हिंदुओं के स्वाभिमान की लडऩे पर मिली जान से मारने की धमकी
गाजियाबाद। डासना मंहत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने स्ट्रीमयार्ड कर माध्यम से मंगलवार को प्रेसवार्ता का आयोजन किया। प्रेसवार्ता के दौरान यति नरसिंहानंद सरस्वती ने बताया कि जिले के एक बड़े सत्ताधारी व्यक्तित्व की मध्यस्थता से डासना जेल में जिहादियो और अपराधियों का एक गठजोड़ हुआ है। जिसने शिष्य बम्हेटा निवासी अनिल यादव की हत्या का दिन निश्चित किया है। इस कार्य के लिये पैसे और हथियार डासना के जिहादियो ने जुटाए हैं और हत्या की जिम्मेदारी जेल में बंद खूंखार अपराधियों ने ली है। इसमें सबसे बड़ी बात ये है कि इस हत्या के लिये सर्वोच्च राष्ट्रवादियों और सर्वोच्च इस्लामिक जिहादियो ने हाथ मिलाया है। हमारी हत्या के बाद पुलिस को मैनेज करने का आश्वासन भी अपराधियों को दिया गया है। आश्वासन दिया गया कि अगर वो हमारी हत्या कर देते हैं तो उनके पुराने मुकदमो में भी उनकी जमानत करा दी जाएगी। इस कार्य के लिये कुछ पुलिस अधिकारी भी लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले ये सूचना उन्हें जेल में बंद एक हिन्दू अपराधी ने भिजवाई थी जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया। लेकिन हाल ही में जेल पुलिस के एक अधिकारी के माध्यम से उन्हें मिली। उन्होंने कहा कि उनके विरुद्ध षड्यंत्र होते ही रहते हैं। पहले भी कई बार उनपर हमला करने का प्रयास हुआ है और उन्हें झूठे मुकदमो में भी फाँसने की कोशिश की गई है। पहले ये मामले साधारण जिहादियों और अपराधियों के द्वारा होते थे परन्तु पिछले कुछ समय से एक बड़े सत्ताधारी नेता के प्रभाव में इसमें पुलिस अधिकारी भी शामिल हुए हैं। तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने अपनी जान पर खेलकर जातीय संघर्ष को समाप्त करवाने वाले साधु के ऊपर बहुत ही कड़ी और गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि जितने गर्व और स्वाभिमान से उन्होंने अपने जीवन को जिया है, उतने ही गर्व और स्वाभिमान से मृत्यु को स्वीकार करेंगे। उनकी हत्या के बाद उनकी कही हुई एक एक बात सच हो जाएगी और हिन्दू समाज उनकी बातों पर सोचने के लिये मजबूर होगा। उनकी हत्या से पूरे हिन्दू समाज का भविष्य तय होगा। उसके बाद इस्लाम का जिहाद सारी दुनिया से समाप्त होकर रहेगा।
उन्होंने कहा कि वो केवल हिन्दू समाज से यह चाहते हैं कि हिन्दू समाज उनकी। लड़ाई को समझे और हमेशा याद रखे कि एक साधु ने सत्ता के गलियारों को ठोकर मारते हुए क्यों इस तरह अपनी मृत्यु को चुना और वो कौन लोग हैं जो उसको मिटाना चाहते थे। यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा इन सब बातों से वो कतई भी विचलित नहीं हैं बल्कि इस बातों से उनका मनोबल और बढ़ गया है। अनिल यादव ने कहा की यति नरसिंहानंद सरस्वती और उनके शिष्यों को डरने का कोई अधिकार नहीं है। यदि मृत्यु से भयभीत होते तो इस लड़ाई में शामिल ही क्यों होते। हमे तो सम्पूर्ण विश्व को ये दिखाना है कि धर्म के लिये हंसते हँसते कैसे बलिदान दिए जाते हैं। हम हर बलिदान के लिये तैयार हैं। बस हिन्दू समाज से यही निवेदन है कि हमारी मौत के बाद लड़ाई को खत्म न होने दे बल्कि और प्रचण्ड करे। इस दौरान यति सेवानंद सरस्वती,सतेंद्र चौहान, शशि चौहान, सतेंद्र त्यागी, कपिल त्यागी, एडवोकेट गौरव चौहान, एडवोकेट लोकेश त्यागी, अक्षय त्यागी,मुकेश त्यागी, संजय त्यागी आदि उपस्थित रहे।















