संघर्ष संकल्प और सियासत की अटल कहानी डॉ सपना बंसल की पुस्तक का हुआ विमोचन
संघर्ष संकल्प और सियासत की अटल कहानी
गाजियाबाद। मदर इंटरनेशनल मदर लैंड इंटरनेशनल विद्या भारती एवं आकाशवाणी के संयुक्त तत्वाधान में डॉ सपना बंसल द्वारा लिखित पुस्तक संघर्ष संकल्प और सियासत की अटल कहानी का विमोचन रंग भवन ऑडिटोरियम ऑल इंडिया रेडियो सांसद मार्ग न्यू दिल्ली में हुआ। डॉ सपना बंसल ने अपने उद्बोधन में अटल बिहारी बाजपेई पर लिखी किताब संघर्ष संकल्प और सियासत की अटल कहानी के संदर्भ में अटल जी के जीवन एवं राजनीतिक कार्यकाल से ली गई प्रेरणा के आधार पर लिखी है। डॉ बंसल ने कहा अटल बिहारी बाजपेई आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीति को नए आयाम देने वाले ऐसे भारतीय है। जिन्होंने पूरे विश्व में हिंदी का परचम फैलाकर राजनीति की दशा एवं दिशा बदल दी।
भारत में सुशासन की आधुनिक अवधारणा को अटल जी ने अपनी नीतियों और नेतृत्व से पोषित किया। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लोगों की भलाई के लिए सर्मिपत कर दिया। उनका कथन ‘सत्य का संघर्ष सत्ता से-न्याय लड़ता निरंकुशता सेÓ उनके समग्र जीवनकाल में उत्कृष्ट लोकतंत्र का आदर्श वाक्य रहा है। उन्होंने संपूर्ण विश्व के समक्ष सुशासन के महत्व का प्रदर्शन किया था। ऐसे सुशासन का जो लोगों के कल्याण के लिए सभी बाधाओं के खिलाफ लडऩे के लिए सच्चाई, शक्ति और साहस के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। अटल जी का दृढ़ विश्वास था कि राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए सबसे पहले अपने नागरिकों को सशक्त बनाना जरूरी है और इस संबंध में उन्होंने भारत में शिक्षा परिदृश्य को विकसित करने के अपने प्रयासों को मूर्त रूप दिया। आज अटल जी के पद चिन्हों पर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चल रहे हैं। 
उस भवन की नींव का निर्माण अटल बिहारी बाजपेई ने किया था। अटल बिहारी वाजपेई की उदार नीतियों के कारण ही भारतीय राजनीति को देश भक्ति के नए आयाम मिले। डॉ सपना बंसल ने कहा की अटल बिहारी वाजपेई जी ने अपने भाषणों में हमेशा देश और राष्ट्र को सबसे ऊपर रखा है। उन्होंने कहा था कि सरकारें आती है जाती हैं। लेकिन देश बड़ा होता है, देश रहना चाहिए। देश का अस्तित्व रहना चाहिए, दलगत राजनीति से ऊपर दिलों को जीतने का प्रयास करना चाहिए। अटल जी के प्रयासों को भारतीय शिक्षा प्रणाली के इतिहास में सार्वभौमिक माध्यमिक शिक्षा की दिशा में सबसे आवश्यक और सफल कदम माना गया है। सर्व शिक्षा अभियान उपलब्धि ने स्कूली शिक्षा के विकास के दृष्टिकोण में एक बदलाव का आह्वान किया है। भारत जमीन का टुकड़ा नही, जीता जागता राष्ट्रपुरुष है। हिमालय मस्तक है कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे है। पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें है, कन्याकुमारी इसके चरण है। सागर इसके पग पखारता है, यह चन्दन की भूमि है।
अभिनन्दन की भूमि है, यह तर्पण की भूमि है। यह अर्पण की भूमि है, इसका कंकर-कंकर शंकर है। इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है, हम जियेंगे तो इसके लिये, मरेंगे तो इसके लिये।












