सर्विस यूनिट को तत्काल मौके पर भेजा गया।
गाजियाबाद। खोड़ा कालोनी की सुनेहरी रेजीडेन्सी में 3 अप्रैल 2026 को हुए भीषण अग्निकांड की घटना आज भी उस खौफनाक मंजर की याद दिलाती है, जब जी+5 मंजिला इमारत की पार्किंग में लगी आग और घने धुएं के बीच करीब 160 लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई थी। आग की लपटें तेजी से ऊपरी मंजिलों तक पहुंच रही थीं और बाहर निकलने का रास्ता बंद था। ऐसे हालात में अग्निशमन विभाग की टीम ने अपनी जान की परवाह किए बिना रेस्क्यू अभियान चलाकर 27 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस साहसिक अभियान के लिए मुख्य अग्निशमन अधिकारी गाजियाबाद राहुल पाल समेत दस अग्निशमन अधिकारियों और कर्मचारियों को 15 अगस्त 2026 के अवसर पर गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया गया। सीएफओ राहुल पाल के अनुसार, सुनेहरी रेजीडेन्सी में आग लगने की सूचना मिलते ही फायर सर्विस यूनिट को तत्काल मौके पर भेजा गया।
वहां पहुंचने पर स्थिति बेहद गंभीर थी। भवन के ग्राउंड फ्लोर की पार्किंग में करीब 35 दोपहिया वाहन और विद्युत मीटर आग की चपेट में थे। आग की लपटें और काला धुआं तेजी से ऊपर की मंजिलों की ओर बढ़ रहा था। भवन में करीब 160 लोग मौजूद थे और दोनों ओर के गेट बंद होने के कारण लोगों के बाहर निकलने का रास्ता नहीं था। राहुल पाल ने बताया कि भवन में केवल एक सीढ़ी थी, जो आग और धुएं से पूरी तरह भर चुकी थी। ऐसे में ऊपर की मंजिलों पर फंसे लोगों के लिए नीचे आना लगभग असंभव हो गया था। बालकनियों से महिलाओं और बच्चों के रोने तथा बचाने की आवाजें आ रही थीं। आसपास मौजूद लोग भी बेहद परेशान थे। उन्होंने कहा कि उस समय प्राथमिकता केवल एक थी—किसी भी तरह अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना।
ताले तोड़े, लैडर लगाई और शुरू किया जोखिम भरा रेस्क्यू
सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि टीम ने सबसे पहले आग के फैलाव को रोकने के लिए पार्किंग की आग पर पानी की पंपिंग शुरू की। इसके साथ ही भवन के दोनों गेटों पर लगे तालों को हथौड़े और कटर की सहायता से तोड़ा गया, ताकि रेस्क्यू का रास्ता बनाया जा सके। भवन के सामने एक्सटेंशन लैडर लगाई गई और बालकनियों में फंसे लोगों को एक-एक कर नीचे उतारना शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि केवल बाहर से रेस्क्यू करना पर्याप्त नहीं था। इसलिए फायर कर्मियों ने धुएं और तपिश के बीच भवन के अंदर प्रवेश कर ऊपरी मंजिलों की तलाशी शुरू की। कई लोग अंदर से बंद फ्लैटों में फंसे हुए थे। टीम ने दरवाजे तोड़कर अंदर प्रवेश किया और बालकनी, बाथरूम तथा फ्लैट के अलग-अलग हिस्सों में फंसे लोगों को तलाशा।
सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि टीम ने सबसे पहले आग के फैलाव को रोकने के लिए पार्किंग की आग पर पानी की पंपिंग शुरू की। इसके साथ ही भवन के दोनों गेटों पर लगे तालों को हथौड़े और कटर की सहायता से तोड़ा गया, ताकि रेस्क्यू का रास्ता बनाया जा सके। भवन के सामने एक्सटेंशन लैडर लगाई गई और बालकनियों में फंसे लोगों को एक-एक कर नीचे उतारना शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि केवल बाहर से रेस्क्यू करना पर्याप्त नहीं था। इसलिए फायर कर्मियों ने धुएं और तपिश के बीच भवन के अंदर प्रवेश कर ऊपरी मंजिलों की तलाशी शुरू की। कई लोग अंदर से बंद फ्लैटों में फंसे हुए थे। टीम ने दरवाजे तोड़कर अंदर प्रवेश किया और बालकनी, बाथरूम तथा फ्लैट के अलग-अलग हिस्सों में फंसे लोगों को तलाशा।
बच्चों को गोद में उठाया, घायलों को कंधों पर लेकर निकले
राहुल पाल ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान कई लोग मूर्छित और घायल अवस्था में मिले। उन्हें अग्निशमन कर्मियों ने अपने कंधों पर उठाकर बाहर निकाला। कुछ लोगों को दो-दो कर्मियों ने हाथों की सीट बनाकर सुरक्षित नीचे पहुंचाया, जबकि बच्चों को गोद में लेकर बाहर लाया गया। धुआं इतना घना था कि हर कदम पर खतरा बना हुआ था, लेकिन टीम ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए तलाशी और बचाव अभियान जारी रखा। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने असाधारण साहस और टीम भावना का परिचय दिया। रेस्क्यू अभियान में कुल 27 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के साथ ऐसे लोग भी शामिल थे, जो धुएं और आग के कारण बेहोश हो चुके थे। समय पर की गई कार्रवाई से बड़ी जनहानि को टाला जा सका।
राहुल पाल ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान कई लोग मूर्छित और घायल अवस्था में मिले। उन्हें अग्निशमन कर्मियों ने अपने कंधों पर उठाकर बाहर निकाला। कुछ लोगों को दो-दो कर्मियों ने हाथों की सीट बनाकर सुरक्षित नीचे पहुंचाया, जबकि बच्चों को गोद में लेकर बाहर लाया गया। धुआं इतना घना था कि हर कदम पर खतरा बना हुआ था, लेकिन टीम ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए तलाशी और बचाव अभियान जारी रखा। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने असाधारण साहस और टीम भावना का परिचय दिया। रेस्क्यू अभियान में कुल 27 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के साथ ऐसे लोग भी शामिल थे, जो धुएं और आग के कारण बेहोश हो चुके थे। समय पर की गई कार्रवाई से बड़ी जनहानि को टाला जा सका।
दस अग्निशमन कर्मियों को मिला गैलेंट्री मेडल
सीएफओ राहुल पाल ने कहा कि गैलेंट्री मेडल केवल किसी एक व्यक्ति के साहस का सम्मान नहीं है, बल्कि पूरी फायर सर्विस टीम की मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि अग्निशमन कर्मियों के लिए हर रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन जब किसी की जिंदगी बचाने का सवाल सामने हो तो जोखिम की चिंता किए बिना आगे बढऩा ही उनका कर्तव्य है। इस साहसिक अभियान के लिए मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी वैशाली मूलचन्द सिंह, लीडिंग फायरमैन नेत्रपाल, फायर सर्विस चालक रामपाल सिंह, फायर सर्विस चालक सत्येंद्र कुमार, फायरमैन उमाकांत शुक्ला, फायरमैन दीपक कुमार, फायरमैन जोगेंद्र सिंह, फायरमैन विनय यादव और फायरमैन आयुष्मान कुमार शर्मा को 15 अगस्त 2026 के अवसर पर गैलेंट्री मेडल प्रदान किया गया। राहुल पाल ने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के लिए गर्व का विषय है और इससे फायर सर्विस के प्रत्येक जवान का मनोबल बढ़ता है। उन्होंने कहा कि अग्निशमन विभाग भविष्य में भी किसी भी आपदा या आग की घटना में लोगों की जान बचाने के लिए पूरी तत्परता और समर्पण के साथ कार्य करता रहेगा।
सीएफओ राहुल पाल ने कहा कि गैलेंट्री मेडल केवल किसी एक व्यक्ति के साहस का सम्मान नहीं है, बल्कि पूरी फायर सर्विस टीम की मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि अग्निशमन कर्मियों के लिए हर रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन जब किसी की जिंदगी बचाने का सवाल सामने हो तो जोखिम की चिंता किए बिना आगे बढऩा ही उनका कर्तव्य है। इस साहसिक अभियान के लिए मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी वैशाली मूलचन्द सिंह, लीडिंग फायरमैन नेत्रपाल, फायर सर्विस चालक रामपाल सिंह, फायर सर्विस चालक सत्येंद्र कुमार, फायरमैन उमाकांत शुक्ला, फायरमैन दीपक कुमार, फायरमैन जोगेंद्र सिंह, फायरमैन विनय यादव और फायरमैन आयुष्मान कुमार शर्मा को 15 अगस्त 2026 के अवसर पर गैलेंट्री मेडल प्रदान किया गया। राहुल पाल ने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के लिए गर्व का विषय है और इससे फायर सर्विस के प्रत्येक जवान का मनोबल बढ़ता है। उन्होंने कहा कि अग्निशमन विभाग भविष्य में भी किसी भी आपदा या आग की घटना में लोगों की जान बचाने के लिए पूरी तत्परता और समर्पण के साथ कार्य करता रहेगा।
















