जनसंख्या असुंतलन के खिलाफ जिहाद करना है: राष्ट्रीय सैनिक संस्था

-असंतुलन पैदा करती बढ़ती आबादी, बढ़ती आबादी देश की सबसे गंभीर समस्य

उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। भारत में जनसंख्या विस्फोट का असर अब दिखाई देने लगा है। हमारी सुविधाएँ सिकुडऩे लगी हैं और दैनंदिन जीवन मुश्किल में पडऩे लगा है। भारत की राजधानी जनसंख्या विस्फोट से उबलने लगी है। जनसंख्या अनुपात में असंतुलन देश की एकता और सांस्कृतिक पहचान के लिए गंभीर संकट बन सकता है। वर्तमान में उत्तराखंड में हिंदुओं की जनसंख्या वृद्धि दर महज 20 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम और ईसाइयों की इससे ढाई गुना अधिक। मंगलवार को राष्ट्रीय सैनिक संस्था द्वारा जनसंख्या जिहाद पर एक वेबिनार में जगत गुरु शंकराचार्य, नरेंद्र नन्द सरस्वती, राज्य सभा सांसद अनिल अग्रवाल, सूदर्शन टेलीविजन चैनल के संस्थापक सुरेश चौहान, जनसंख्या नियंत्रण रेली के संयोजक मेजर जनरल एसपी सिन्हा, एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय, इंडियन मिलिट्री एकेडमी के पूर्व कमांडेड मेजर जनरल वीएस कार्निक, चेन्नई से अशोक जैन, उच्चतम न्यायलय से एडवोकेट एसएम कृष्णा, पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं सांसद प्रतिनिधि ओपी अग्रवाल, विख्यात योगाचार्य देवेन्द्र हितकारी ने जनसंख्या जिहाद को देश के लिए करोना से भी बड़ा खतरा बताया। राष्ट्रिीय सैनिक संस्था राष्ट्रीय अध्यक्ष वीर चक्र प्राप्त कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी , शिक्षा और स्वास्थ विंग के राष्ट्रिय संयोजक मेजर सुशील गोयल, दिल्ली इकाई की सचिव डॉ. सपना बंसल ने संयुक्त रूप से वेबिनार का संचालन किया। पूजा शर्मा,मोनिका त्यागी एवं अनेको महिलाओ ने भी इस वेबिनार में भाग लिया और बताया की छटी शताब्दी में विश्व में हिन्दुओ की संख्या 33 करोड़ थी और विडंबना देखिये की 1947 में भी ये ही जनसंख्या थी। 2018 में रजिस्ट्रार जनरल और सेन्सस कमिश्नर ने बताया था की देश में सबसे ज्यादा बढती हुई आबादी मुसलमानों की है। जितनी पंचवर्षी योजना चलाई गईं उनमे परिवार नियोजन को हिन्दुओं ने तो वेद वाक्य समझकर माना। लेकिन मुसलमानों ने शरियत का हवाला देकर परिवार नियोजन से मना कर दिया। जनसंख्या नियंत्रण से अधिक चिंता का विषय है, जनसंख्या असंतुलन जमीनी जानकारी के अनुसार भारत की सभी जेलों में 70 फिसदी से अधिक मुसलमान है और अस्पतालों में आधे के करीब मुसलमान है। अर्थात वो सुविधा लेने में और अपराध करने में सबसे आगे हैं। ऊपर से मायामार के रोह्नगियो का जानबूझकर जम्मू में बसाया जाना, उन्हें वोटर कार्ड और आधार कार्ड दिलवाना देश की सुरक्षा को भी खतरा बन गया है। ऐसी स्थिति  में जनसंख्या असंतुलन एक भयंकर खतरा बन चूका है लिहाजा आने वाले सत्र में जनसंख्या नियंत्रण कानून एवं युनिफोर्म सिविल कोड अवश्य ही प्रारित हो। राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल अग्रवाल ने कहा कि जनसंख्या का नियंत्रण नहीं होना कई क्षेत्रों में चुनौती पैदा कर रहा है। सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक क्षेत्र में है। जनसंख्या के बेतहाशा बढऩे से भोजन, वस्त्र, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल आदि क्षेत्रों में संकट पैदा हो गया है। जनसंख्या का दुष्प्रभाव पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। भूमि, वन, पहाड़, खनिज सभी प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बढ़ रहा है। नदियों का जल दूषित हो रहा है। भूमिगत जल दूषित हो रहा है, प्रदूषण बढ़ रहा है। प्राकृतिक असंतुलन बढ़ रहा है।
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