-प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर पार्षद ने की जांच की मांग
गाजियाबाद। साहिबाबाद के बृजविहार स्थित सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) कंपनी को साठगांठ कर एक फर्जी कंपनी को 210 करोड़ रुपए में बेचने की तैयारी हो रही है। सीईएल हजारों करोड़ रुपए की कंपनी है। बावजूद इसके एक फर्जी कंपनी को मात्र 210 करोड़ रुपए में बेचने की तैयारी हो रही हैं। यह बातें गुरूवार को आरडीसी स्थित होटल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा पार्षद दल के नेता राजेंद्र त्यागी ने कर्नल तेजेंद्रपाल त्यागी,वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाराशर, पार्षद हिमांशु मित्तल,वीरेंद्र सारस्वत,भूपेंद्र सिंह चितौडिय़ां की मौजूदगी में कहीं। उन्होंने सीईएल कंपनी के विनिवेश पर सवाल उठाते हुए इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस प्रकरण की जांच करने और लाभ कमाने वाली इस कंपनी को विनिवेश के दायरे से बाहर करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, वित्त मंत्री निर्मला सीमारमण, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन जयराम गडकरी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, तुहिन कांत पांडेय, सचिव डीएसआईआर और महानिदेशक डॉ. शेखर, निति आयोग नीति आयोग उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, मंडलायुक्त और यूपी के मुख्य सचिव को भी इस पत्र की प्रति भेजी है।
उन्होंने कहा कि जिस कंपनी को महज 210 करोड़ रुपए में बेचा जा रहा है। उस कंपनी के सभी एसेट्स को जोड़ा जाए तो 1500 से 2000 हजार करोड़ रुपए है। कम दामों में जहा कंपनी को बेचने की तैयारी की जा रही है वहीं जो कंपनी सीईएल कंपनी को खरीद रही है वह पहले से ही ब्लेक लिस्टेड है। उसकी क्षमता भी सीईएल को खरीदने की नहीं है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने बताया कि साहिबाबाद साईट-4 इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित सीईएल कंपनी की कुल परिसंपत्तियां करीब 2 हजार करोड़ रुपए की है। प्रति साल करोड़ों रुपए का लाभ कमाने वाली इस कंपनी को बेचने की तैयारी चल रही है। इस कंपनी से 1000 से अधिक कर्मचारी जुड़े है। कंपनी सौर ऊर्जा, रक्षा, रेलवे क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित करने वाली कंपनी हर वर्ष लाभ कमाती है। कंपनी के पास भी करीब 1500 करोड़ रुपए के ऑर्डर है। इससे भी वह भविष्य में लाभ कमाएगी। कंपनी की अपनी जमीन करीब 50 एकड़ है। जमीन की कीमत और बिल्डिंग का न्यूनतम मूल्य कम से कम 1 हजार रुपए निर्धारित होना चाहिए था। मगर इस कंपनी को केंद्र सरकार में बैठे कुछ गलत अधिकारियों के कारण कंपनी को कौडिय़ों के भाव बेचने की तैयारी है।
पार्षद राजेंद्र त्यागी ने कहा कि देश की नामी इस कंपनी की परिसंपत्तियों को बेचने के लिए केंद्र सरकार ने केवल 194 करोड़ रुपए बेसिक रेट रखा है। नियम है कि जब किसी परिसंपत्ति का निस्तारण किया जाता है तो उसमें कम से कम तीन कंपनियां टेंडर में शामिल होनी चाहिए। मगर केवल दो कंपनियों ने ही टेंडर में हिस्सा लिया। इनमें नंदलाल फाइनेंस एंड लेसिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने 210 करोड़ 60 हजार रुपए की बोली लगाई। जेपीएम इंडस्ट्रीज लिमिटेड की बोली 190 करोड़ रुपए की आई है। जबकि कंपनी की जमीन की कीमत ही करीब 440 करोड़ है। बिल्डिंग की कीमत 34 करोड़, पिछले वित्त वर्ष में कंपनी का टर्न-ओवर 296 करोड़ रहा है। सीईएल की विक्रय प्रक्रिया की गंभीर त्रुटि के कारण कंपनी को 210 करोड़ रुपए में बेचने की तैयारी है। जिस एनसीएफसी कंपनी को सीईएल बेचने की तैयारी है। उसे किसी भी तरह का अनुभव इस कंपनी को चलाने का नहीं है। आरोप है कि एनसीएफसी एक कमरे में चलने वाली कंपनी है। इस कंपनी के 99.96 प्रतिशत शेयर मैसर्स पीएफआई प्राइवेट लिमिटेड के पास है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि कंपनी को बेचने से रोका जाए। ताकि इसमें कार्य करने वाले कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रह सके।
















