राहुल सिंह (उदय भूमि ब्यूरो)
धौलाना।
सोलह साल पहले तत्कालीन प्रदेश सरकार ने धौलाना ब्लॉक के सात गांव देहरा, जादोपुर, ककराना, धौलाना, नंदलालपुर-बहरमपुर, कंदौला की 2500 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर प्रदेश में बिजली का संकट हराने का जो सपना देखा। वह भले पूरा न हो सका, मगर उक्त अधिग्रहीत भूमि पर भूमाफिया मंडली की नजर पड चुकी है। रिलायंस पावर प्रोजेक्ट प्रभावित किसानों की जमीन बचाने और उनके हितों के लिए डेढ दशक से संघर्षरत बझैडा आंदोलन के सर्वेसर्वा व महाराणा संग्राम सिंह किसान कल्याण समिति अध्यक्ष मंगू सिंह राणा व महासचिव युद्धिष्ठिर सिसोदिया ने बताया कि जिस जमीन को बचाने की जद्दोजहद में किसानों ने सरकारों से लड़ाई लडी। उसी जमीन को अब भूमाफियाओं से बचाने के लिए किसान बिगुल बजा चुके हैं। इस संदर्भ में मामला मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचाया जा चुका है। अब नीचे से उपर तक खलबली मची है। आखिर किस की शह पर औने पौने दामों में उक्त भूमि का इकरारनामा कर नया खेल-खेेेेला जा रहा है। समिति अध्यक्ष मंगू सिंह राणा का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद मुआवजा उठाने वाले किसानों ने कोर्ट के आदेश को सर्वोपरि मानते हुए मुआवजा जमा कराया और अपनी जमीन अपने नाम दर्ज कराई। लेकिन अधिकांश किसानों ने मुआवजा जमा नहीं किया। जिसके चलते उनके नाम आज तक भूमि दर्ज नहीं हो सकी। अधिकृत भूमि रिलायंस पावर परियोजना एवं ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज है। जिस पर भू माफियाओं की नजर है। महाराणा संग्राम सिंह किसान कल्याण समिति अध्यक्ष मंगू सिंह राणा ने बताया कि जादोपुर गाँव के किसान गुलफाम, शमशाद, एहसान अली ,निजामु, उमर मोहम्मद आदि ने रिलायंस से मुआवजा तो लिया। लेकिन जमा नहीं कराया और जमीन का एग्रीमेंट भूमाफियाओं से कर लिया है। इसी तरह बझैडा, देहरा, जादोपुर के पट्टा धारक गोपाल ,राजेन्द्र, जायदा ,इलियास , धर्मवती, मनोज, मोहन, सुमन, कमलेश, शकुंतला ,सचिन ,आकाश ,शमशाद, विजेन्द्र आदि पट्टा धारकों ने विवादित एवं निरस्त पट्टे भू माफियाओं को एग्रीमेंट कर दिया हैं। बताया जा रहा है कि यह सब खेल सत्ता के करीब रहने वाले कुछ भू माफियाओं से जुड़ा है। समिति महासचिव युद्धिष्ठिर सिसोदिया ने बताया कि चार जनवरी को पहला इकरारनामा गैर आबाद माजरा नंदलालपुर की जमीन से जुड़ा प्रकाश में आया। खसरा संख्या 64 के अंश में 3795 वर्ग मीटर का इकरारनामा बझैडा खुर्द के किसान आशीष कुमार, सिद्धार्थ कुमार पुत्र लखपत सिंह हाल निवासी एच-443 गली नंबर 17 ,डी ब्लॉक बुद्ध विहार दिल्ली ने बेचा। जब पूरा देश लाकडाऊन की जद में था, तब धौलाना की तहसील प्रशासन की मिलीभगत से अवैध कार्य की हद पार हो रही थी। आखिर लोकडाउन में कैसे खुली रजिस्ट्री, कैसे हुए एग्रीमेंट यह जांच का विषय है। सूत्रों के मुताबिक मार्च में एक , अगस्त में सात, सितंबर में छह इकरार नामा किए गए।
अधिग्रहीत भूमि खुर्द-बुर्द कर अवैध खनन से लगाया राजस्व को करोड़ों का चूना
बझैडा आंदोलन के सूत्रधार वह किसान नेता मनोज भारद्वाज ने बताया कि तहसील प्रशासन की मिली भगत से ऊर्जा विभाग की भूमि पर कब्जे कराए जा रहे हैं। वही सत्ता के इर्द गिर्द घूमने वाले भूमाफिया रिलायंस की चारदीवारी को तहस-नहस कर अधिग्रहीत भूमि को खुर्द -बुर्द कर अवैध खनन का कारोबार कर अब तक करोड़ों रुपए के राजस्व को चूना लगा चुके हैं।
सीधा सवाल –
सरकार ने किसानों की भूमि का अधिग्रहण रिलायंस पावर प्रोजेक्ट के लिए किया, किसान विरोध में कोर्ट गए, कोर्ट ने अधिग्रहण की प्रक्रिया को असंवैधानिक बता कर किसानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार द्वारा दिया गया मुआवजा लौटाया जाएगा।जिन किसानों ने मुआवजा लौटा दिया। उनके नाम, उनकी जमीन वापस दर्ज हो गयी। जिन्होंने मुआवजा जमा नहीं किया। वह जमीन सरकार के ऊर्जा विभाग व रिलायंस के नाम ही दर्ज है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसानों से भू-माफिया किस की शह पर जमीन का इकरार नामा कर किसानों से जमीन खरीदने का धंधा कर रहे हैं। ऐसा ही प्रकरण परियोजना के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन में विवादित व निरस्त पट्टों से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि भले ही अधिग्रहण के 16 साल बाद भी 1995 में आवंटित पट्टटों का मामला नहीं सुलझा लेकिन पट्टा धारकों ने विवादित पट्टटों को भूमाफियाओं को इकरार नामा कर दिए ।इस खेल के पीछे तहसील प्रशासन का बड़ा हाथ साफ नजर आ रहा है।
एसडीएम कथन
उप जिलाधिकारी धौलाना अरविंद कुमार द्विवेदी का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। शासन को इस संबंध में अवगत कराया जा रहा है। किसानों की समस्या से संबंधित ज्ञापन मिला है। जिस पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। किसी भी सूरत में सरकार की भूमि पर किसी को कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। अवैध खनन करने वालों के खिलाफ लेखपालों को निर्देश दिए गए हैं कि वह ऊर्जा विभाग एवं रिलायंस की भूमि पर नजर रखें अवैध खनन करने वालों की सूची बनाकर प्रशासन को अवगत कराएं।
















