भूमि विवाद को निपटाने में जुटा ग्रेनो प्राधिकरण
ग्रेटर नोएडा। गंगाजल परियोजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन की दिशा में जल्द कार्रवाई संभव है। भूमि विवाद में यह प्रोजेक्ट अटका पड़ा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। 15 अप्रैल तक भूमि विवाद को निपटाने के लिए शिद्दत से काम चल रहा है। गंगाजल परियोजना का 97 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ग्रेटर नोएडा के नागरिक पिछले लगभग 10 साल से गंगाजल आपूर्ति की प्रतीक्षा में हैं। यह प्रोजेक्ट 85 क्यूसेक का है। जिस पर अगस्त 2010 में काम की शुरुआत की गई थी। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग साढ़े 3 सौ करोड़ रुपये है। गंगनहर में देहरा के पास से इस परियोजना के लिए पानी लिया जाएगा। गंगनहर से ग्रेटर नोएडा तक 23 किमी लंबी पाइप लाइन बिछाने का काम लगभग पूर्ण हो गया है। बिसाहड़ा और पल्ला गांव के समीप किसानों से भूमि का कुछ विवाद चल रहा है। इसके चलते यह परियोजना लेट हो रही है। भूमि विवाद को निपटाने में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण गंभीर नजर आ रहा है। इस मामले में 6 अप्रैल को अदालत में सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि कोर्ट के जरिए यह मामला सुलझ जाएगा। तदुपरांत परियोजना को पूर्ण कर लिया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद सबसे पहले ट्रायल होगा। ट्रायल में यह देखा जाएगा कि पाइप लाइन में कहीं भी लीकेज तो नहीं है। इसके अलावा कुछ और कमियां तो नहीं हैं। ट्रायल में जो कमियां मिलेंगी, उन्हें दूर किया जाएगा। इसके बाद गंगाजल की आपूर्ति आरंभ कर दी जाएगी। पहले चरण में ट्रायल के तौर पर शहर के चुनिंदा क्षेत्रों में आपूर्ति की जाएगी। धीरे-धीरे आपूर्ति का दायरा बढ़ाया जाएगा। देहरा से पेयजल को प्राइमरी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में लाकर शुद्ध किया जाएगा। इसके बाद पल्ला में बने दूसरे वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध किया जाएगा। इसके पश्चात घरों में पानी की आपूर्ति की जाएगी। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नरेंद्र भूषण के मुताबिक गंगाजल परियोजना को पूर्ण करने की कोशिशें चल रही हैं। जल्द इस योजना को पूरा कर लिया जाएगा।
















