गाजियाबाद जनपद में एक बार फिर लचर स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है। रिक्शा ठेले पर महिला मरीज की प्रारंभिक जांच करने और एंबुलेंस ना उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग को काफी भारी पड़ गया है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की नाराजगी के बाद लापरवाह डॉक्टर और वार्ड ब्वॉय को बर्खास्त कर दिया गया है।
गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद जनपद में एक बार फिर लचर स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है। रिक्शा ठेले पर महिला मरीज की प्रारंभिक जांच करने और एंबुलेंस ना उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग को काफी भारी पड़ गया है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की नाराजगी के बाद लापरवाह डॉक्टर और वार्ड ब्वॉय को बर्खास्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है। जिला एमएमजी अस्पताल गाजियाबाद में बुधवार को साहिबाबाद बी ब्लॉक की झुग्गी-झोपड़ी निवासी एक महिला को रिक्शा ठेला पर लाया गया था।
बार-बार फोन करने के बावजूद एंबुलेंस न आने पर परिजनों को बीमार महिला को रिक्शा ठेला पर लाना पड़ा था। इसके बाद अस्पताल परिसर में डॉक्टर ने ठेले पर अचेत पड़ी महिला की प्रारंभिक जांच कर उसे मेरठ रेफर कर दिया था। आरोप है कि अस्पताल में मरीज को स्ट्रेचर या व्हील चेयर तक उपलब्ध नहीं कराई गई थी। इस मामले के तूल पकड़ने पर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने सीएमओ गाजियाबाद को जांच कराकर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। दरअसल महिला मरीज को एआरटी सेंटर में तैनात डॉ. शील वर्मा ने रिक्शा पर देखा और रेफर कर दिया था।
मरीज को प्राथमिक उपचार तक नहीं दिया गया। इस मामले में वार्ड ब्वॉय मयंक की लापरवाही भी सामने आई। डिप्टी सीएम की नाराजगी के बाद सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधर ने सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी को जांच के निर्देश दिए थे। सीएमएस ने डॉ. एके दीक्षित, डॉ. संतराम वर्मा और डॉ. पंकज शर्मा से इस मामले की जांच कराई। जांच में डॉ. शील वर्मा और वार्ड ब्वॉय की घोर लापरवाही की तस्दीक होने पर दोनों की सेवा समाप्त करने की संस्तुति कर दी गई। इसके बाद दोनों को बर्खास्त कर दिया गया है। दोनों संविदा पर कार्यरत थे। इस कार्यवही से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मचा है।
















