-नवनियुक्त पुलिस आयुक्त जे. रविंद्र गौड़ के दिशा-निर्देशों से थानों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव, जनता को सीधे राहत
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में बदलाव की एक नई लहर शुरू हो चुकी है। नवनियुक्त पुलिस आयुक्त जे. रविंद्र गौड़ की सख्त और स्पष्ट कार्यशैली का असर अब पूरे जिले में दिखने लगा है। जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने थानों और पुलिस अधिकारियों को जनता के करीब लाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं, जो न सिर्फ पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता लाएंगे, बल्कि आमजन को भी सीधे लाभ पहुंचाएंगे। चार्ज संभालते ही उन्होंने जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए सभी डीसीपी, एसीपी, थाना प्रभारी और चौकी प्रभारियों को हर दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक कार्यालय में रहकर जनसुनवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में शनिवार को डीसीपी सिटी जोन राजेश कुमार सिंह, डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष दशरथ पाटिल और डीसीपी देहात ने अपने-अपने कार्यालयों में आमजन की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही उनका समाधान किया। जिले के सभी थानों और चौकियों पर भी जनसुनवाई का सिलसिला जारी रहा, जिसमें थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज ने जनता की बात सुनी और त्वरित कार्रवाई की। इससे आम लोगों में विश्वास बढ़ा है और पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता का नया अध्याय शुरू हुआ है।
अब थानों में पंजीकृत किसी भी एफआईआर की एक प्रति वादी को उसके घर तक पहुंचाई जाएगी। इससे फरियादियों को एफआईआर की कॉपी के लिए थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पुलिस अब खुद यह जिम्मेदारी निभाएगी। साथ ही यदि किसी थाना क्षेत्र में सट्टा, जुआ, अवैध शराब, अवैध खनन या अवैध भूमि कब्जे जैसी शिकायतें मिलती हैं, तो संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आयुक्त से सीधे मिलकर दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्रों पर अब जांचकर्ता अधिकारी को अनिवार्य रूप से 24 घंटे के भीतर संबंधित फरियादी से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करना होगा, जिससे शिकायत का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा, बीट प्रणाली को और अधिक मजबूत किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में स्थायित्व आए। थानों में आने वाले सभी फरियादियों के साथ मधुर व्यवहार अनिवार्य कर दिया गया है। उन्हें सम्मानपूर्वक बैठाकर पानी पिलाया जाएगा और उनकी समस्या का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगजनों और गरीब व्यक्तियों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विवेचनाओं में अब कोई भी धारा या नाम हटाने अथवा जोडऩे से पहले उच्चाधिकारियों की अनुमति जरूरी होगी। वहीं, पासपोर्ट और चरित्र सत्यापन जैसे सभी कार्य अब पारदर्शिता से होंगे और संबंधित उपनिरीक्षक, मुख्य आरक्षी या आरक्षी मौके पर जाकर ही सत्यापन करेंगे। गुंडा एक्ट या अन्य निरोधात्मक कार्रवाई के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ गलत या तथ्यहीन कार्रवाई न हो। यदि किसी मामले में क्रॉस एफआईआर आती है, तो वह पुलिस उपायुक्त के जांचोपरांत ही दर्ज की जाएगी, जिससे निष्पक्षता बनी रहे। जनप्रतिनिधियों, समाज के सम्भ्रांत नागरिकों और स्थानीय लोगों से बेहतर समन्वय बनाकर उनके द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर पुलिस कार्रवाई करेगी और उनके साथ भी सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा।
थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि वे हर दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक थाने में बैठकर जनसुनवाई करें और समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण समाधान करें। साथ ही विवेचकों के कार्यों की निगरानी कर आवश्यक निर्देश दें। हर सूचना जो एफआईआर योग्य होगी, उस पर एफआईआर पंजीकृत की जाएगी, भले ही वह जीरो एफआईआर ही क्यों न हो। उसे संबंधित थाना या राज्य को उचित रूप से भेजा जाएगा। किसी भी पुलिसकर्मी द्वारा रिश्वत लेने की शिकायत पर भी अब कठोर और निष्कलंक कार्रवाई की जाएगी। जे. रविंद्र गौड़ की यह पहल गाजियाबाद में एक संवेदनशील, जवाबदेह और जनकेन्द्रित पुलिस व्यवस्था की ओर इशारा करती है, जो आने वाले दिनों में आमजन का विश्वास मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

पुलिस आयुक्त गाजियाबाद।
गाजियाबाद पुलिस को जनता के प्रति और अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और संवेदनशील बनाया जा रहा है। हमारा उद्देश्य है कि हर फरियादी को सम्मान मिले, उसकी समस्या का त्वरित और न्यायपूर्ण समाधान हो। एफआईआर की कॉपी अब वादी के घर तक पहुंचाई जाएगी ताकि थानों के अनावश्यक चक्कर खत्म हों। सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनसुनवाई में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अपराध और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। पुलिस की कार्यशैली में यह बदलाव केवल आदेश नहीं, एक सोच का परिवर्तन है, जनता की सेवा के लिए समर्पित और न्याय पर आधारित।
जे. रविंद्र गौड़
पुलिस आयुक्त गाजियाबाद।


















