Rapid Rail – गाजियाबाद में आज राह में बाधक बनी दुकानें होंगी ध्वस्त

Rapid Rail – गाजियाबाद। दिल्ली के सरायकाले खां से मेरठ के पल्लवपुरम तक प्रस्तावित हाई स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट में दिल्ली-मेरठ हाइवे पर दुहाई के आसपास निर्माण में बाधा बन रहीं 80 दुकानें अब जल्द हटाई जाएगी। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने इन दुकानों को हटाने के लिए इनकी मौके पर जाकर निरीक्षण किया है। मौके पर पाया गया कृषि भू-उपयोग की जमीन पर लोगों द्वारा अवैध रूप से दुकानों का निर्माण कर व्यावसायिक गतिविधि संचालित कर रहे हैं। जीडीए प्रवर्तन जोन-2 के प्रभारी ओएसडी संजय कुमार ने बताया कि दिल्ली-मेरठ हाइवे से सटे दुहाई गांव के आसपास Rapid Rail प्रोजेक्ट में 80 दुकानें बाधा बन रही हैं। मुरादनगर महायोजना-2021 के तहत दिल्ली-मेरठ रोड 60 मीटर चौड़ा होना प्रस्तावित हैं। सड़क के बीच से दोनों साइड में 30-30 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जानी है। ऐसे में यह दुकानें Rapid Rail व सड़क चौड़ीकरण करने के लिए बाधित कर रही हैं।

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ओएसडी ने बताया कि प्रवर्तन जोन के सहायक अभियंता एवं अवर अभियंता टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण कर लिया है। जांच के दौरान कृषि भूमि होने के बाद भू-उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन पाया गया। लोगों से निर्माण करने की स्वीकृति के दस्तावेज मांगे गए तो वह नहीं दिखा पाए। इस मामले में बृजेश शर्मा,अर्पित अग्रवाल,जयप्रकाश शर्मा, कृष्णा भट्टा, विनोद मेहरा, अमित चौधरी, अजय चौधरी, अमरपाल, मजमूल,सागर यादव, प्रदीप कुमार, सतपाल चौधरी, शिवशंकर शर्मा समेत कुल 13 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी को जारी किए गए नोटिस में एक सप्ताह के भीतर निर्माण की स्वीकृति के दस्तावेज जीडीए में पेश करने के लिए कहा गया है। अगर निर्धारित समय अवधि में नोटिस का जवाब नहीं दिया गया और दस्तावेज पेश न करने पर उपरोक्त लोगों के निर्माण को अवैध मानकर ध्वस्त किया जाएगा। इस तरह भू-उपयोग के विपरीत गतिविधियां संचालित करने वाले अन्य लोगों को भी जल्द ही नोटिस जारी किया जाएगा।जीडीए ओएसडी संजय कुमार ने बताया कि Rapid Rail प्रोजेक्ट के तहत दुहाई में प्रस्तावित रेल के स्टेशन के पास डिपो समेत अन्य निर्माण किया जाना है। यहां पर 80 दुकानें बाधा बनी हुई हैं। नए भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत प्रशासन इन्हें सर्किल रेट का दोगुना मुआवजा देकर जमीन लेने को तैयार है, लेकिन यह लोग उक्त जमीन को व्यावसायिक भू-उपयोग की बताकर सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मांग रहे हैं। इसी को लेकर विवाद है जबकि सरकारी दस्तावेजों में उक्त जमीन का भू-उपयोग कृषि है। उपरोक्त लोग अवैध रूप से दुकान बनाकर भू-उपयोग के विपरीत गतिविधि संचालित कर रहे हैं।