वायु प्रदूषण से बढ़ रहे सीओपीडी के मरीज

-धूम्रपान एवं वायुप्रदूषण से बचने के लिए रहे जागरूक, आईएमए ने की एडवाइजरी जारी

गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। जो दिवाली से पहले शुरु होकर पूरी सर्दी बना रहता है। कई बार तो गर्मियों में भी प्रदूषण का स्तर घातक होता है। ऐसे में काम से सिलसिले में पब्लिक ट्रांस्पोर्ट या टूव्हीलर से ज्यादा ट्रैवल करने वाले लोगों के फेफड़े प्रदूषण से संक्रमण का शिकार बन रहे हैं। यह बातें बुधवार को राजनगर आईएमए भवन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट और आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आरके गर्ग ने कहीं। उन्होंने कहा कि सीओपीडी से फेफड़ों को होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती, लेकिन इलाज से लक्षणों को नियंत्रित कर और ज्यादा नुकसान होने से बचाया जा सकता है। इस बीमारी की दो स्थितियां हैं। पहली क्रोनिक ब्रोन्काइटिस, जिसमें सांस नली में सूजन आ जाती है और दूसरी वातस्फीती, जिसमें फेफड़े की थैली खराब होने लगती है। दोनों ही हालात में मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है और कभी-कभी यह जानलेवा भी हो सकता है। इसी के कारण फेफड़ों का कैंसर होता है। इन्सान एक सांस में जितनी ऑक्सीजन लेता है, उसे एफईवी1 के रूप में मापा जाता है। एफईवी1 यानी फोर्स्ड एक्सपिरेटरी वॉल्यूम इन 1 सेकंड। जब एक सांस में ली जाने वाली ऑक्सीजन की यह मात्रा सामान्य से 30 फीसदी कम होती है, तो वह सीओपीडी का आखिरी चरण होती है। आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. अभिनव गोयल ने बताया कि पिछले पांच साल के दौरान सीओपीडी के मरीजों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जबकि पिछले साल के मुकाबले इस साल पलमोनरी ओपीडी में 30 प्रतिशत मरीज बढ़े हैं। मरीजों को नेबुलाइजेशन से लेकर अस्पताल में भर्ती करने तक की जरूरत पड़ रही है। पहले यह बीमारी 45 से 50 वर्ष की आयु के बाद होती थी, लेकिन वायु प्रदूषण के कारण अब 30 वर्ष के लोग भी फेफड़ों के संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए अल्केम लैबोरेट्रीज ने पल्मोकेयर डिवीजन शुरू किया है। ऑक्सीजन थेरेपी लो और अपने हेल्थ केयर प्रोवाइडर से मिलकर सलाह लें। जहरीली हवा से दूर रहें। जिन लोगों को अस्थमा या धूल के कणों से एलर्जी है, वे इन जोखिम वाली जगहों से बचें। धूम्रपान न करें। यहां तक कि कोई धूम्रपान कर रहा है तो उससे से भी दूर रहें। स्वस्थ्य जीवन शैली अपनाएं। ताजा हवा में गहरी सांस लेने की आदत डालें। सांस के व्यायाम करें, संतुलित आहार लें। इनहेलर का प्रयोग बिना संकोच करें। सर्दी के दिनों में वायु प्रदूषण बढऩे पर सावधानी बरतें। इस मौके पर आईएमए के मीडिया पर्सन डॉ. नवनीत वर्मा, डॉ संजीव कुमार जैन, अल्पना कंसल, वीके बत्रा आदि मौजूद रहे।