बिल्डर और बिजली विभाग के सिंडिकेट की परत दर परत खुल रही कलई
ग्रेटर नोएडा। कुछ बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए भ्रष्टाचार में फंसे बिजली विभाग के 23 इंजीनियरों की मुश्किलें बढ़ना तय हैं। प्रारंभिक जांच में दोषी पाए गए इन इंजीनियरों को 3 सप्ताह के भीतर लिखित जबाव दाखिल करना है। जबाव संतोषजनक न होने पर जांच टीम कड़ी कार्रवाई करने में कतई नहीं हिचकेगी। लगभग सौ करोड़ के इस घोटाले की जांच का जिम्मा जल्द एसटीएफ को सौंपा जा सकता है। इस प्रकरण से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी गायब हैं। इससे जांच का काम प्रभावित हो रहा है।
जनपद गौतमबुद्ध नगर में कुछ दिन पहले बिल्डर और बिजली विभाग के सिंडिकेट का बड़ा कारनामा प्रकाश में आया था। बिजली विभाग ने निर्माणाधीन क्षेत्रों में बिल्डर प्रोजेक्ट्स के लिए अस्थाई कनेक्शन देने में खेल किया था। इसके चलते राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद को करीब 100 करोड़ रुपए राजस्व की चपत लगने का अनुमान है। इस घपलेबाजी के प्रकाश में आने के बाद से पावर कारपोरेशन में नीचे से ऊपर तक हड़कंप मचा पड़ा है। भ्रष्टाचार के इस खेल से बिल्डरों और बिजली विभाग के इंजीनियरों को काफी फायदा पहुंचा था। योगी सरकार की जानकारी में मामला आने के बाद शक्ति भवन लखनऊ से जांच टीम को आनन-फानन में नोएडा भेजा गया था।
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अधीक्षण अभियंता (विद्युत) नोएडा वीरेंद्र कुमार सिंह ने लखनऊ से आई जांच टीम को रिपोर्ट भी सौंपी थी। जांच टीम ने नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में निमार्णाधीन एरिया का दौरा कर पूरे प्रकरण को उजागर किया था। पता चला था कि 23 इंजीनियर बिजली विभाग को चपत लगाकर बिल्डर को सीधा लाभ पहुंचाने में मशगूल थे। यह घपलेबाजी लंबे समय से चल रही थी। प्रारंभिक जांच में राजकीय विद्युत उपभोक्ता परिषद को तकरीबन 100 करोड़ की चपत लगने की संभावना जाहिर की गई है। लखनऊ से आई जांच टीम ने 23 इंजीनियरों की भूमिका को इंगित कर उन्हें चार्जशीट थमाई। इन इंजीनियरों के पास जबाव दाखिल करने के लिए सिर्फ 3 सप्ताह का समय है।
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यदि जबाव संतोषजनक नहीं हुआ तो उन पर कार्रवाई होना तय है। चार्जशीट मिलने से इंजीनियरों की हालत खराब है। सूत्रों का यह भी कहना है कि घोटाले से संबंधित कुछ दस्तावेज गुम हैं। चर्चा है कि दोषियों ने कलई खुलने के डर से यह दस्तावेज गायब करा दिए हैं। वहीं, चर्चा है कि इस प्रकरण की जांच शीघ्र एसटीएफ को सौंपी जा सकती है। एसटीएफ स्तर से जांच शुरू होने पर भ्रष्टाचार की तह तक पहुंचने में टीम को ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। फिलहाल पावर कारपोरेशन में नीचे से ऊपर तक खलबली मची है।
















