कोरोना काल में अस्पतालों ने किया खेल, IAS महेंद्र सिंह तंवर करेंगे जांच

– कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के नाम पर मनमाना शुल्क वसूलने का मामला

– नगरायुक्त के नेतृत्व में गठित कमेटी करेगी निजी अस्पतालों की जांच

 

गाजियाबाद। कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के नाम पर मनमाना शुल्क वसूलने वाले निजी अस्पतालों पर अब शिकंजा कसने जा रहा है। नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर के नेतृत्व में गठित कमेटी इन अस्पतालों की जांच करेगी। यह कमेटी 15 दिनों में जांच पूरी कर डीएम को उपलब्ध कराएगी। बाद में जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय यह रिपोर्ट उप्र शासन को भेजेंगे। बता दें कि गत एक जून को जनपद के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने कलेक्ट्रेट सभागार में कोरोना संक्रमण को लेकर बैठक की थी। इस दौरान विधायकों ने निजी अस्पतालों की कारगुजारी से उन्हें अवगत कराया था। इस पर जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने पुरानी कमेटी में बदलाव कराया है। कोरोना संक्रमण के पीक पर होने के दौरान प्राइवेट अस्पतालों ने शासन द्वारा तय की गई कीमतों से कई गुना ज्यादा बिल मरीजों से वसूला। इसकी शहर में लगातार शिकायतें मिलने के बाद अपर नगर मजिस्ट्रेट सेकेंड विनय कुमार सिंह, लेखाधिकारी अभिषेक और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार की एक जांच कमेटी बनाई गई थी। जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने डीएम अजय शंकर पांडेय को तत्काल प्रभाव से कमेटी में परिवर्तन कर जांच कराने के निर्देश दिए। पहले जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करुणेश का नाम आया,लेकिन बाद में नगर आयुक्त के नाम पर सहमति बनी। यह जांच कमेटी सभी कोविड अस्पतालों के कम से कम 10 फीसदी बिलों की रैंडम जांच करेगी। विशेष तौर पर किसी एक दिन में काटे गए सबसे अधिक रकम के बिलों की जांच की जाएगी।विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों ने पूर्व में गठित कमेटी में जांच अधिकारी एसडीएम विनय सिंह के नाम पर असहमति जताई थी। विधायकों का कहना था कि पीसीएस अधिकारी के नेतृत्व में स्पष्ट और निष्पक्ष जांच नहीं हो सकेगी। बड़े अस्पताल प्रबंधन पीसीएस अधिकारी पर दबाव बनाकर निष्पक्ष जांच में बाधक बन सकते हैं। ऐसे में यह निष्पक्ष जांच आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में होनी चाहिए,ताकि रसूखदार अस्पतालों के संचालक उन पर दबाव न बना पाएं। इसके बाद जिले के प्रभारी मंत्री ने तत्काल पूर्व कमेटी में बदलाव कराकर नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर के नेतृत्व में कमेटी बनवा दी हैं। शहर में ऑक्सीजन सिलेंडरों की मारामारी के चलते इससे निपटने के लिए पिछले महीने में नगर आयुक्त को ही ऑक्सीजन आपूर्ति का नोडल अधिकारी बनाया गया था। जिसके सुखद परिणाम सामने आए है। निजी अस्पतालों ने कोरोना संकमण के इलाज के लिए 30 हजार से लेकर 80 हजार रुपए प्रतिदिन मरीजों से रुपए वसूले गए। पीपीई किट की कीमत भी प्रत्येक मरीज के बिल में जोड़ी गई। कमेटी दवाओं की कीमतों की भी जांच करेगी।