लाला लाजपत राय के बलिदान ने स्वतंत्रता संग्राम को दी नई ऊर्जा

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में 156 वें लाला लाजपतराय जन्मोत्सव पर जूम पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और पंजाब के हजारों युवक आंदोलन में कूद पड़े। लाला जी का जन्म 28 जनवरी 1865 को पंजाब के फिरोजपुर जिले के धूदिकी गांव में हुआ था। वे युवा अवस्था में आर्य समाज के आंदोलन से जुड़ गए। लाला लाजपत राय आजादी के मतवाले ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक और महान समाजसेवी भी थे।यही कारण था कि उनके लिए जितना सम्मान गांधीवादियों के दिल में था, उतना ही सम्मान उनके लिए भगतसिंह और चन्द्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों के दिल में भी था। स्वामी दयानन्द सरस्वती के अनुगामी लाला लाजपत राय ने आर्य समाज को पंजाब में लोकप्रिय बनाया। आर्य समाज आंदोलन की पंजाब में उस समय लहर थी। राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने बताया कि केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के 43वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में दिनांक 29,30 व 31 जनवरी 2021 को जूम व फेसबुक पर ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय आर्य बुद्धिजीवी महावेबिनार के रूप में आयोजित किया गया जिसमे 10 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। मुख्य अतिथि कालका पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल डॉ अंजू मेहरोत्रा ने कहा कि लाला लाजपतराय का व्यक्तित्व एक क्रांतिकारी नेता का रहा, अपने तेजस्वी भाषणों से भारत की जनता में अंग्रेजों के विरुद्ध लडऩे के लिए जोश फूंकने वाले लाला लाजपतराय का व्यक्तित्व अंग्रेजी हुकूमत के लिए हमेशा सिरदर्द बना रहा। मुख्य रूप से आचार्य महेन्द्र भाई, आनन्द प्रकाश आर्य, यशोवीर आर्य,डॉ सुषमा आर्या, आरपी सूरी, विकास भाटिया, शिवम मिश्रा, राजेश मेहंदीरत्ता आदि उपस्थित थे।