अपने मन की बात कहने में कभी डरना नहीं चाहिए: राजेन्द्र कुमार तिवारी

-हिन्दी भवन में शिक्षा विभाग का 2047 विज़न डायूमेंट संवाद कार्यक्रम

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। हिन्दी भवन, लोहिया नगर में आयोजित विकसित उत्तर प्रदेश 2047 कार्यक्रम में पूर्व सचिव उत्तर प्रदेश शासन राजेन्द्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, छात्र और छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए लंबी अवधि की योजनाओं पर चर्चा करना और 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित और समर्थ बनाने के लिए सुझाव एकत्रित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ ऊर्जा एवं प्राविधिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव नरेन्द्र भूषण ने किया। उन्होंने उपस्थित सभी अधिकारियों, शिक्षकों और छात्रों को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश के अनुरूप विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लिए सभी विभागों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं और उनके आधार पर शिक्षा विभाग का विज़न डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा। बाल विकास परियोजना अधिकारी स्वाति पाठक ने बाल विकास परियोजनाओं, वाल वाटिका और आंगनबाड़ी केंद्रों की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

उन्होंने तकनीकी और नवाचार आधारित उपायों के साथ डेटा प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता, स्वास्थ्य और पोषण पर आधारित नवाचारों का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही उन्होंने इन पहलुओं के व्यावहारिक कार्यान्वयन के लिए सुझाव भी साझा किए। बेसिक शिक्षा विभाग की रूबी शर्मा ने बच्चों के समग्र विकास, ‘करके सीखनाÓ पद्धति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा, सामुदायिक भागीदारी और शिक्षक प्रशिक्षण को व्यवहारिक एवं संवेदनशील बनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं बल्कि बच्चों में नैतिक मूल्य और समाज के लिए जिम्मेदारी विकसित करना भी होना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा विभाग की तनुजा शर्मा ने 45 मिनट योग और प्रार्थना, आरामदायक विद्यालय गणवेश, सभी विद्यालयों में तकनीकी शिक्षा का अनिवार्य प्रशिक्षण, एआई के उपयोग, स्वच्छ और सुंदर परिसर के निर्माण और रोबोटिक तकनीक के माध्यम से कचरे के पुन: उपयोग जैसे सुझाव साझा किए। उन्होंने कहा कि विकसित विद्यालयों का लक्ष्य संस्कारी, सशक्त और समर्थ छात्र तैयार करना होना चाहिए।

महर्षि दयानंद विद्यालय, गोविंदपुरम की सीमा सेठी ने समान अवसर, प्रौद्योगिकी और संस्कृति युक्त शिक्षा पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने चरणबद्ध योजना के माध्यम से शिक्षा की लंबी अवधि की रूपरेखा दी, जिसमें 2025-2030 के लिए सुदृढ़ नींव और सुधार, 2030-2035 में शिक्षा का विस्तार और समान अवसर, 2035-2040 में नवाचार और अनुसंधान, 2040-2047 में आत्मनिर्भर और अग्रणी शिक्षा प्रणाली और 2047 में उत्तर प्रदेश का सशक्त भविष्य शामिल था। गुरूकुल द स्कूल के गौरव बेदी ने विकसित स्कूल 2047 के लिए तकनीकी उपयोग और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के सुझाव दिए, जबकि निपुण सेल के श्री सौरभ शर्मा ने सुझाव दिया कि जनपद स्तर पर थिंक टैंक बनाया जाए ताकि पाठ्यक्रम की एकरूपता और पोषण आधारित शिक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने उपस्थित शिक्षक और छात्रों से क्तक्र कोड के माध्यम से अपने सुझाव साझा करने का आग्रह किया।

पूर्व सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने कहा कि शिक्षा मानव विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार है और अपने मन की बात कहने में कभी डरना नहीं चाहिए। बच्चों पर हमारा व्यवहार और आदर्श प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में नैतिक मूल्य, कौशल और वैज्ञानिक सोच विकसित करना भी आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि सभी छात्रों में कोई न कोई प्रतिभा अवश्य होती है और सही वातावरण में यह कौशल निखर कर समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी साबित होता है। शिक्षा में मूल्यों का समावेश, ज्ञान का संवर्धन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सीखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि टीम के रूप में कार्य करने और सामूहिक सोच अपनाने से ही उत्तर प्रदेश को विकसित बनाया जा सकता है।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए उपस्थित छात्रों और शिक्षकों को क्तक्र कोड के माध्यम से सुझाव साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि इस संवाद कार्यक्रम से प्राप्त सुझाव न केवल शिक्षा विभाग की नीतियों में सुधार लाएंगे बल्कि 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित और समर्थ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस प्रकार आयोजित कार्यक्रम ने शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक और छात्र-छात्राओं को विकास और नवाचार के मार्ग पर सोचने और अपनी बात कहने का अवसर प्रदान किया। इस संवाद ने स्पष्ट किया कि शिक्षा में सुधार, नवाचार और तकनीकी उपयोग से ही भविष्य का उत्तर प्रदेश समर्थ और विकसित बनाया जा सकता है।