गाजियाबाद/फरीदाबाद। क्या आपने खाना खा लिया है, नहीं तो ये लो..। यह किसी फिल्म का डायलॉग या किसी कविता की पंक्ति नहीं, बल्कि लॉकडाउन की इस स्थिति में उन मददगारों के मुंह से सुनने को मिल रहा है, जो असहाय और जरूरतमंदों की निस्वार्थ रूप से सेवा में लगे हैं। काफी समय से सूखा राशन का इंतजार कर रहे जरूरतमंदों की मुराद रविवार को पूरी हो गई। कोरोना महामारी के दूसरी लहर के चलते लगे लॉकडाउन में लोग जहां अपने घरों में कैद हो गये है। आज भी कुछ लोगों के सामने रोजगार एवं खाने का संकट है। जिसके लिए न सरकार कोई उचित कदम उठा रही है और ना ही प्रशासन। ऐसे लोगों की मदद के लिए पिछले लॉकडाउन की तरह इस बार फिर एक नई राह पगडंडीया संगठन मसीहा के रूप बनकर उभरी है।
संगठन के पदाधिकारी अपने जीवन को दांव पर लगाकर निस्वार्थ भाव से जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहे हैं। फरीदाबाद टीम की प्रदेश अध्यक्ष पारुल (विशी) सिंह ने कहा लॉकडाउन के दौरान कोई भूखा न रहे इसके लिए संगठन के पदाधिकारी बढचढ कर मदद के लिए आगे है। संगठन की इस पहल को देखते हुए अन्य संस्थाए भी अब मदद के लिए आगे आ रही है। उन्होने कहा जरूरतमंदों की सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। एक नई राह पगडंडीया संगठन समाज के लोग जरूरतमंदों की सेवा करने में सबसे आगे है। ऐसे में सबका यह दायित्व है कि कोई गरीब भूखे न सोए। इस दौरान सुनीता सिंह, मनीषा, सुनील कुमार ने झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले जरूरतमंद लोगों एवं सोसायटी के 18 गार्डस को कच्चे राशन का वितरण किया। अनुज शर्मा, शैलजा, आरती,ज्योति, मीरा इत्यादि सभी लोगों ने विशेष सहयोग किया।
















