ब्लैक फंगस से बचाव के लिए आयुर्वेद में भी उपचार: डॉ. अशोक राणा

-लक्षण वाले मरीजों के लिए आयुष मंत्रालय ने जारी की गाइडलाइन

गाजियाबाद। ब्लैक फंगस को लेकर आयुष मंत्रालय की ओर से भी गाइड लाइन जारी की गई है। इसके साथ ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने आयुर्वेद व होम्योपैथिक चिकित्सकों से चर्चा के बाद इस बीमारी से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी है। क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी डॉ. अशोक राणा ने बताया कि ब्लैक फंगस के उपचार के लिए आयुष मंत्रालय की ओर से गाइड लाइन जारी की गई। थोड़ी सावधानी रखें और आयुर्वेदिक उपचार लें तो ब्लैक फंगस ठीक हो जाती है। सबसे पहली जरूरत इस बात की है कि ब्लैक फंगस को लेकर बहुत पैनिक न हों, डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉ. अशोक राणा ने बताया आयुष मंत्रालय ने ब्लैक फंगल के लक्षण वाले मरीजों को संशमनी वटी, निशामालकी और सुदर्शन घनवटी देने के निर्देश दिए हैं। संशमनी वटी और निशामालकी वटी सुबह और रात को एक-एक गोली और सुदर्शन वटी की सुबह एक व रात में दो-दो गोली लें। इसके साथ ही अणु तेल की एक-एक बूंद नाक के दोनों नथुनों में डालें, नाक को सूखा ना रहने दें। आयुर्वेद डॉक्टर से संपर्क कर दवा की मात्रा और लेने का तरीका जान लें। इसके अलावा डॉक्टर द्वारा बताई गई सावधानी भी कड़ाई के साथ अपनाएं। डॉ. राणा ने बताया कि कोविड के उपचार के दौरान अधिक स्टेरॉयड इस्तेमाल करने वाले इन तीनों आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग करेंगे तो इससे ब्लैक फंगस से बचाव हो सकेगा। इसके अलावा लक्षण वाले उपचाराधीन भी इन दवाओं का प्रयोग करें। दवाओं के साथ त्रिफला और हल्दी उबालकर कुल्ला करने से भी लाभ मिलता है। आयुर्वेद चिकित्सा में दवाओं का सही अनुपात और सही समयावधि का ध्यान रखना खासा जरूरी है। कई दवाओं का अनुपात उपचाराधीन के वजन से तय किया जाता है इसलिए डॉक्टर के निर्देशन में ही दवाएं लें। डॉ. अशोक राणा ने बताया दवा लेने के लिए अलावा पीने के लिए गुनगुने पानी का ही इस्तेमाल करें। हल्का और सुपाच्य भोजन करें। ध्यान रहे कि भोजन हल्का गर्म और ताजा हो। फ्रीज में रखा भोजन लेने से बचें। ताजे फल खाएं। घर से बाहर निकलें तो मास्क लगाकर निकलें। हवादार कमरे में रहें और दिन में दो बार भाप लें।