गाजियाबाद। इंजीनियर अतुल सिंह और सत्यांशु सिंह ने कोविड महामारी के दौरान दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा की झुग्गी बस्तियों को सेनेटाइज करने का बीड़ा उठाया है। एक साल से भी अधिक समय से पूरा विश्व कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है। इस महामारी ने हमारी सामान्य दिनचर्या में स्वच्छता के महत्व को पुन: स्थापित किया है। व्यक्तिगत साफ-सफाई और सेनेटाइज़ेशन स्वस्थ्य रहने और संक्रमणों से बचने में मुख्य भूमिका निभाती है। इस स्वास्थ्य विपत्ति ने लोगों को साफ-सफाई और सेनेटाइज़ेशन के महत्व के प्रति जागरूक किया है। कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठन झुग्गी बस्तियों और मोहल्लों में सेनेटाइजेशन का काम कर रहे हैं, ताकि लोगों को संक्रमण से बचाया जा सके। देश के अलग-अलग भागों में कई युवा भी सामाजिक रूप से सक्रिय हैं और इस महामारी के दौरान लोगों को उनके परिवेश को सेनेटाइज़ करने में सहायता कर रहे हैं। ऐसे ही दो उच्च शिक्षित युवा अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए झुग्गी बस्तियों को सेनेटाइज करने का काम कर रहे हैं। इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज के दो इंजीनियर अतुल सिंह और सत्यांशु सिंह ने कोविड महामारी के दौरान दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा की झुग्गी बस्तियों को सेनेटाइज़ करने का बीड़ा उठाया है। पिछले एक सप्ताह में इन्होंने 600 से अधिक झोपडिय़ों को सेनेटाइज़ किया। ये झुग्गियां नोएडा के सेक्टर-64, 66 और 70 में स्थित हैं। गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के पास वंसुधरा के सेक्टर-8 और 10 के जैन मंदिर के आसपास की झोपडिय़ों को सेनेटाइज़ करने का काम भी इन युवाओं ने पिछले दिनों किया है। इन्होंने इन क्षेत्रों की सभी झुग्गियों को सेनेटाइज़ करने का लक्ष्य रखा है।
















