-अस्पताल में नहीं मिला इलाज, वृद्धा ने एम्बुलेंस में तोड़ा दम
-जिले में ऑक्सीजन, बेड, इंजेक्शन का टोटा, 465 कोरोना संक्रमित
-प्रशासन के दावे खोखले, कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत का बढ़ रहा आंकड़ा
-दिल्ली सरकार में सचिव आईएएस एमबी तिवारी की कोरोना से मौत
गाजियाबाद। कोरोना से जिले में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। रोजाना नए मरीजों की बढ़ती तादाद से सरकारी तंत्र हांफ रहा है। मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के दावों की पोल खुल रही है। संसाधनों की इस कमी के कारण ही मरीजों को प्रभावी ढंग से इलाज नहीं हो पा रहा। नतीजा रोजाना लोग दम तोड़ रहे हैं। जिले में हालात यह है कि ऑक्सीजन नहीं मिलने के अलावा अस्पतालों में बेड तक खाली नहीं है, जबकि रेमडिसियर इंजेक्शन भी मरीजों को नहीं मिल पा रहे है। जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय लगातार स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा कर है। मगर जिले में हुई कोरोना संक्रमित वृद्ध महिला और शिक्षक की मौत से सभी व्यवस्था धत्ता साबित हो रही हैं। बुधवार को दिल्ली से गाजियाबाद तक में इलाज नहीं मिलने के चलते 65 वर्षीय वृद्धा सुनीता कक्कड़ ने जिला एमएमजी अस्पताल के बाहर गाड़ी में ही दम तोड़ दिया। बुधवार सुबह उसे एमएमजी अस्पताल लाया गया था। महिला की तबीयत बुरी तरह से खराब हो चुकी थी। सांस लेने में इतनी तकलीफ थी वह निढाल हो जा रही थीं और देखते ही देखते महिला ने दम तोड़ दिया।अपनी बीमार सास को लेकर एक दामाद दिल्ली से लेकर गाजियाबाद तक के अस्पतालों में भटकता रहा। कहीं किसी अस्पताल में इलाज नहीं मिला। वहीं एक महिला अपने तड़पते हुये पति को ऑटो में लेकर भर्ती करने की गुहार लगाती दिखाई दी। अस्पताल के स्टाफ ने ऑक्सीजन न होने की बात कह कर मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया। ऑटो में पति को लेकर दर-दर भटक रही महिला ने बताया कि जहां-जहां बताया गया वहां-वहां गई। लेकिन किसी ने भर्ती नही किया। महिला ने बताया कि वह सुबह से अस्पतालों के चक्कर काट रही है। सन्तोष अस्पताल से लेकर एसके जैन के यहाँ तक चक्कर लगा लिए। सभी ने ऑक्सीजन ख़त्म बता कर भर्ती करने से इंकार कर दिया। महिला की स्थिति को देख कर वहाँ उपस्थित लोगों का दिल पसीज गया। लेकिन सब बेबसी से एक दूसरे को देख कर रह गए।
दरअसल, जिला एमएमजी अस्पताल के बाहर दिल्ली निवासी सुनीता कक्कड़ (65) ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। सुनीता कक्कड़ की तबीयत कई दिनों से खराब थी। परिजन उन्हें दिल्ली के तमाम अस्पतालों में ले कर गए लेकिन जब वहां किसी अस्पताल ने सुनीता को भर्ती नहीं किया तो वह उन्हें लेकर यहां आए थे। मृतका के दामाद संजीव चड्डा ने बताया कि वह दिल्ली से सुनीता को लेकर गाजियाबाद आए थे। दिल्ली में इलाज की कहीं व्यवस्था नहीं मिली। सबसे पहले वह सेक्टर-23 संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल पहुंचे, जहां से उनको जांच के लिए जिला एमएमजी अस्पताल भेज दिया गया। एमएमजी अस्पताल में सुनीता की रिपोर्ट पॉजिटिव आई लेकिन भर्ती किए जाने में हुई देरी से अस्पताल में ही उसकी मौत हो गई। वह काफी देर तक एंबुलेंस में ही तड़पती रहीं,उन्हें सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी लेकिन अस्पताल में भर्ती नहीं हो सकीं। इस पूरी घटना के बाद परिजनों ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, दिल्ली सरकार में सचिव आईएएस एमबी तिवारी का कोरोना से मौत हो गई। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से निधन हो गया। फरीदाबाद के ईसीएचएस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। वह साहिबाबाद की गुलमोहर ग्रीन सोसायटी में रहते थे। एमबी तिवारी करीब दस दिन पहले कोरोना संक्रमित हुए थे। जिसके बाद उनको मोहननगर के नरेंद्र मोहन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। करीब तीन दिन पहले उनको फरीदाबाद के ईसीएचएस अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। परिवार में पत्नी और बेटे भी कोरोना संक्रमित हैं।
ऑक्सीजन नहीं मिलने से शिक्षक ने भी तोड़ा था सड़क पर अपना दम
कोरोना संक्रमण के कहर के चलते ऑक्सीजन नहीं मिल पाने की वजह से रिटायर शिक्षक ने भी सड़़क पर मंगलवार को दम तोड़ दिया था। बेटा अपने सेवानिवृत्त शिक्षक पिता को लेकर दिल्ली से लेकर गाजियाबाद तक के अस्पताल में इलाज के लिए चक्कर काटता रहा। कहीं भी इलाज नहीं मिला। वैशाली सेक्टर एक में बेटे के सामने पिता ने दम तोड़ दिया।कोई राहगीर भी मदद के लिए सामने नहीं आया। वहीं, दूसरी ओर शालीमार गार्डन में एक स्कूल में कोरोना से संक्रमित चौकीदार ने दम तोड़ दिया। चौकीदार की पत्नी 24 घंटे तक साथ रही। जानकारी मिलने पर आनन फानन में प्रशासन ने स्कूल को सील किया।दिल्ली के ईस्ट विनोद नगर में यशवीर सिंह परिवार के साथ रहते हैं। उनके पिता सुर्जन सिंह (65) सेवानिवृत्त शिक्षक थे। कुछ दिन पूर्व सुर्जन सिंह के सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हुई तो परिवार के लोग उन्हें दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में ले गए। जांच में पता चला कि सीने में संक्रमण है। कोरोना संक्रमण के संदेह में उन्हें दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में रेफर कर दिया गया।यशवीर सिंह के साले हरेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि जीटीबी में बीते रविवार को जांच के बाद बताया कि कोरोना संक्रमित नहीं हैं। देर रात सभी लोग घर आ गए।सुर्जन सिंह के शरीर में आक्सीजन की मात्र घटने के साथ सांस लेने में तकलीफ होने लगी। यशवीर और हरेंद्र उन्हें लेकर दिल्ली और गाजियाबाद के कई अस्पतालों में गए। पूरा दिन वह एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में सुर्जन सिंह के इलाज के लिए भटकते रहे। आरोप है कि किसी अस्पताल ने इलाज नहीं किया। शाम चार बजे यशवीर अपने पिता को एक अन्य अस्पताल ले जा रहे थे। तभी वैशाली सेक्टर एक में उनके पिता ने आक्सीजन न मिलने से दम तोड़ दिया। जिले में कोरोना संक्रमित होने के बाद इलाज के अभाव में लोग दम तोड़ रहे है। वहीं, कोरोना संक्रमित की संख्या भी रोजाना बढ़ रही है। बुधवार को जिले में 465 कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हुई। सीएमओ डॉ.एनके गुप्ता ने बताया कि बुधवार को जिले में कोरोना संक्रमित 465 मरीज मिले। कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा अब 32,385 तक पहुंच गया। वहीं,208 मरीजों के ठीक होने पर डिस्चार्ज किया गया। बुधवार को कोरेाना सक्रमित 8 मरीजों की मौत हुई है। मृतकों का आंकड़ा अब 117 तक पहुंच गया है। जबकि कोरोना के सक्रिय 3976 केस है। कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा फिलहाल कम नहीं हो रहा है।















