– वरिष्ठ समाजसेवी ने कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के लिए सभी को बताया जिम्मेदार
-जनता और अफसरों की लापरवाही और पक्ष-विपक्ष की राजनीतिक खींचतान से बिगड़े हालात
-समय रहते उठाए होते सही कदम तो आज यह स्थिति ना होती
गाजियाबाद। इस वर्ष के शुरूआती तीन महीनों में कोरोना संक्रमण की दर उतनी तेज नहीं थी कि उससे डरा जाए। लेकिन अप्रैल माह से कोरोना के ग्राफ में जो तेजी देखने को मिली वह अभूतपूर्व थी। कोई भी यह नहीं सोच रहा था कि देश में एक दिन में 4 लाख तक कोरोना केस देखने को मिलेंगे। तेजी से बढते आकंडों ने जनता में घबराहट पैदा कर दी। जिसके बाद इस देश ने कई ऐसे वाक्य अनुभव किए जो पहले कभी नहीं हुए थे। लेकिन अचानक कोरोना संक्रमण के बेतहाशा बढने के पीछे आखिर क्या कारण थे। इस सवाल का उत्तर सभी अपने-अपने ढंग से देते हैं। वरिष्ठ समाजसेवी और सोशल चौकीदार संस्थापक केके शर्मा ने इस स्थिति के लिए सभी को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि हम सब सिर्फ सरकार को कोसकर रह जाते है। लेकिन कोरोना तेजी से फैलने के कारणों में हम सभी बराबर के जिम्मेदार हैं।
जनता कम जिम्मेदार नहीं
केके शर्मा ने कोरोना के बढते प्रकोप के लिए जनता की जवाबदेही तय करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि महामारी की पहली लहर के बाद प्रधानमंत्री मोदी, डॉक्टर और मीडिया चिल्ला-चिल्ला कर मास्क और दो गज की दूरी के नियम का पालन करने को कह रहे थे। लेकिन सच यह है कि हमने डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की बात नही मानी और जमकर लापरवाही की। इतना ही नही, जब कोरोना फैलने लगा तब भी हम मजाक बनाते रहे। जिसके कारण हुई लापरवाही के चलते महामारी तेजी से फैल गई। विडम्बना यह हुई कि अभी भी बाजार खुलते भीड़ हो जाती है और बहुत से बेशर्म लोग अभी भी मास्क नही लगाने से बचते है। कोरोना से ज्यादा खतरनाक लापरवाही साबित हुई है। ज्यादातर मौत में पाया गया है कि कहीं न कहीं मरीज या स्वजन द्वारा लापरवाही बरती गई है।
नकारात्मक राजनीति से वैक्सीनेशन हुई प्रभावित
उन्होंने विपक्ष पर नकारात्मक राजनीति कर वैक्सीनेशन को प्रभावित करने का आरोप लगया। उन्होंने कहा कि देश की फार्मा कंपनियों ने बहुते तेजी से वैक्सीन विकसित की। लेकिन विपक्षी नेताओं ने वैक्सीन को लेकर भ्रम फैलाया। जिससे जनता के बीच वैक्सीनेशन को लेकर संशय पैदा हुआ। वैक्सीन खराब होने के डर से फार्मा कंपनियों ने उत्पादन को कम कर दिया। जिसकी वजह से कम लोगों को वैक्सीन लग सकी। वरना अभी तक देश में 40 करोड़ लोगों को वैक्सीन लग चुकी होती। जो राजनैतिक दल वैक्सीन को खराब बता रहे थे वो बड़ी बेशर्मी से अब वैक्सीन की कमी का रोना रो रहे है।
सरकारें माने अपनी विफलता
केके शर्मा ने सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारें भी कोरोना के खतरे को भांपने में विफल रहीं। जब महाराष्ट्र में तेजी से कोरोना पैर पसार रहा था, उसी वक्त सख्त कदम उठाए जाते तो हालात इतने भयावह नहीं होते। हालांकि बंगाल के चुनावों को इसके लिए पूरी तरह से दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मगर यूपी में पंचायत चुनाव रोके जा सकते थे। जो रोका नही गया और उसका परिणाम सबके सामने आया।
लापरवाह अफसरशाही का खामियाजा जनता ने भुगता
अफसरशाही को भी केके शर्मा ने आड़े हाथों लेते हुए, अपने काम को पूरी निष्ठा से ना करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अफसर सरकारों को झूठी रिपोर्ट बनाकर स्थिति को नियंत्रण में बताते रहे। जबकि हालात लगातार बिगड़ रहे थे। यदि अफसर सरकारों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराते तो आज जैसे हालातों का सामना नहीं करना पड़ता। हैरत की बात है कि अफसर अभी भी झूठी रिपोर्ट बना रहे हैं। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
















