नगर पालिका परिषद: दाल में कुछ काला या पूरी दाल ही काली है ?

-चेयरमैन की प्रतिक्रिया व कार्यवाही का लोगों को है इंतजार

अनिल तोमर (उदय भूमि ब्यूरो) पिलखुवा। गत दिनों नगर पालिका परिषद की चेयरमैन गीता गोयल के ससुर के दो मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाने का मामला प्रकाश में आया था। जिसको लेकर पूरे शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग अपने अपने तरीके से कयास लगा रहे हैं कि इस प्रकरण में वास्तविकता क्या हो सकती है? लेकिन यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि इन मृत्यु प्रमाण पत्रों के जारी कराने के पीछे कोई षड्यंत्र है अथवा नगर पालिका परिषद की चेयरमैन गीता गोयल ने किसी अन्य लाभ के लिए अपने पद के दबाव में नगर पालिका परिषद से यह प्रमाण पत्र जारी करा लिए हैं। हालांकि नगर पालिका परिषद की चेयरमैन गीता गोयल के पति ने स्पष्ट किया कि यह उनके पीछे कोई साजिश है। उनके मुताबिक उनके पिताजी सुरेश चंद्र उर्फ कालूराम की मृत्यु 2011 मे हुई थी। बाद के सर्टिफिकेट के बारे में तो उन्हें ही अन्य लोगों से पता चला है। अब सवाल उठता है कि क्या परिषद की चेयरमैन नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों अधिकारियों पर इस प्रकरण में कोई कार्यवाही करेंगी? उस षड्यंत्र की जांच पड़ताल कराएंगी? जिसके तहत यह दूसरा सर्टिफिकेट बन गया। नगरवासी तथा कुछ वार्ड सभासद में यह चर्चा है कि जब नगर पालिका परिषद की चेयरमैन के ससुर के ही कागजात दो अलग-अलग बन सकते हैं तो नगर पालिका परिषद में आम जनमानस से संबंधित जुड़े कागजात में कोई घपला तो बहुत ही आसान होगा। इससे परिषद की साख भी धूमिल हो जाएगी। जो चिंता का विषय है।

फिलहाल गौरव चौहान ने बताया की उन्होंने जिलाधिकारी को जांच के लिए दो मृत्यु प्रमाण पत्र तथा गढ़ नगरपालिका से श्मशान घाट मे अंतिम संस्कार का रमन्ना की कॉपी, तथा 27/5/2019 को अधिशासी अधिकारी को  दिए गए प्रार्थना पत्र की कॉपी उसके साथ उसी दिन गाजियाबाद नोटरी से 20 रूपये के स्टांप पर बनवाया हुआ शपथ पत्र जोकि सुनील कुमार पुत्र स्वर्गीय सुरेश चन्द्र  उफऱ् कालूराम मोहल्ला मढैया जाटान गांधी रोड पिलखुवा के नाम से बने हैं। की प्रतिलिपि साक्ष्य के रूप में सौंपी है तथा जांच की मांग की है।
अब प्रश्न उठ रहे हैं की यदि यह कार्य परिषद की चेयरमैन के दबाव में नहीं हुआ है तो उन्होंने इस बाबत परिषद के कर्मचारियों अधिकारियों को तलब कर प्रकरण की सतह में जाने की क्या कोशिश की? तथा अपने साथ ही हुए इस षड्यंत्र की सूचना की प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं कराई तथा इस बाबत जिलाधिकारी को इस संबंध में जांच के लिए अवगत क्यों नहीं कराया? पिछले दिनों नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों एवं अधिकारियों की रिश्वतखोरी एवं भ्रष्टाचार का मामला सुर्खियों में रहा था। जिससे नगर पालिका परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं?। लोगों का कहना है की नगर पालिका परिषद में जरूर दाल में कुछ काला  है। गौरव चौहान ने कहा कि यदि नगर पालिका परिषद एवं चेयरमैन से संबंधित पहलुओं की ईमानदारी से जांच हो जाए तो केवल दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली मिल जाने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।