‘योग संगम’ से गूंजा यशोदा मेडिसिटी, स्वस्थ जीवन और निवारक स्वास्थ्य देखभाल का दिया सशक्त संदेश

-अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर डॉक्टरों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, अस्पताल कर्मियों और योग प्रेमियों ने किया सामूहिक योगाभ्यास
-‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ थीम पर कॉमन योग प्रोटोकॉल के तहत योगासन और प्राणायाम का कराया गया अभ्यास
-योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और जागरूक जीवन जीने की संपूर्ण जीवनशैली है: डॉ. पी.एन. अरोड़ा

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर यशोदा मेडिसिटी में रविवार को आयोजित ‘योग संगम’ कार्यक्रम ने स्वास्थ्य, सजगता और निवारक चिकित्सा का सशक्त संदेश दिया। अस्पताल परिसर में आयोजित इस विशेष योग सत्र में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सकों, अस्पताल कर्मियों, योग प्रशिक्षकों तथा बड़ी संख्या में योग प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सामूहिक योगाभ्यास के माध्यम से सभी ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का आयोजन इस वर्ष की अंतरराष्ट्रीय योग दिवस थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ को केंद्र में रखकर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक प्रार्थना के साथ हुई, जिसके बाद प्रतिभागियों ने प्रमाणित योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में कॉमन योग प्रोटोकॉल के तहत विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा, अनुशासन और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को बताया कि नियमित योगाभ्यास केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आत्मिक ऊर्जा का भी आधार है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अनियमित जीवनशैली, तनाव, बढ़ती उम्र और विभिन्न जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचाव के लिए योग सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है। नियमित योग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, हृदय स्वस्थ रहता है, मानसिक तनाव कम होता है तथा व्यक्ति अधिक सक्रिय और ऊर्जावान जीवन जी सकता है। कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ निवारक स्वास्थ्य देखभाल (बचावकारी स्वास्थ्य सेवा) को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि व्यक्ति समय रहते स्वस्थ आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना ले तो मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग और मानसिक तनाव जैसी अनेक गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। योग इस दिशा में सबसे प्रभावी माध्यमों में से एक है।

यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. पी.एन. अरोड़ा ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का ऐसा अनमोल उपहार है, जिसकी उपयोगिता आज पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है। उन्होंने कहा कि योग एक सरल, सुरक्षित और अत्यंत प्रभावशाली अभ्यास है, जो प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी स्वयं लेने के लिए प्रेरित करता है। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है कि लोग केवल बीमारी होने पर उपचार तक सीमित न रहें, बल्कि बीमारियों से बचाव के लिए भी जागरूक बनें और योग जैसी स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत सुखद है कि विभिन्न आयु वर्ग के लोग एक ही मंच पर एकत्र होकर स्वास्थ्य, सजगता और संतुलित जीवन के साझा उद्देश्य के साथ योगाभ्यास कर रहे हैं। ऐसी सामूहिक भागीदारी न केवल लोगों को प्रेरित करती है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का कार्य भी करती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि योग को जन-जन तक पहुंचाकर ही एक स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का सपना साकार किया जा सकता है।

कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सकों ने भी प्रतिभागियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नियमित व्यायाम करने, संतुलित आहार लेने और तनावमुक्त जीवन जीने के लिए योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अस्पताल केवल उपचार का केंद्र नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। “योग संगम’ के माध्यम से यशोदा मेडिसिटी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि स्वास्थ्य केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ आदतों, नियमित योग, सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवनशैली का परिणाम है। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने प्रतिदिन योग करने, अपने परिवार और समाज को भी योग के प्रति जागरूक करने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया। पूरे आयोजन ने यह सिद्ध किया कि योग केवल एक दिवस का उत्सव नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सुखद जीवन की आजीवन साधना है।