-नगर आयुक्त ने किया स्थलीय निरीक्षण, 1 जुलाई से शुरू होगा मेगा पौधारोपण अभियान
-मियावाकी पद्धति से तैयार होगा घना जंगल, सिटी फॉरेस्ट और साईं उपवन की तर्ज पर बदलेगी विजयनगर की तस्वीर
-फलदार, औषधीय और छायादार पौधों से बढ़ेगी हरियाली, वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में नगर निगम की बड़ी पहल
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद गाजियाबाद को प्रदूषण की चुनौती से राहत दिलाने और शहर की वायु गुणवत्ता में व्यापक सुधार लाने की दिशा में नगर निगम ने एक और महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। विजयनगर स्थित लगभग 48 एकड़ आर्मी लैंड को ‘ग्रीन लंग्स ऑफ गाजियाबाद’ के रूप में विकसित करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के निर्देश पर उद्यान विभाग द्वारा यहां मियावाकी पद्धति से लगभग सात लाख पौधे लगाने की व्यापक योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। सोमवार को नगर आयुक्त ने अधिकारियों की टीम के साथ मौके का स्थलीय निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि आगामी 1 जुलाई से इस महत्वाकांक्षी पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। प्रथम चरण में लगभग नौ एकड़ भूमि पर सवा लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे, जबकि शेष 37 एकड़ क्षेत्र में करीब छह लाख पौधों का रोपण किया जाएगा।
कहा कि यह परियोजना केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र शहर के लिए प्राकृतिक ऑक्सीजन बैंक के रूप में विकसित होगा। घने वृक्षों का यह विशाल वन कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को कम करने, ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने बताया कि जिस भूमि पर कुछ समय पहले तक गंदगी और अव्यवस्था का माहौल था, उसे अब हरियाली से आच्छादित किया जाएगा। नगर निगम की यह पहल विजयनगर ही नहीं बल्कि पूरे गाजियाबाद के पर्यावरणीय भविष्य को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि सिटी फॉरेस्ट और साईं उपवन की तरह विजयनगर में भी एक विशाल प्राकृतिक जंगल विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय नागरिकों को स्वच्छ वातावरण, बेहतर वायु गुणवत्ता और प्राकृतिक हरियाली का लाभ मिलेगा। पौधारोपण अभियान को सफल बनाने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं। मौके पर ट्रैक्टरों और अन्य आधुनिक मशीनों की सहायता से भूमि की गहरी जुताई का कार्य किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गड्ढे खोदने, भूमि समतलीकरण तथा सिंचाई व्यवस्था सहित सभी तैयारियां निर्धारित समय के भीतर पूरी कर ली जाएं, ताकि एक जुलाई से बिना किसी बाधा के पौधारोपण कार्य शुरू हो सके। वरिष्ठ प्रभारी उद्यान एन.के. चौधरी एवं उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह की निगरानी में पूरी परियोजना को चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जा रहा है। डॉ. अनुज कुमार सिंह ने बताया कि बड़े क्षेत्रफल को कई भागों में विभाजित कर मियावाकी तकनीक के अनुसार पौधारोपण किया जाएगा। इस पद्धति में पौधों को अधिक घनत्व के साथ लगाया जाता है, जिससे सामान्य पौधारोपण की तुलना में कई गुना तेजी से घना जंगल विकसित होता है। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र गाजियाबाद का सबसे बड़ा शहरी हरित क्षेत्र बनकर उभरेगा। परियोजना के अंतर्गत पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार के फलदार, छायादार तथा औषधीय पौधों का चयन किया गया है।
इनमें बरगद, पीपल, अर्जुन, सागौन, शीशम, नीम, पिलखन, गूलर, जामुन, कटहल, आम, कचनार, कदम, अंजीर, अनार, शहतूत, चीकू, पपीता, केला, इमली, नींबू, तुलसी, मेहंदी, एलोवेरा सहित अनेक देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। इन वृक्षों से न केवल हरियाली बढ़ेगी, बल्कि जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा तथा पक्षियों एवं अन्य जीवों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास तैयार होगा। नगर निगम की इस पहल को स्थानीय नागरिकों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। विजयनगर क्षेत्र के लोगों ने आर्मी लैंड से गंदगी हटाकर उसे हरित क्षेत्र में परिवर्तित करने के निर्णय की सराहना करते हुए नगर निगम और नगर आयुक्त का आभार व्यक्त किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से उपेक्षित पड़ी भूमि अब पूरे क्षेत्र की पहचान बदलने जा रही है और इससे आने वाली पीढिय़ों को स्वच्छ वातावरण तथा बेहतर जीवन गुणवत्ता मिलेगी। निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, वरिष्ठ प्रभारी उद्यान एन.के. चौधरी, प्रभारी उद्यान डॉ. अनुज कुमार सिंह, उद्यान निरीक्षक अजय, उद्यान विभाग के अवर अभियंता सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की मंशा के अनुरूप इस महत्वाकांक्षी परियोजना को निर्धारित समय में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि विजयनगर में विकसित होने वाला यह हरित क्षेत्र आने वाले समय में वास्तव में ‘ग्रीन लंग्स ऑफ गाजियाबाद’ के रूप में शहर को नई पहचान दिला सके।
















