टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे प्राथमिक शिक्षक

-हजारों शिक्षकों का जनसैलाब, पदोन्नति में टीईटी शर्त हटाने की मांग
-भर्ती परीक्षा को कार्यरत शिक्षकों पर थोपना अन्याय: डॉ. अनुज त्यागी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। प्राथमिक शिक्षकों का एक विशाल जनसैलाब बुधवार को उमड़ा, जब उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले हजारों शिक्षक सड़क पर उतरे। शिक्षकों ने मांग उठाई कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को सेवारत शिक्षकों पर लागू न किया जाए। उनका कहना है कि यह परीक्षा केवल नई नियुक्तियों के लिए है, न कि पहले से कार्यरत शिक्षकों की सेवा और पदोन्नति की पात्रता जांचने के लिए।
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि देश के सभी सेवारत प्राथमिक शिक्षकों को सेवा में बने रहने और पदोन्नति पात्र होने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। जिन शिक्षकों की सेवा अवधि मात्र पाँच वर्ष बची है, उन्हें परीक्षा से छूट तो दी गई है, लेकिन पदोन्नति के लिए यह परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है। वहीं बाकी शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करने का आदेश है, अन्यथा उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी।

प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनुज त्यागी ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा एक भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे नियुक्ति के समय ही लिया जाता है। इसे पहले से कार्यरत शिक्षकों की योग्यता पर लागू करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को उस समय की नियमावली और योग्यता के आधार पर सेवा दी गई है, इसलिए अब उनके लिए नई परीक्षा की शर्त थोपना अनुचित है। संघ के जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा ने कहा कि सरकार को इस प्रकरण पर सहानुभूति और व्यवहारिकता के साथ विचार करना चाहिए। लाखों शिक्षकों का भविष्य दांव पर है और उनके हित में शिक्षा अधिकार अधिनियम में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि जिन शिक्षकों को नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता के आधार पर सेवा मिली है, उन्हें न केवल सेवा में सुरक्षित रखा जाए, बल्कि पदोन्नति भी उसी आधार पर दी जानी चाहिए। आज आयोजित इस आंदोलन में शिक्षकों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और बेसिक शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मांग रखी गई कि सेवारत शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की तलवार से बचाते हुए उन्हें टीईटी की बाध्यता से मुक्त किया जाए। आंदोलन के दौरान शिक्षकों का उत्साह देखने लायक था। जिलेभर से आए सैकड़ों शिक्षकों ने प्रदर्शन में भाग लिया।

इस अवसर पर प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनुज त्यागी, जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष आदेश मित्तल, ब्लॉक अध्यक्ष लोनी मनोज डागर, ब्लॉक अध्यक्ष रजापुर मनोज त्यागी, ब्लॉक अध्यक्ष भोजपुर पुष्पेंद्र सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष मुरादनगर अमित यादव, कनक सिंह, लक्ष्मण राठी, दिनेश कुमार, मोहम्मद $गालिब सहित अनेक पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे। गाजियाबाद की इस बड़ी सभा ने साफ कर दिया कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।