यमुना प्राधिकरण ने विकसित किए 3 हजार से ज्यादा भूखंड
ग्रेटर नोएडा। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से प्रभावित 3 हजार से ज्यादा परिवारों की टेंशन दूर हो गई है। इन परिवारों को भूखंड आवंटित हो गए हैं। जेवर बांगर में उन्हें यह भूखंड उपलब्ध कराए गए हैं। इन परिवारों को 2 माह के भीतर जेवर बांगर में स्थानांतरित होना पड़ेगा। जेवर बांगर में सौ से ज्यादा भवनों का निर्माण भी आरंभ कर दिया गया है। वहां आवासीय सेक्टर सरीखी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ऐसे में संबंधित परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना नहीं पड़ेगा। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के क्रियान्वयन में आड़े आ रहे 3003 परिवारों को चिन्हित किया गया था। जिन्हें शिफ्ट किए बगैर योजना को आगे बढ़ाना संभव नहीं था। ऐसे में सरकारी तंत्र ने इन परिवारों को शिफ्ट करने की योजना बनाई थी। एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के पहले चरण के लिए 1334 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। इस प्रोजेक्ट में 3003 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। इससे नंगला गणेशी, नंगला शरीफ, नंगला फूलखां, नंगला छीतर, किशोरपुर, रोही और दयानतपुर खेड़ा की आबादी प्रभावित हुई है। जेवर बांगर में प्रत्येक गांव के लिए अलग से ब्लॉक विकसित किया गया है। जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को भूखंड आवंटित करने की प्रक्रिया पूर्ण कर ली है। अंतिम चरण में दयानतपुर खेड़ा के प्रभावित परिवारों को 243 भूखंडों का आवंटन किया गया है। जेवर बांगर में लगभग 48 हेक्टेयर भूमि पर भूखंड विकसित किए गए हैं। जानकारी के अनुसार जेवर बांगर में 110 से ज्यादा परिवारों ने निर्माण कार्य आरंभ करा दिया है। ज्यादातर परिवार पुराने मकानों से जो सामग्री ठीक है, उसे यहां पर ला रहे हैं। उसका उपयोग निर्माण कार्य में हो रहा है। यमुना प्राधिकरण को उम्मीद है कि निर्धारित अवधि पर निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। वहां से सभी परिवारों के शिफ्ट होने के बाद भूमि एयरपोर्ट की विकासकर्ता कंपनी को सौंप दी जाएगी। जेवर बांगर में सेक्टर जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। वहां पर सीवर एवं पेयजल लाइन, सड़क, स्कूल, अस्पताल, सामुदायिक केंद्र, विद्युत सब स्टेशन आदि बनाया गया है। यह कार्य यमुना प्राधिकरण ने किया है। उप्र शासन ने भूखंडों के विकास के लिए यमुना प्राधिकरण को एजेंसी निर्धारित किया था। उधर, यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डॉ. अरुणवीर सिंह का कहना है कि जेवर बांगर में भूखंडों के विकास का जिम्मा यमुना प्राधिकरण को सौंपा गया है। विभाग ने भूखंड विकसित कर जिला प्रशासन को सौंप दिए हैं। प्रशासनिक स्तर से भूखंडों का आवंटन किया गया है।
















