- प्रीमियम रिटेल वेंड का तेजी से हुआ विस्तार, हर वर्ष करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व पहुंच रहा सरकारी खजाने में
- 134 स्थायी बार लाइसेंस और ऑकेजनल परमिट बने आय का मजबूत आधार, राजधानी में लगातार बढ़ रहा आबकारी राजस्व
- अवैध शराब कारोबारियों पर पैनी नजर, बिना स्कैन बिक्री, नाबालिगों को शराब और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
- करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में 15 आबकारी निरीक्षकों की टीम दिन-रात मैदान में, प्रवर्तन और राजस्व दोनों मोर्चों पर बना रही नई पहचान
उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज केवल प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र ही नहीं, बल्कि राजस्व सृजन के क्षेत्र में भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रदेश सरकार के लिए अधिक से अधिक राजस्व जुटाने की दिशा में कई विभाग अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन आबकारी विभाग उन चुनिंदा विभागों में शामिल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतिदिन करोड़ों रुपये का राजस्व सरकारी खजाने में जमा कराकर प्रदेश की आर्थिक मजबूती का मजबूत आधार बन रहा है। स्टांप एवं पंजीयन विभाग के बाद आबकारी विभाग प्रदेश सरकार के सबसे बड़े राजस्व स्रोतों में गिना जाता है। राजधानी लखनऊ में जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में विभाग ने राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शिता, अनुशासन और प्रभावी प्रवर्तन की ऐसी कार्यशैली विकसित की है, जिसकी चर्चा विभागीय गलियारों से लेकर शराब कारोबार से जुड़े लाइसेंसधारकों तक में देखने को मिल रही है। करुणेन्द्र सिंह ने कार्यभार संभालने के बाद केवल पुराने ढांचे को बनाए रखने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि नई संभावनाओं को तलाशते हुए राजस्व बढ़ाने के कई प्रभावी कदम उठाए। इसी रणनीति का परिणाम है कि लखनऊ के आधुनिक शॉपिंग मॉल्स में संचालित प्रीमियम रिटेल वेंड (पीआरवी) की संख्या लगातार बढ़ी है। जहां पहले शहर में लगभग 14 से 15 पीआरवी संचालित थीं, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 29 हो चुकी है।
इन प्रीमियम रिटेल वेंड के माध्यम से विभाग को प्रतिवर्ष लगभग 7 करोड़ 25 लाख रुपये का अतिरिक्त लाइसेंस शुल्क प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त इन दुकानों पर होने वाली शराब बिक्री से मिलने वाला आबकारी राजस्व अलग से सरकारी खजाने में पहुंचता है, जिससे राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। केवल पीआरवी तक ही विभाग की उपलब्धियां सीमित नहीं हैं। वर्तमान में जिले में 134 स्थायी बार लाइसेंस संचालित हैं। इन लाइसेंसों के माध्यम से प्रत्येक माह लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व सरकार को प्राप्त होता है। वहीं इन बारों में बिकने वाली शराब पर मिलने वाला आबकारी शुल्क इससे अलग है। इसके अतिरिक्त विभिन्न आयोजनों के लिए जारी किए जाने वाले ऑकेजनल बार लाइसेंस भी राजस्व वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग ने राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ लाइसेंस व्यवस्था को भी व्यवस्थित और प्रभावी बनाया है। राजस्व बढ़ाने की इस पूरी प्रक्रिया के साथ विभाग ने कानून व्यवस्था और प्रवर्तन को भी समान प्राथमिकता दी है।
जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की कार्यशैली का सबसे मजबूत पक्ष यह माना जाता है कि वह नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करते। अवैध शराब के निर्माण, तस्करी और बिक्री में शामिल माफिया लगातार विभाग की निगरानी में रहते हैं। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलते ही टीमें तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करती हैं। यही कारण है कि अवैध कारोबारियों में विभाग का स्पष्ट भय बना हुआ है। लाइसेंसी दुकानों पर भी विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक शराब की बोतल बिना क्यूआर कोड स्कैन किए न बेची जाए, ग्राहकों के साथ शालीन व्यवहार किया जाए तथा 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को शराब की बिक्री न हो। दुकानों के बाहर अवैध रूप से शराब बेचने वालों के विरुद्ध भी समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। इन अभियानों का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पारदर्शी और जिम्मेदार आबकारी व्यवस्था स्थापित करना भी है।
इन उपलब्धियों के पीछे केवल जिला आबकारी अधिकारी का नेतृत्व ही नहीं, बल्कि उनकी पूरी टीम की सक्रिय भूमिका भी दिखाई देती है। सीमित संसाधनों के बावजूद 15 आबकारी निरीक्षकों की टीम राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाकर विभाग की कार्यक्षमता को नई पहचान दे रही है। टीम में राहुल सिंह, विवेक सिंह, अरविंद बघेल, रिचा सिंह, रेखा श्रीवास्तव, अभिषेक सिंह, कौशलेन्द्र रावत, प्रदीप शुक्ला, अखिलेश चौधरी, नेहा सिंह, मोनिका यादव, रामश्याम त्रिपाठी, शिखर मल्ल, विजय राठी और संजय पाण्डेय शामिल हैं। सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण, लाइसेंस सत्यापन, प्रवर्तन कार्रवाई तथा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
राजधानी जैसे संवेदनशील जिले में सीमित मानव संसाधनों के बावजूद प्रभावी राजस्व संग्रह, आधुनिक लाइसेंस व्यवस्था का विस्तार, अवैध कारोबार पर सख्त नियंत्रण और पारदर्शी कार्यप्रणाली यह दर्शाती है कि मजबूत नेतृत्व और सक्रिय टीम किसी भी विभाग की सबसे बड़ी ताकत होती है। करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में आबकारी विभाग ने यह साबित किया है कि यदि योजनाबद्ध रणनीति, ईमानदार निगरानी और समर्पित टीमवर्क साथ हो तो सीमित संसाधनों में भी उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। यही कारण है कि लखनऊ का आबकारी विभाग आज राजस्व वृद्धि और प्रभावी प्रवर्तन-दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान स्थापित करता दिखाई दे रहा है।
राजस्व वृद्धि हमारे कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन उससे भी बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की आबकारी नीति का पूरी पारदर्शिता और सख्ती के साथ पालन कराना है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक लाइसेंसी प्रतिष्ठान निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो, उपभोक्ताओं के अधिकार सुरक्षित रहें और अवैध शराब के निर्माण, तस्करी एवं बिक्री में शामिल किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए। हमारी पूरी टीम लगातार फील्ड में सक्रिय रहकर प्रवर्तन, निरीक्षण और जनहित से जुड़े सभी पहलुओं पर समान रूप से कार्य कर रही है। भविष्य में भी राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ कानून का कड़ाई से अनुपालन और पारदर्शी व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
-करुणेन्द्र सिंह
जिला आबकारी अधिकारी
लखनऊ।
















