डॉक्टर और पुलिस का सुरक्षा संवाद, महिला सशक्तिकरण का बना मजबूत मंच

-एसीपी उपासना पाण्डेय की पहल पर यशोदा हॉस्पिटल में आयोजित हुआ ‘डॉक्टर-पुलिस संवाद’
-महिला सुरक्षा, आत्मरक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता पर डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों ने साझा किए अनुभव
-मिशन शक्ति टीम ने महिला स्टाफ को दिए सुरक्षा और साइबर जागरूकता के महत्वपूर्ण टिप्स

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। महिला सुरक्षा, जागरूकता और सशक्तिकरण को मजबूत करने की दिशा में कमिश्नरेट गाजियाबाद लगातार नए प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को थाना सिहानीगेट क्षेत्र स्थित यशोदा हॉस्पिटल में सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली नगर उपासना पाण्डेय और मिशन शक्ति टीम द्वारा  ‘डॉक्टर-पुलिस संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला डॉक्टरों, नर्सों और अन्य महिला स्टाफ को महिला सुरक्षा, आत्मरक्षा, साइबर अपराध से बचाव और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। वहीं महिला डॉक्टरों की टीम ने भी महिला पुलिसकर्मियों को महिलाओं के स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन से जुड़े विषयों पर जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस और चिकित्सा क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय और संवाद का सकारात्मक माहौल देखने को मिला। एसीपी उपासना पाण्डेय ने महिला डॉक्टरों और स्टाफ से सीधे संवाद करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि जागरूकता ही महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत है और किसी भी प्रकार की समस्या या उत्पीडऩ की स्थिति में महिलाओं को बिना डरे तुरंत पुलिस से संपर्क करना चाहिए। उपासना पाण्डेय ने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं को आत्मरक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है। आत्मविश्वास और सतर्कता कई बड़ी घटनाओं को रोक सकती है। उन्होंने महिला हेल्पलाइन, साइबर क्राइम हेल्पलाइन और मिशन शक्ति अभियान के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में मिशन शक्ति टीम ने महिलाओं को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, साइबर ठगी, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में जागरूक किया। टीम ने बताया कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और महिलाओं को सोशल मीडिया का उपयोग करते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या ऑनलाइन प्रस्ताव से सावधान रहने की सलाह दी गई।

इस दौरान महिला डॉक्टरों की टीम ने भी महिला पुलिसकर्मियों को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। डॉक्टरों ने महिलाओं में बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या, हार्मोनल समस्याओं और कार्यस्थल के दबाव से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने पुलिसकर्मियों को नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित खानपान और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी। कार्यक्रम में मौजूद महिला स्टाफ ने भी खुलकर अपनी बातें रखीं और पुलिस अधिकारियों से कई सवाल पूछे। एसीपी उपासना पाण्डेय ने सभी सवालों के जवाब देते हुए महिलाओं को भरोसा दिलाया कि पुलिस हमेशा उनकी सुरक्षा और सहायता के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि समाज में विश्वास और सुरक्षा का माहौल तैयार करना भी है। कमिश्नरेट गाजियाबाद में एसीपी उपासना पाण्डेय की कार्यशैली लगातार चर्चा में बनी हुई है।

महिला सुरक्षा और जनसंवाद को लेकर उनकी सक्रियता को लोग सराह रहे हैं। वह लगातार स्कूलों, कॉलेजों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर जाकर महिलाओं और युवतियों को जागरूक करने का कार्य कर रही हैं। उनकी कार्यशैली का सबसे खास पहलू यह माना जाता है कि वह केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि लोगों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझने और समाधान देने का प्रयास करती हैं। यशोदा हॉस्पिटल में आयोजित यह कार्यक्रम भी पुलिस और समाज के बीच बेहतर तालमेल का एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया। कार्यक्रम के अंत में महिला डॉक्टरों और स्टाफ ने पुलिस प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संवाद कार्यक्रम महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी पैदा करते हैं।