यशोदा अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी की नई क्रांति, घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण अब होगा और सटीक

-गाजियाबाद में पहली बार अत्याधुनिक ‘क्यूविस रोबोटिक सिस्टम’ से मरीजों को मिलेगी विश्वस्तरीय सुविधा
-कम दर्द, कम रक्तस्राव और तेज रिकवरी के साथ ऑर्थोपेडिक उपचार को मिलेगी नई दिशा
-उन्नत तकनीक के माध्यम से बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं देना हमारा लक्ष्य: डॉ. दिनेश अरोड़ा

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नेहरू नगर स्थित यशोदा अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अत्याधुनिक ‘क्यूविस ऑर्थोपेडिक रोबोटिक-असिस्टेड सर्जिकल सिस्टम’ की शुरुआत की है। 20 मई को अस्पताल में इस नई तकनीक का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही अस्पताल की घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण सेवाएं और अधिक आधुनिक, सुरक्षित एवं प्रभावी हो गई हैं। 350 बेड वाले एनएबीएच और एएसीआई मान्यता प्राप्त इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में आयोजित उद्घाटन समारोह में यशोदा अस्पताल समूह के चेयरमैन डॉ. दिनेश अरोड़ा और प्रबंध निदेशक डॉ. रजत अरोड़ा विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर ऑर्थोपेडिक्स, घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण तथा ट्रॉमा सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम भी मौजूद रही। टीम में डॉ. विपिन कुमार त्यागी, डॉ. अजय पंवार, डॉ. राहुल काकरन और डॉ. दिवास गुप्ता शामिल रहे। चेयरमैन डॉ. दिनेश अरोड़ा ने कहा कि यह अत्याधुनिक रोबोटिक प्रणाली पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा तकनीक उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यशोदा अस्पताल का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक विश्वस्तरीय और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।

वहीं प्रबंध निदेशक डॉ. रजत अरोड़ा ने कहा कि रोबोटिक तकनीक के माध्यम से सर्जरी में अधिक सटीकता और मरीजों की जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत उपचार संभव हो सकेगा। इससे मरीजों को बेहतर सर्जिकल परिणाम और तेजी से स्वस्थ होने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार क्यूविस रोबोटिक सिस्टम ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है। यह प्रणाली विशेष रूप से घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए तैयार की गई है। इसमें 6-एक्सिस रोबोटिक आर्म, ट्रैकिंग सेंसर और ऑटोमैटिक कटिंग तकनीक जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो सर्जरी के दौरान अधिक सटीकता सुनिश्चित करती हैं और मानवीय त्रुटियों की संभावना को बेहद कम कर देती हैं। अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. विपिन कुमार त्यागी ने बताया कि रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के माध्यम से इम्प्लांट प्लानिंग और उसकी सही पोजिशनिंग अधिक सटीक तरीके से की जा सकती है। इससे मरीज की शारीरिक संरचना के अनुसार उपचार संभव हो पाता है।

उन्होंने कहा कि इस तकनीक से कम रक्तस्राव, कम दर्द, छोटे चीरे और ऊतकों को न्यूनतम नुकसान जैसे कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं। उन्होंने बताया कि पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी संक्रमण के खतरे को कम करती है और मरीजों को अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहना पड़ता है। इसके अलावा रिकवरी भी काफी तेज होती है, जिससे मरीज जल्द सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक विशेष रूप से द्विपक्षीय घुटना प्रत्यारोपण, कूल्हा प्रत्यारोपण और रिवीजन सर्जरी के मामलों में अत्यंत उपयोगी साबित होगी। खासकर उन मरीजों के लिए यह बड़ी राहत है, जो सर्जरी के दर्द, लंबे रिकवरी समय और अधिक खर्च को लेकर चिंतित रहते हैं।

रोबोटिक तकनीक में 3डी प्री-सर्जिकल प्लानिंग और सर्जरी के दौरान इम्प्लांट की रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे ऑपरेशन की सफलता दर और कार्यात्मक परिणाम बेहतर होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक ऑर्थोपेडिक उपचार की दिशा पूरी तरह बदल सकती है। यशोदा अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट तकनीक की शुरुआत के साथ अस्पताल अब और अधिक आधुनिक एवं विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए तैयार है। अस्पताल भविष्य में भी चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाकर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।